फांसी लगाकर जान देने की कोशिश करने वाली युवती को मौत के मुंह से वापस लाया लोहिया अस्‍पताल

10 दिन पहले मरणासन्‍न स्थिति में भर्ती कराया गया था युवती को

लखनऊ। करीब दस दिन पूर्व फांसी लगाकर जान देने की कोशिश करने वाली युवती को मौत के मुंह से वापस लाने में डॉ राम मनोहर लोहिया संयुक्‍त चिकित्‍सालय के चिकित्‍सकों को सफलता मिली है। युवती जब आयी थी तब कोमा में थी, फि‍लहाल अब वह ठीक है।

 

इस बारे में जानकारी देते हुए अस्‍पताल के निदेशक डॉ डीएस नेगी ने बताया कि बीती 26 जून को सायं करीब 6 बजे इंदिरा नगर की रहने वाली 30 वर्षीय युवती को कोमा की स्थिति में अस्‍पताल लाया गया था और बताया गया था कि युवती ने कॉटन के दुपट्टे का फंदा बनाकर पंखे से लटक कर जान देने की कोशिश की थी। उन्‍होंने बताया कि युवती जब अस्‍पताल पहुंची तो वह कोमा में थी, उसकी सांस बहुत धीमे चल रही थी तथा ब्‍लड प्रेशर लो था। उन्‍होंने बताया कि मरीज को तुरंत वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया गया तथा उपचार शुरू किया गया। उन्‍होंने बताया कि इसके बाद 30 जून को मरीज ने वेंटीलेटर पर ही आंखे खोलना खोलना शुरू किया तथा 1 जुलाई को हाथ-पैर हिलाना शुरू किया लेकिन उसकी आवाज नहीं आयी थी। उन्‍होंने बताया कि 4 जुलाई को मरीज ने फुसफुसाकर बोलना शुरू किया।

 

डॉ नेगी ने बताया कि आज 7 जुलाई को मरीज की गरदन का एमआरआई कराया गया तो गर्दन की रीढ़ की हड्डी का आंशिक फ्रैक्‍चर निकला तथा सांस की नली में दायीं तरफ सूजन निकली है। उन्‍होंने बताया कि अब मरीज अपने आप खड़ी हो रही है तथा बोल भी रही है। मरीज के उपचार में जिन चिकित्‍सकों एवं स्‍टाफ की भूमिका महत्‍वपूर्ण रही उनमें एनेस्‍थेटिस्‍ट निदेशक डॉ डीएस नेगी, फि‍जीशियन डॉ अविनाश चंद्र श्रीवास्‍तव, वेंटीलेटर की टीम के डॉ डीके त्रिपाठी, डॉ भास्‍कर प्रसाद, डॉ जेपी तिवारी, डॉ बीबी भट्ट, डॉ एसके सिंह, डॉ संगुफ्ता अंसारी, डॉ जैकी गर्ग, डॉ छाया, डॉ अमृता, स्‍टाफ नर्स विनीता मिश्रा एवं श्रद्धा शुक्‍ला शामिल रहीं।