-सांस उखड़ने का कारण पता चलने से समय रहते हो सकेगा सटीक उपचार, बच जायेगी जान

सेहत टाइम्स
लखनऊ। कई बार ऐसा होता है कि रोगी की सांस फूल रही है, लेकिन जब हृदय रोग की जांच के लिए इको कराया गया तो पम्पिंग पावर और इजेक्शन नॉर्मल दिखने के बावजूद हार्ट फेल्योर हो जाता है। यह स्थिति हार्ट फेलियर विद प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन (HFpEF) कहलाती है। इस बीमारी की डायग्नोसिस एक बड़ी चुनौती है, मरीज इधर से उधर जाता है लेकिन चिकित्सक इस स्थिति को नहीं जान पाते हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि चिकित्सक खून से होने वाली एक महत्वपूर्ण जांच ‘एंटी’ या बायोमार्कर टेस्ट NT-proBNP (N-terminal pro-B-type natriuretic peptide) अवश्य करायें। इस जांच से यह पता लग जाता है कि सांस फूलने का कारण फेफड़े हैं या हृदय रोग।
यह जानकारी कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया यूपी चैप्टर द्वारा आयोजित कार्डिकॉन 2026 के प्रथम दिन लारी कार्डियोलॉजी के डॉ अभिषेक सिंह ने अपनी प्रस्तुति में दी। उन्होंने बताया कि एनटी प्रो बीएनपी NT-proBNP टेस्ट में रक्त परीक्षण हृदय की मांसपेशियों पर पड़ने वाले तनाव को मापते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हार्ट फेलियर विद प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन डायग्नोस हो जाती है तो बाकी पैरामीटर देखते हुए इसका इलाज अब मुश्किल नहीं है, अब इसके लिए दो दवाएं उपलब्ध हैं। रिसर्च में यह सामने आया है कि इन दवाओं के आने के बाद से अस्पताल में भर्ती होेने की संख्या में कमी आयी है और मृत्यु दर भी कम हुई है। उन्होंने बताया कि इन दवाओं से तुरंत ही थक्का डिजॉल्व हो जाता है। उन्होंने बताया कि अगर दवाओं से थक्का नहीं खत्म होता है तो स्टंट लगाकर भी थक्का खत्म कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि एकदम से यदि व्यक्ति की सांस फूल रही है तो उसे सबसे पहले इमरजेंसी में जाना चाहिये जहां उसका तुरंत ही चेस्ट एक्सरे, इको जांच और एनटी प्रो बीएनपी टेस्ट कराना चाहिये। उन्होंने कहा कि सांस फूलने के कारण जो जानलेवा हैं उनमें एक है हार्ट से रिलेटेड परेशानी जिसमें एक पल्मोनरी एम्बॉलिज्म बहुत महत्वपूर्ण है, इसमें खून का थक्का हार्ट की नसों में तो नहीं लेकिन हार्ट से लंग को खून की सप्लाई करने वाली नसों में थक्का जम जाता है जिससे लंग को खून की सप्लाई रुक जाती है, और मरीज की जान तुरंत जाने का खतरा रहता है। इसका मुख्य लक्षण है एकदम से सांस उखड़ जाना। उन्होंने कहा कि यह खतरा विशेषकर उन लोगों को होता है जो बिस्तर पर पड़े हुए हैंं। दरअसल होता यह है कि जब व्यक्ति मूवमेंट नहीं करता है तो पैर की नसों में खून का थक्का जम जाता है, यह थक्का जब पैर की नसों से फेफड़ों की नसों में जाकर फंसता है तो जानलेवा बन जाता है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सकों विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के चिकित्सकों तक यह संदेश पहुंचाने की जरूरत है कि अचानक यदि व्यक्ति की सांस उखड़ रही है तो तुरंत ही उसके तीन टेस्ट चेस्ट एक्सरे, इको जांच और एनटी प्रो बीएनपी टेस्ट अवश्य करायें। एनटी प्रो बीएनपी टेस्ट की जांच खून से होती है और इसे किसी भी स्थान पर किया जा सकता है। इन तीनों जांचों को कराने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पता चल जाता है कि सांस फूलने का कारण दिल की बीमारी है या फेफड़े की।
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