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आरएमएलआई में पहली बार दुर्लभ मीडियास्टाइनल पैराथायरॉयड एडेनोमा की सफल की-होल सर्जरी

-हाइपरपैराथायरॉयडिज्म से ग्रस्त 51 वर्षीय महिला की हुई सर्जरी, दो वर्षों में दो बार टूट चुकी थी कूल्हे की हड्डी

सेहत टाइम्स

लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने पहली बार एक दुर्लभ मीडियास्टाइनल पैराथायरॉयड एडेनोमा की सफल वीडियो-असिस्टेड थोराकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) कर 51 वर्षीय महिला को गंभीर बीमारी से स्थायी राहत दिलाई।

मीडिया सेल द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि महिला पिछले दो वर्षों में दो बार कूल्हे की हड्डी टूटने की समस्या से जूझ रही थी। जांच में पता चला कि वह प्राइमरी हाइपरपैराथायरॉयडिज्म से पीड़ित थी। इमेजिंग में हृदय और बड़ी रक्त वाहिनियों के पास सीने के भीतर 5.5 सेंटीमीटर का पैराथायरॉयड एडेनोमा मिला। मीडियास्टाइनल पैराथायरॉयड एडेनोमा अत्यंत दुर्लभ होता है और हाइपरपैराथायरॉयडिज्म के केवल लगभग 5–10 प्रतिशत मरीजों में ही पाया जाता है।

ट्यूमर की संवेदनशील स्थिति के कारण सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। ऑपरेशन के दौरान हृदय और प्रमुख रक्त वाहिनियों को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को बिना फटे सावधानीपूर्वक निकाला गया, क्योंकि ट्यूमर फटने पर भविष्य में बीमारी दोबारा होने का खतरा रहता है।

यह सर्जरी डॉ. अश्विनी राहलकर, डॉ. साराह इदरीस एवं डॉ. मिथुन राम ने प्रो. एस. के. मिश्रा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक की। एनेस्थीसिया टीम के लिए भी यह ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण रहा। सर्जरी के दौरान मरीज के एक फेफड़े को अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर दूसरे फेफड़े के सहारे सुरक्षित वेंटिलेशन दिया गया। यह जिम्मेदारी डॉ. दुर्गा प्रसाद, डॉ. अंशिका एवं डॉ. गोविंद ने प्रो. दास के मार्गदर्शन में निभाई।

यह आरएमएल अस्पताल में इस प्रकार की पहली सफल की-होल सर्जरी है। ऑपरेशन के बाद मरीज के पैराथायरॉयड हार्मोन का स्तर सामान्य हो गया है। अब उसे भविष्य में बार-बार हड्डियां टूटने और हड्डियों के कमजोर होने की समस्या से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।