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हीट वेव से बचने के लिए खुद को ठंडा रखें : डॉ आशुतोष कुमार दुबे

-बच्चे, बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं का विशेष ध्यान रखें

-डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय के परामर्शी चिकित्सक ने हीट वेव से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातों की दी जानकारी

डॉ आशुतोष कुमार दुबे

 

सेहत टाइम्स

लखनऊ। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल के परामर्शी चिकित्सक डॉ आशुतोष कुमार दुबे ने कहा है कि हीट वेव यानी अत्यधिक गर्मी, यह शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। जैसे डिहाइड्रेशन, हीट एक्सॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी स्थिति जानलेवा हो सकती है। इसलिए इससे बचाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चे, बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं का विशेष ध्यान रखें।

 

दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें

दिन के सबसे गर्म समय (दोपहर 12 से 4 बजे तक) बाहर निकलने से बचें।
ढीले, हल्के रंग के और सूती पूरी बांह के कपड़े पहनें।
सिर को टोपी, गमछा या छाता से ढकें।
घर में ठंडक बनाए रखने के लिए पंखा, कूलर या एसी का उपयोग करें।

“पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लें”

दिन में बार-बार पानी पीयें, प्यास लगने का इंतजार न करें।
नियमित रूप से ओआरएस, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी लें।
चाय, काफी और शराब से बचें।

खान-पान का विशेष ध्यान रखें

हल्का, सुपाच्य और ताजा भोजन करें।
तला-भुना और मसालेदार खाना कम खाएं।
फल जैसे तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, संतरा आदि अधिक लें।
घर से बाहर निकलते समय पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर निकलें।
और पीने के लिए स्वच्छ जल अपने साथ लेकर चलें।
यदि बाहर प्यास लगे तो मानक युक्त जल या इंडियामार्का हैंड पंप का ही जल प्रयोग करें। इधर-उधर का पानी ना पीयें।
बाजार में बिकने वाली सड़क के किनारे की बर्फ, आइसक्रीम या खुले में बिकने वाले कटे फल और दूध या दूध की बनी मिठाइयों से परहेज रखें।

घर और आसपास का वातावरण धूप मुक्त रखें

खिड़कियों पर पर्दे, सनशेड या सफेद पेपर लगाएं।
दोपहर में घर के खिड़की दरवाजे को बंद रखें।
घरों की खुली छत को छाया दार बनाएं या मिट्टी की क्यारी बनाकर पानी से भरें।

हीट स्ट्रोक के लक्षण को पहचानें

बहुत तेज बुखार (40°C या अधिक) का आना।
चक्कर, उल्टी, बेहोशी का आना।
त्वचा का सूखी और गर्म हो जाना।
बार-बार अत्यधिक प्यास लगना और ओठों का सूखना।
यह सब हीट स्ट्रोक के लक्षण हो सकते है। ऐसे व्यक्ति को तुरंत ठंडी जगह ले जाएं, स्वच्छ जल से भिगोकर ठंडा करें, ओआरएस का घोल पिलाएं और तत्काल डॉक्टर को दिखाएं

 

क्या न करें

 

बंद गाड़ी में बच्चों या पालतू जानवरों को न छोड़ें।
प्रयास करें कि अपनी गाड़ी को बाहर धूप में ना खड़ी करें और खड़ी करते समय उनकी खिड़कियों के शीशे थोड़ा सा खोलकर ही खड़ी करें।
दोपहर में स्वचालित वाहनों को चलाने से बचें।
ज्यादा मेहनत के काम धूप में न करें।

डॉ आशुतोष का कहना है कि हीट वेव से बचाव का सबसे सुगम साधन है-स्वच्छ जल, ताजा सुपाच्य भोजन और धूप से बचाव। समय रहते सतर्क रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। शरीर आपका है, इसे स्वस्थ रखना, आपकी ही जिम्मेदारी है।