-विश्व होम्योपैथी दिवस पर केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में स्वास्थ्य मेला एवं निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श शिविर आयोजित

सेहत टाइम्स
लखनऊ। लखनऊ उत्तर के विधायक डॉ नीरज बोरा ने कहा है कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति सुरक्षित, सरल एवं किफायती है, जो आम जनमानस के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। इन दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है क्योंकि अन्य चिकित्सा पध्दतियों की औषधियाँ मानव शरीर के रक्त में घुलकर (Blood Transmission) कार्य करती है जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जब कि होम्य़ोपैथिक औषधियाँ मानव शरीर में न्य़ूरोट्रांसमिशन (Neurotransmission) के माध्यम से कार्य करती है, जिसके कारण इस पध्दति का मानव शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। होम्योपैथिक दवाएं बहुत से असाध्य रोगों में भी प्रभावी है, इसका उदाहरण मेरे परिवार के सदस्य हैं, जिन्हें पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (पीसीओडी), गर्भाशय में गांठ (यूटराइन फाइब्रॉइड) जैसे रोगों में होम्योपैथिक दवाओं से लाभ मिल चुका है।
डॉ बोरा ने ये विचार यहां आज 10 अप्रैल को यहां केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर आयोजित किये गये एक भव्य स्वास्थ्य मेला एवं निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श शिविर का उद्घाटन करने के बाद अपनी स्पीच में व्यक्त किये। उन्होंने सर्वप्रथम दीप प्रज्ज्वलन के साथ होम्योपैथिक के जनक डॉ सैमुअल हैनीमैन की 271वीं जयन्ती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने आम जनता के लिए आयोजित इस प्रकार के स्वास्थ्य मेलों को जनकल्याण की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया।
डॉ बोरा ने केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद, लखनऊ की उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संस्थान की सेवाओं का लाभ पूरे प्रदेश के साथ अन्य प्रदेशों की आम जनता को मिल रहा है, यह अत्यन्त प्रसन्नता की बात है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री जी के निर्देशों पर आयुष चिकित्सा पद्धतियों के विकास पर योजनाबद्ध तरीके से यह कार्य किया जा रहा है। डॉ बोरा ने बाह्य रोगी विभाग में उपस्थित मरीजों से मिलकर संस्थान की सेवाओं के बारे में विस्तृत जानकारी ली तथा संस्थान के सभी विभागों का भ्रमण किया।
आयोजित स्वास्थ्य मेले में मरीजों की नि:शुल्क हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर एवं रक्तचाप जांच कर चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क औषधियां प्रदान की गईं। साथ ही, विभिन्न रोगों के प्रति जागरूकता के लिए आवश्यक परामर्श भी दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। शिविर में अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के अंतर्गत वेलनेस किट भी वितरित की गई, जिससे वे अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्य संरक्षण को अपनाकर लाभान्वित हो सकें।
कई रोगों पर चल रही हैं अनुसंधान परियोजनाएं : डॉ लिपिपुष्पा देबता
संस्थान की प्रभारी अधिकारी डॉ लिपिपुष्पा देबता ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों तक सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना तथा होम्योपैथी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है एवं उन्होने इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम में संस्थान की वर्तमान परियोजना हाइपोथायराइड, मसों(वार्ट), सफेद दाग(विटिलिगों), बहु-रोग, सर्वाइकल लिम्फाडेनोपैथी, उष्णकटिबंधीय लहर(हीट वेव), माइग्रेन, मोलस्कम कॉन्टैजियोसम, किशोरीवस्था में प्राथमिक मासिक धर्म पीड़ा, फैटी लिवर रोग, दवा के प्रतिकूल प्रभाव, नैदानिक सत्यापन, एस.सी.एस.पी- रोगियों की संतुष्टि सर्वेक्षण तथा विटामिन-डी की कमी और होम्योपैथी एवं आगामी परियोजना मासिक स्वास्थ्य, डायबिटीज मेलिटस और य़ोग, डायबिटीज मेलिटस और मदर टिंचर, सौम्य न्यूरोकॉग्निटिव विकार, मटीरिया मेडिका, एलर्जिक राइनाटिस, सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, हाइपर यूरीसीमिय़ा , मेलाज्मा के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान कर आम जनमानस को जागरूक किया, जिससे वह इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठा सकें। उन्होंने बताया कि यह शिविर केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में प्रत्येक माह के चतुर्थ शनिवार को आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारिय़ों, कर्मचारियों, अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
इस मौके पर “वृद्धावस्था देखभाल में होम्योपैथिक अनुसंधान को आगे बढ़ाना : प्रमाण, चुनौतियाँ और भविष्य की दिशाएँ” और “अंतर से प्रमाण तक: बाल चिकित्सा होम्योपैथिक अनुसंधान में बहस और भविष्य की दिशाएँ” विषयों पर पैनल चर्चा के दो सत्रों का आयोजन किया। सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. वी.ए. सिद्दीकी (सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (एच), केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान) थे।
समारोह में डॉ. वी.ए. सिद्दीकी, सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद नयी दिल्ली) डॉ. जे.पी. सिंह, सेवानिवृत्त सहायक निदेशक केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद, लखनऊ, विनय कृष्ण पाण्डेय, महासचिव जानकीपुरम विस्तार संयुक्त कल्याण महासमिति, लखनऊ, डॉ. लिपिपुष्पा देबता, प्रभारी अधिकारी, केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद, लखनऊ, डॉ. अमित श्रीवास्तव, अनुसंधान अधिकारी, डॉ. दिव्या वर्मा, अनुसंधान अधिकारी एवं सभी कर्मचारी उपस्थित रहे।

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