इन निर्देशों से पता चल जायेगा कि कौन सा पेंच ढीला है अस्‍पताल की व्‍यवस्‍था का

संयुक्‍त निदेशकों को सौंपी गयी एक-एक जिले के अस्‍पताल के निरीक्षण की जिम्‍मेदारी

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने प्रदेश भर के अस्‍पतालों में दवा, जांच से लेकर डॉक्‍टर तक की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने की जिम्‍मेदारी संयुक्‍त निदेशकों को सौंपी है। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में तैनात संयुक्‍त निदेशकों को एक-एक जिले का प्रभारी बनाकर अस्‍पतालों की व्‍यवस्‍था दुरुस्‍त करने के लिहाज से माह में तीन दिन निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिये हैं। यानी अस्‍पताल सुचारु रूप से चलें इसकी सुनिश्चितता की जिम्‍मेदारी संयुक्‍त निदेशकों को सौंपी है, यही नहीं हर माह निरीक्षण की रिपोर्ट भी मांगी है।

 

चूंकि यह निरीक्षण चेकलिस्‍ट के आधार पर किया जाना है तो खामी का पता चलने में आसानी होगी। क्‍योंकि चेक लिस्‍ट के हिसाब से संयुक्‍त निदेशक जान सकेंगे कि उसके अनुरूप कार्य हो रहा है या नहीं। इसका अर्थ यह हुआ कि संयुक्‍त निदेशक को अगर निरीक्षण के दौरान मानव संसाधन से लेकर, जांच मशीन, पैथोलॉजी कहीं भी कोई कमी दीखती है तो उसे अपनी रिपोर्ट के जरिये सीधे शासन के संज्ञान में लाना होगा। ऐसे में वह कमी विभागीय स्‍तर की वजह से है या शासन के स्तर की वजह से, इसका अंदाजा लग सकेगा। उदाहरण के लिए अगर कहीं पैथोलॉजी में जांच नहीं हो रही है, या एक्‍स रे नहीं हो रहा है, या मरीज नहीं देखे जा रहे हैं तो ऐसा क्‍यों हो रहा है, यह सामने आ जायेगा। मान लीजिये अस्‍पताल में मरीज का एक्‍स रे नहीं हो रहा है तो इसकी वजह ये हो सकती हैं कि टेक्‍नी‍शियन ही तैनात नहीं है, या वह ड्यूटी से गायब है या एक्‍स रे मशीन खराब है। इन तीनों ही स्थितियों में कम से कम जिम्‍मेदारी तो तय हो सकेगी कि किस स्‍तर पर कमी है।

 

आपको बता दें कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी अस्पतालों में सिटीजन चार्टर का डिस्प्ले उचित स्थान पर किया जाए ताकि आम जनमानस को किसी प्रकार की कोई असुविधा न हों। इसका अर्थ यह हुआ कि आम जनमानस यह जान सके कि उसका कार्य कितने समय में हो जाना चाहिये और वह हो रहा है अथवा नहीं। श्री सिंह ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत संयुक्त निदेशकों को चिकित्सकीय व्यवस्था दुरुस्‍त करने के लिए एक-एक जिले का प्रभारी बनाया जाये। प्रत्येक प्रभारी संयुक्त निदेशक का दायित्व होगा कि हर माह जनपद का तीन दिवसीय दौरा करें और चेकलिस्ट के आधार पर अस्पतालों में उपलब्ध सेवाओं की निरीक्षण आख्‍या शासन को उपलब्ध करायें।

 

निरीक्षण के समय इन चीजों को देखना होगा  

श्री सिंह ने बताया कि नामित संयुक्त निदेशक सम्‍बन्धित जिले के चिकित्सालयों में ओपीडी में मरीजों की संख्‍या, चिकित्सालय के अन्दर बेडों की संख्‍या, डॉक्टर्स की उपलब्धता, विशेषज्ञों की उपलब्धता, स्टाफ नर्सेज की उपलब्धता, फार्मासिस्टों की संख्‍या, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की उपलब्धता, विभिन्न प्रकार की दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सालयों में साफ-सफाई की व्यवस्था, चिकित्सालयों में शौचालय की साफ-सफाई,  ऑक्सीजन सिलिंडर की उपलब्धता, डॉक्टर्स, नर्स, फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय, स्वीपर्स के ड्रेस कोड, शव वाहनों की उपलब्धता, ऑक्सीजन पाइप लाइन की स्थिति, एबीजी मशीन की उपलब्धता आदि का निरीक्षण करेंगे। साथ ही पैथोलॉजी में पैथोलोजिस्ट उपलब्ध हैं या नहीं अथवा कितने कर्मचारी कार्यरत हैं, इसका भी निरीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सालयों में सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे, यूएसजी मशीन, डिजिटल एक्स-रे के लिए एक्स-रे फिल्म की उपलब्धता आदि का भी निरीक्षण संयुक्त निदेशक करेंगे। साथ ही चिकित्सालयों में मौजूद किचेन की साफ-सफाई का भी निरीक्षण अनिवार्य है।

 

सीएचसी व जिला अस्पतालों में कृत्रिम आक्सीजन की उपलब्धता हो, अस्पताल परिसर में समय-समय पर एंटी लार्वा का छिड़काव कराये जाने के निर्देश

 

श्री सिंह ने समीक्षा बैठक में कहा कि समस्त चिकित्सालयों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सीएचसी एवं जिला चिकित्सालयों में ऑक्सीजन की उपलब्धता 100 प्रतिशत किये जाने के निर्देश दिए गए। साथ ही बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए कहीं भी पानी का जमाव न हो,  इसका विशेष ध्यान रखा जाए। इसके अतिरिक्त समय-समय पर एंटी लार्वा का भी छिड़काव कराया जाए। उन्होंने कहा कि 108 और 102 ए बुलेंस सर्विस की निरंतर मॉनीटरिंग की जाए और आम जनमानस को गुणवत्ता परक एवं सस्ती दर पर दवाएं आसानी से सुलभ हों, इसके लिए प्रदेश में संचालित समस्त जन औषधि केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।