बंद रहीं दवा की दुकानें, मरीज हुए परेशान

दवा व्यापारियों ने निकाला मार्च, सौंपा ज्ञापन

लखनऊ। दवा बेचने के लिए पोर्टल में पंजीकरण की अनिवार्यता सहित अन्य मांगों को लेकर दवा व्यापारियों ने आज 30 मई को दवा कारोबार ठप रखा। लाटूश रोड स्थित मेडिसिन मार्केट सहित शहर में सभी अंग्रेजी दवाओं की दुकानें बंद रहीं। सरकारी और निजी अस्पतालों में स्थित दवा की दुकानों को बंदी से अलग रखा गया था। आज अपनी मांगों को लेकर दवा व्यापारियों ने यहां जिमखाना क्लब से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाला तथा ज्ञापन सौंपा।
ज्ञात हो ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एआईओसीडी ने दवाओं की बिक्री के लिए बनाये नये नियमों के विरोध स्वरूप 30 मई को दवा की दुकानों की देशव्यापी बंदी की घोषणा की थी। संगठन का कहना है कि सरकार की नयी नीति के अनुसार मैन्यूफैक्चरर्स सहित सभी दवा व्यापारियों को ड्रग पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है और प्रत्येक दवा की बिक्री इसी पोर्टल के जरिये करना अनिवार्य किया जा रहा है जो कि पूरी तरह से अव्यवहारिक है। इसके तहत किसी भी रिटेलर को अगर मरीज को दवा देनी है तो पहले डॉक्टर का परचा स्कैन कर अपलोड करना पड़ेगा, बिल बना कर इस पोर्टल पर अपलोड करना होगा तथा फाइनल बिल पोर्टल द्वारा जारी करने तथा फाइनल इनवॉयस पोर्टल द्वारा जारी करने के बाद ही दवा मरीज को दे पायेगा। संगठन के  अनुसार  इसी तरह स्टाकिस्ट खुदरा दवा व्यापारी को माल देने से पहले इनवॉयस अपलोड करेगा तथा फाइनल इनवॉयस पोर्टल द्वारा जारी करने के बाद ही दवा रिटेलर को दे पायेगा। इसके साथ ही इनवॉयस वैल्यू सरकार को व्यापारियों द्वारा दी जायेगी।
लखनऊ शाखा के अध्यक्ष दिवाकर सिंह के नेतृत्व में करीब 1000 व्यापारी जिमखाना क्लब से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाल कर गये तथा ज्ञापन सौंपा। संगठन के पदाधिकारी गिरिराज रस्तोगी, अनिल जय सिंह, हरिश्चन्द, सुरेश कुमार, सुदीप दुबे, ओपी सिंह, विकास रस्तोगी सहित अन्य पदाधिकारी मार्च में शामिल रहे।
बंदी के कारण सरकारी व निजी अस्पतालों में खुली दवा की दुकानों पर भीड़ ज्यादा दिखी। केजीएमयू के बाहर स्थित दवा की दुकानों के सामने भी अनेक मरीज परचा लेकर भटकते दिखे। हालांकि यहां केजीएमयू कैम्पस में दुकानें हैं लेकिन वहां भीड़ जबरदस्त थी।