Sunday , July 26 2026

एसजीपीजीआई में अब ओपीडी में ही एंडोस्कोपी से सिर एवं गर्दन के कैंसर की शुरुआती पहचान की सुविधा

-यूपी में अत्याधुनिक ओपीडी एंडोस्कोपी प्रयोगशाला स्थापित करने वाला पहला संस्थान है एसजीपीजीआई

सेहत टाइम्स

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) ने एक और सुविधा की शुरुआत करते हुए हेड एवं नेक सर्जरी विभाग में अत्याधुनिक ओपीडी एंडोस्कोपी प्रयोगशाला आरम्भ की है। इस सुविधा के शुरू होने से सिर एवं गर्दन के कैंसर की प्रारम्भिक चरण में पहचान ओपीडी में ही हो सकेगी। यह सुविधा वास्तविक समय (रियल-टाइम) में उन्नत निदान, आवश्यक प्रक्रिया (procedures) तथा उपचार के पश्चात नियमित निगरानी (सर्विलांस) उपलब्ध कराएगी। यह उत्तर प्रदेश के किसी भी सरकारी चिकित्सा संस्थान में स्थापित अपनी तरह की पहली अत्याधुनिक प्रयोगशाला है।

संस्थान द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इसका उद्घाटन 25 जुलाई को विश्व हेड एवं नेक कैंसर दिवस (World Head & Neck Cancer Day) के अवसर पर हेड एवं नेक सर्जरी विभाग द्वारा आयोजित “स्पंदन: कैंसर, उपचार और उससे आगे” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डीन प्रो. शालीन कुमार तथा विशिष्ट अतिथि संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता ने किया। हेड एवं नेक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अमित केशरी ने अपने स्वागत उद्बोधन में संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमन एवं संस्थान प्रशासन द्वारा निरंतर दिए गए सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया।

कैंसर पर विजय पाने वाले रोगियों की सराहना

इस अवसर पर प्रो. आर. के. धीमन ने अपने संदेश में कहा कि हेड एवं नेक कैंसर के उपचार में समय पर पहचान, जन-जागरूकता एवं बहु-विषयक उपचार (मल्टी डिसिप्लिनरी ट्रीटमेंट) पद्धति अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कैंसर से उबर चुके रोगियों के साहस और दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में जागरूकता बढ़ाने, मिथकों को दूर करने तथा समय पर उपचार के प्रति लोगों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में “स्पंदन” अर्थात “जीवन की धड़कन” की भावना को साकार करते हुए कैंसर से सफलतापूर्वक संघर्ष कर चुके रोगियों के अदम्य साहस और जिजीविषा का सम्मान किया गया। आशा एवं सम्मान के प्रतीक स्वरूप उन्हें गुलाब के पुष्प भेंट किए गए।

 कैंसर विजेताओं ने बताये अनुभव

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण “वॉयसेज़ ऑफ होप” (आशा के स्वर) नामक संवाद सत्र रहा, जिसमें कैंसर विजेताओं ने अपने उपचार, मानसिक दृढ़ता तथा कैंसर पर विजय की प्रेरणादायक जीवन यात्राएँ साझा कीं। इस मौके पर हेड एवं नेक सर्जरी, रेडियोथेरेपी, प्लास्टिक सर्जरी तथा मनोरोग विभाग के विशेषज्ञों ने समग्र उपचार एवं पुनर्वास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। साथ ही आहार विशेषज्ञ (डाइटिशियन) द्वारा रोगियों को उपचार के दौरान एवं उसके बाद उचित पोषण संबंधी मार्गदर्शन भी दिया गया। कार्यक्रम का समापन रोगियों के साथ आयोजित संवाद एवं प्रश्नोत्तर सत्र के पश्चात हेड एवं नेक सर्जरी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. इंदु शुक्ला द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।