-‘आस्था ओल्ड एज होम एंड हॉस्पिटल’ के संस्थापक डॉ अभिषेक ने हासिल की महत्वपूर्ण उपलब्धि

सेहत टाइम्स
लखनऊ। गंभीर एवं असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने और उपशामक चिकित्सा (पैलिएटिव केयर) के क्षेत्र में शोध को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वरिष्ठ जेरियाट्रिक एवं पैलिएटिव केयर विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक शुक्ल का चयन अमेरिका के प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड, बाल्टीमोर (University of Maryland, Baltimore) के पीएचडी इन पैलिएटिव केयर कार्यक्रम के लिए हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार इस शोध कार्यक्रम के माध्यम से डॉ. शुक्ल गंभीर एवं जीवन-सीमित करने वाली बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की देखभाल, उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार, देखभालकर्ताओं के सहयोग तथा वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपशामक चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर कार्य करेंगे। इस शोध से प्राप्त निष्कर्ष भारत में पैलिएटिव केयर सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को नयी दिशा देगा शोध
ज्ञात हो आज के समय में कैंसर, डिमेंशिया, अंग विफलता तथा अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि उपशामक चिकित्सा के क्षेत्र में उच्चस्तरीय शोध न केवल मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाएगा, बल्कि देश में मानवीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई दिशा देगा।
अनुभव, सेवा और अकादमिक योगदान
डॉ. अभिषेक शुक्ल पिछले 20 वर्षों से आस्था सेंटर फॉर जेरियाट्रिक मेडिसिन, पैलिएटिव केयर हॉस्पिटल, हॉस्पिस एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से वृद्धजन चिकित्सा, हॉस्पिस केयर, डिमेंशिया केयर तथा उपशामक चिकित्सा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनका चयन इस विशिष्ट शोध कार्यक्रम के लिए उनके लंबे अनुभव, सेवा और अकादमिक योगदान का प्रमाण है।
अमेरिका के किसी अग्रणी विश्वविद्यालय में केवल पैलिएटिव केयर विषय पर समर्पित पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश प्राप्त करना अत्यंत प्रतिस्पर्धी माना जाता है। इस विशेष क्षेत्र में शोध करने का अवसर विश्वभर के सीमित विशेषज्ञों को ही प्राप्त होता है। डॉ. शुक्ल उन चुनिंदा भारतीय चिकित्सकों में शामिल होंगे जो पैलिएटिव केयर के क्षेत्र में उच्चस्तरीय डॉक्टोरल शोध कर रहे हैं।
एवीडेंस बेस्ड थैरेपी निभायेगी अहम भूमिका
अपनी प्रतिक्रिया में डॉ. अभिषेक शुक्ल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उपशामक चिकित्सा केवल संवेदनशीलता का विषय नहीं है, बल्कि इसके लिए वैज्ञानिक शोध और प्रमाण आधारित चिकित्सा पद्धतियों का विकास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस शोध से प्राप्त अनुभव और ज्ञान भारत में उपशामक चिकित्सा सेवाओं, प्रशिक्षण, शोध एवं नीति निर्माण को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगा तथा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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