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नौ माह तक ट्यूमर फेफड़े को दबाता रहा, डॉक्टर पहचान नहीं पाये, केजीएमयू ने बचायी जान

-प्रो सुरेश कुमार के नेतृत्व में हुई सर्जरी में युवती के सीने से निकाला गया ढाई किलो का ‘जर्म सेल ट्यूमर’

सेहत टाइम्स

लखनऊ। केजीएमयू (KGMU) के जनरल सर्जरी विभाग ने 25 वर्षीया युवती के सीने से 2.5 किलोग्राम का ‘जर्म सेल ट्यूमर’ निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। इस ट्यूमर की वजह से मरीज का दायां फेफड़ा पूरी तरह सिकुड़ गया था और यह दिल तथा मुख्य धमनी (एओर्टा) पर भारी दबाव डाल रहा था। यह भी पता चला है कि केजीएमयू आने से पूर्व प्राइवेट अस्पतालों द्वारा गलत डायग्नोसिस करने के कारण इलाज भी गलत होता रहा। इनमें एक अस्पताल द्वारा जहां टीबी समझकर इलाज किया गया वहीं दूसरे पुराने प्रतिष्ठित अस्पताल में भी गलत डायग्नोसिस के चलते इसे ‘पल्मोनरी हैमार्टोमा’ ट्यूमर बताया गया। स्थिति में सुधार न होता देख परिजन मरीज को लेकर केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग पहुंचे जहां सर्जन डॉ सुरेश कुमार से सही मर्ज को पकड़ते हुए सर्जरी को अंजाम दिया।

केजीएमयू मीडिया प्रवक्ता डॉ केके सिंह द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार मरीज को सबसे पहले जून 2025 में सांस फूलने और धड़कन तेज होने की शिकायत हुई थी। स्थानीय डॉक्टर जनवरी 2026 तक सामान्य दवाओं से इलाज करते रहे। इस बीच बीमारी की सही वजह जानने के लिए कोई जांच नहीं कराई गई। जनवरी 2026 में पहली बार छाती का एक्स-रे हुआ तो रिपोर्ट में दायां फेफड़ा पूरी तरह से सफेद (व्हाइट-आउट) दिखा। बाहर के एक अस्पताल में सीने में नली (ICD) डालकर पानी निकाला गया और मरीज को टीबी की दवाएं शुरू कर दी गईं।

बताया गया कि टीबी की दवा चलने से मरीज की हालत में सुधार नहीं हुआ बल्कि उसे बुखार और उल्टी होने लगी। मार्च 2026 में सीने में फिर से मवाद भर गया। इसके बाद मरीज को प्रतिष्ठित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सीटी स्कैन और बायोप्सी में ‘पल्मोनरी हैमार्टोमा’ नामक ट्यूमर होने की बात कही गई। वहां डॉक्टरों ने फेफड़े का एक हिस्सा निकालने (Lobectomy) की सर्जरी की सलाह दी।

बताया गया कि लगातार बिगड़ती हालत के बीच मरीज 6 अप्रैल 2026 को केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने जब बारीकी से रिपोर्ट देखी, तो उन्हें ‘जर्म सेल ट्यूमर’ (टेराटोमा) की आशंका हुई। इसके बाद दोबारा सीटी स्कैन और बायोप्सी कराई गई, जिसमें सीने के अगले हिस्से में ‘मैच्योर टेराटोमा’ होने की पुष्टि हुई। ट्यूमर इतना बड़ा था कि मरीज के दिल की धड़कन 150 प्रति मिनट तक पहुंच गई थी और ट्यूमर हृदय पर खतरनाक दबाव बना रहा था।

हृदय रोग और एनेस्थीसिया विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद 21 अप्रैल को जनरल सर्जरी विभाग के प्रो. सुरेश कुमार के नेतृत्व में मरीज का ऑपरेशन किया गया। लगभग साढ़े चार घंटे तक चली बेहद जटिल सर्जरी में डॉक्टरों ने सीने (एंटीरियर मेडियास्टिनम) से 2.5 किलो वजन का यह विशाल ट्यूमर बाहर निकाला। सर्जरी के दौरान जैसे ही ट्यूमर का दबाव हटा, मरीज का सिकुड़ा हुआ दायां फेफड़ा पूरी तरह से फैल गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में रखा गया। मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ और 9वें दिन सीने की नली निकालकर उसे डिस्चार्ज करने की प्रक्रिया पूरी की गई।

मरीज और उसके परिजनों ने प्रो सुरेश कुमार और उनकी टीम के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा है कि महीनों की पीड़ा और गलत डायग्नोसिस झेलने के बाद जो राहत मिली है, उसके लिए केजीएमयू की टीम सराहनायोग्य है।