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केजीएमयू व आईआईटी कानपुर ने बनाया पहनने योग्य स्तन स्वास्थ्य निगरानी उपकरण, पेटेंट हासिल

-हल्के वजन के सेंसर पैच के रूप में डिज़ाइन इस उपकरण को अंतवस्त्रों के नीचे सहजता से पहनना संभव

डॉ ऋषि सेठी—————————————- श्रेया नायर——————————— डॉ पूजा रमाकांत

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ–आईआईटी कानपुर के संयुक्त बायोडिज़ाइन कार्यक्रम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल बायोडिज़ाइन – सिनर्ज़ाइजिंग हेल्थकेयर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (SIB SHInE)को एक नवोन्मेषी चिकित्सा तकनीक “ए वेयरेबल सेंसर पैच फॉर ब्रेस्ट एब्नॉर्मैलिटी मॉनिटरिंग” के लिए पेटेंट प्रदान किया गया है।

यह पेटेंट प्राप्त उपकरण एक नॉन-इनवेसिव (बिना चीरा-छेद) पहनने योग्य समाधान के माध्यम से स्तन स्वास्थ्य की प्रारंभिक पहचान और निरंतर निगरानी में सहायक है। हल्के वजन के सेंसर पैच के रूप में डिज़ाइन किया गया यह उपकरण कई घंटों तक स्तन पर आसानी से लगाया जा सकता है तथा अंतर्वस्त्रों के नीचे सहजता से पहना जा सकता है, जिससे दैनिक गतिविधियों में बिना किसी बाधा के लगातार निगरानी संभव हो पाती है।

इस उपकरण की परिकल्पनाSIB SHInE कोहोर्ट-1 के क्लिनिकल इमर्शन चरण के दौरान डॉ. पूजा रमाकांत, एंडोक्राइन सर्जरी, KGMU के क्लिनिकल मार्गदर्शन में की गई, जहाँ श्रेया नायर, SIB SHInE की फेलो, ने इस अपूर्ण चिकित्सीय आवश्यकता की पहचान की। माइक्रोबायोलॉजी पृष्ठभूमि से आने वाली श्रेय ने इस अवधारणा को डॉ. तुषार संधान, प्रोफेसर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के इंजीनियरिंग मार्गदर्शन में एक कार्यशील प्रोटोटाइप में परिवर्तित किया। श्रेया ने महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत स्टार्टअप ब्रेला इनोवेशन्स की भी स्थापना की है।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. ऋषि सेठी, कार्यकारी निदेशक, SIB SHInE ने कहा कि स्कूल ऑफ इंटरनेशनल बायोडिज़ाइन की स्थापना का उद्देश्य चिकित्सकों और इंजीनियरों को एक साझा मंच पर लाकर अपूर्ण चिकित्सीय आवश्यकताओं की पहचान करना और व्यावहारिक, रोगी-केंद्रित समाधान विकसित करना है। उन्होंने कहा, “यह पेटेंट KGMU और IIT कानपुर से उभर रहे बायोडिज़ाइन आधारित स्वास्थ्य नवाचारों की बढ़ती प्रभावशीलता और सहयोगात्मक नवाचार की शक्ति को दर्शाता है।”

SIB SHInE, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर का एक संयुक्त बायोडिज़ाइन कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2022 में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारत सरकार के मार्गदर्शन में की गई थी। सुमित कुमार वैश्य, सीनियर प्रोग्राम मैनेजर, SIB SHInE, KGMU ने बताया कि SIB SHInE अब तक दो फेलोशिप कोहोर्ट सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुका है और शीघ्र ही तीसरे कोहोर्ट के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में इस कार्यक्रम से मेडटेक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में चार स्टार्टअप्स का सृजन हुआ है। सुमित स्वयं भी एक नवोन्मेषक एवं मेडटेक इंजीनियर हैं।

कुलपति, प्रो. डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर SIB SHInE की टीम और नवोन्मेषकों को बधाई दी तथा स्वदेशी चिकित्सा उपकरण नवाचार को आगे बढ़ाने में उनके योगदान की सराहना की।
यह पेटेंट प्राप्त वेयरेबल सेंसर पैच, स्वदेशी चिकित्सा उपकरण विकास को प्रोत्साहित करने और चिकित्सीय आवश्यकताओं को प्रभावशाली तकनीकों में परिवर्तित करने की SIB SHInE की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करता है, जिससे रोगी देखभाल में सुधार संभव हो सकेगा।

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