-कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रेसीडेंट डॉ धीमान कहाली ने बचाव और गोल्डेन आवर में उपचार पर दी अहम जानकारी

सेहत टाइम्स
लखनऊ। मौजूदा समय में दो बड़ी चुनौतियां हैं, पहली चुनौती यह कि बड़ों के साथ ही कम उम्र के लोगों के हृदय रोगों की चपेट में आने से कैसे बचाया जाये तथा दूसरी चुनौती यह कि जो लोग हृदयाघात के शिकार हों उन्हें गोल्डन आवर में उपचार कैसे दिया जाये। कुल हार्ट अटैक में 50 प्रतिशत हार्ट अटैक 50 वर्ष से कम उम्र वालों को होते हैं।
यह बात कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रेसीडेंट डॉ धीमान कहाली ने कही। डॉ कहाली यहां आयोजित कार्डिकॉन 2026 में हिस्सा लेने आये हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कम उम्र में हार्ट अटैक बाहरी देशों की अपेक्षा 1 से 2 दशक पूर्व हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसा देखा गया है कि 50 वर्ष से कम उम्र वाले जिन लोगों को हार्ट अटैक होता है उनमें कोई न कोई वजह पहले से होती है। इन वजहों में पारिवारिक इतिहास, डायबिटीज, धूम्रपान की आदत, पान मसाला तम्बाकू, खैनी का सेवन शामिल हैं। विश्व भर में एक बड़ी वजह जो कॉमन है वह तम्बाकू का सेवन है।
उन्होंने कहा कि हम में से हर व्यक्ति जो धूम्रपान नहीं करता है, वह भी प्रदूषण के रूप में औसतन रोजाना 25 सिगरेट के धुएं को शरीर के अंदर ले रहा है। उन्होंने कहा कि कमोवेश सभी शहरों में नुकसान की सीमा से ज्यादा वायु प्रदूषण रहता है, सर्वाधिक प्रदूषण दिल्ली में है जहां का वायु प्रदूषण सूचकांक औसतन 500 से ज्यादा रहता है, जबकि लखनऊ, कोलकाता, पटना जैसी सभी मेट्रो सिटी में वायु प्रदूषण सूचकांक नॉर्मल से ज्यादा रहता है। वायु में पाये जाने वाले हानिकारक कणों (पीएम 5, पीएम 10) को माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में मापा जाता है। उन्होंने कहा कि हवा में मौजूद ये हानिकारक कण फेफड़ों और हृदय को नुकसान पहुंचाते हैं।
डॉ धीमान ने बताया कि इस वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाडि़यों की संख्या कम करनी होगी, सोलर पावर, इलेक्ट्रिॉनिक गाडि़यों का ज्यादा इस्तेमाल करना होगा, पेड़ ज्यादा लगाने होंगे, पेड़ों की अवैध कटान बंद करनी होगी, बिल्डिंग मैटीरियल को हवा में उड़ने से रोकने के उपाय करने होंगे, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लाइस्राइड को कंट्रोल में रखना होगा।
डॉ धीमान ने कहा कि जिन लोगों को हार्ट अटैक होता है वह डॉक्टर के पास देर से पहुंच पाता है, पहले दो घंटों को गोल्डन आवर पीरियड कहा जाता है, उसमें नहीं आ पाता है, इसका नतीजा यह होता है कि देर से आने पर हार्ट को काफी नुकसान हो चुका होता है। इस दिशा में भी कार्य किये जाने की आवश्यकता है।

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