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डॉ सूर्यकान्त को पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन के लिए ‘देवभूमि ओरेशन अवॉर्ड’

-उत्तराखण्ड में आयोजित साइंटिफिक कॉन्फ्रेंस ‘पल्मोनरी कॉनक्लेव कॉर्बेट-2026’ में किया गया सम्मानित

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त को हाल ही में हुयी ‘पल्मोनरी कॉनक्लेव कारबेट-2026’ के दौरान उत्तराखण्ड के जिम कॉर्बेट, उत्तराखण्ड में आयोजित साइंटिफिक कॉन्फ्रेंस में ‘देवभूमि ओरेशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया, ओरेशन का विषय ’पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन’ था। डॉ सूर्यकान्त का यह 22वां ओरेशन अवार्ड है इससे पूर्व में भी चिकित्सा जगत के विभिन्न क्षेत्रों में उन्हें उल्लेखनीय योगदान के लिए 21 ओरेशन प्राप्त हो चुके है।

डॉ. सूर्यकान्त को यह सम्मान रेस्पिरेटरी मेडिसिन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय एवं दीर्घकालिक योगदान, उत्कृष्ट चिकित्सकीय सेवाओं, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, उच्चस्तरीय शोध कार्य तथा प्रेरणादायी नेतृत्व के लिए प्रदान किया गया। उनके द्वारा प्रस्तुत देवभूमि ओरेशन को सम्मेलन की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों में शामिल किया गया, जिसने उपस्थित विशेषज्ञों को नवीन शोध, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा श्वसन रोगों के प्रभावी प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट एवं चिकित्सा विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

व्यक्तिगत सम्मान नहीं, सामूहिक प्रयासों की पहचान

इस अवसर पर डॉ. सूर्यकान्त ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि केजीएमयू एवं उनके विभाग के सामूहिक प्रयासों की पहचान है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वे श्वसन रोगों की रोकथाम, आधुनिक उपचार, अनुसंधान तथा जनजागरूकता के क्षेत्र में समर्पित भाव से कार्य करते रहेंगे। विभाग के शिक्षकों, चिकित्सकों ने भी डॉ. सूर्यकान्त को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए हार्दिक बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनकी उपलब्धियाँ संस्थान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाती रहेंगी।

ज्ञात रहे कि पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन एक नई विधा है जिसमें सांस के रोगियों को उपचार के साथ फेफडे़ और शरीर को कैसे मजबूत बनाया जाये इसके लिए काफी उपयोगी होती है। उ0प्र0 के पहले पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केन्द्र की स्थापना रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग केजीएमयू में डा0 सूर्यकान्त द्वारा की गयी है, जिसमें पूर्णतः निःशुल्क सुविधा प्रदान की जाती है और अब तक 3000 से अधिक रोगियों को इसका लाभ मिल चुका है। साथ ही डा. सूर्यकान्त ने भारत में पहली बार इस कार्य से सम्बंधित एक राष्ट्रीय संगठन पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सोसाइटी की भी स्थापना की है, जिसके वे संस्थापक अध्यक्ष हैं।

हासिल कर चुके हैं अनेक उपलब्धियां

डॉ. सूर्यकान्त विश्व के सर्वोच्च 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की श्रेणी में भी स्थान प्राप्त है। वह रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में विगत 30 वर्षों से चिकित्सा शिक्षक, 21 वर्षों से प्रोफेसर व 15 वर्षों से विभागाध्यक्ष के पद सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा वह चिकित्सा विज्ञान सम्बंधित विषयों पर 25 किताबें भी लिख चुके हैं तथा एलर्जी, अस्थमा, टी.बी. एवं कैंसर के क्षेत्र में उनके अब तक लगभग 1000 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अन्र्तराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं साथ ही 2 अंतर्राष्ट्रीय पेटेन्ट का भी उनके नाम श्रेय जाता है। लगभग 200 एमडी/पीएचडी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन, 50 से अधिक शोध परियोजनाओं का निर्देशन, 22 फैलोशिप, 22 ओरेशन एवार्ड का भी श्रेय उन्हें जाता है। उन्हें अब तक अन्तरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा 230 पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. सूर्यकान्त पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से अपने लेखों व वार्ताओ एवं टी.वी. व रेडियों एवं इलेक्ट्रानिक/प्रिंट/सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो में टी.बी. रोग, अस्थमा, एलर्जी, लंग कैंसर व श्वसन संबंधी अन्य बीमारियों से बचाव व उपचार के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं। नई शिक्षा नीति की तीसरी वर्षगांठ पर पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा जारी हिंदी में 100 पुस्तकों का विमोचन किया गया उसमें डा0 सूर्यकान्त की 2 पुस्तकें ’टीबी’ एवं ’अस्थमा में योग की भूमिका’ हिन्दी में पुस्तक भी शामिल है। साथ ही 200 से अधिक टीबी के क्षेत्र में शोध पत्र एवं पुस्तकें भी प्रकाशित है। समय समय पर आम जनमानस के लिए इलेक्ट्रानिक एवं प्रिंट मीडिया के माध्यम से भी टीबी रोग के लेख, वार्ता, वीडियो आदि के द्वारा जागरूक करते रहते है।

डॉ. सूर्यकान्त वर्तमान में केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं केजीएमयू की कार्य परिषद के सदस्य हैं। वर्तमान में वे गवर्निंग बॉडी एम्स भुवनेश्वर तथा यू.पी. यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल सांइन्सेज, सैफई, इटावा के एकेडमिक काउंसिल के सदस्य भी है। वे पूर्व में लखनऊ विश्वविद्यालय के कार्य परिषद के सदस्य रहे हैं। इसके साथ ही वे यू.पी. यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइन्सेज, सैफई, इटावा की कार्य परिषद के सदस्य भी रहे हैं। वे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना के इन्स्टीट्यूट एवं गवर्निंग बॉडी एवं बोर्ड ऑफ मैनेजमेन्ट, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, जयपुर के सदस्य एवं स्टैंडिंग सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन भी रहे हैं। इसके साथ ही वे वैज्ञानिक समिति, वैश्विक रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) मीडिया एलायंस – गामा के सह-अध्यक्ष है, तथा इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट टीबी एंड लंग डिजीज द्वारा अपने IDEFETE TB प्रोजेक्ट के तहत स्थापित “सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स“ ड्रग रेजिसन्टेन्ट टी.बी. केयर एवं पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सेंटर, (यूपी में पहला सार्वजनिक केंद्र) के प्रभारी व स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड डिसऑर्डर सोसाइटी तथा पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सोसाइटी (पीआरएस) के संस्थापक अध्यक्ष है। आर्गेनाइजेशन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ़ एनवायरनमेंट एंड नेचर (ओशन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तरी क्षेत्र कार्य बल (भारत के नौ राज्य) राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, भारत के अध्यक्ष, राष्ट्रीय कोर समिति डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन (डीएफसीए) के सदस्य भी है। इसके साथ ही चेस्ट रोगों के विशेषज्ञों की राष्ट्रीय संस्थाओं इण्डियन चेस्ट सोसाइटी, इण्डियन कालेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एण्ड एप्लाइड इम्यूनोलॉजी एवं नेशनल कालेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन (एन0सी0सी0पी0) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके साथ ही इण्डियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन के मेडिकल साइंस प्रभाग के भी राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं एवं डा0 सूर्यकान्त आई0एम0ए0, लखनऊ के अध्यक्ष एवं उ0प्र0 आई0एम0ए0 एकेडमी ऑफ मेडिकल स्पेशलिटीज के चेयरमैन एवं आई0एम0ए0-ए0एम0एस0 के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन भी रह चुके हैं। वे इंडियन स्टडी अगेंस्ट स्मोकिंग के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं।