सडक़ दुर्घटनाओं के प्रति जागरूकता का पाठ अब पाठ्यक्रम में

फाइल  फोटो

यातायात के नियम और दुघर्टना में फर्स्ट एड के पाठ शामिल होंगे पाठ्यक्रम में
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सडक़ सुरक्षा परिषद की बैठक में बनी सहमति

लखनऊ। सडक़ दुर्घटनाओं को लेकर गंभीरता दिखाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में यातायात नियमों की जानकारी देने तथा दुर्घटना होने के बाद महत्वपूर्ण सुनहरे एक घंटा गोल्डेन आवर के अंदर बेसिक लाइफ सपोर्ट के तहत आम आदमी को फर्स्ट एड देने का प्रशिक्षण देने के लिए जागरूक करने सम्बन्धी बिन्दुओं को शामिल करने पर सहमति जतायी है। यह सहमति बुधवार को सडक़ सुरक्षा परिषद की बैठक में बनी।

अकाल मृत्यु में 75 फीसदी रोड एक्सीडेंट से

भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, मनोरंजन विभाग समेत कई विभागों के साथ ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आईएमए के चिकित्सकों को भी बुलाया गया था। सरकार की ओर से सडक़ दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव मांगे गये। बैठक में कहा गया कि हर वर्ष एक लाख 35 लोगों की सडक़ दुर्घटनाओं में मौत हो जाती है जो गभीर मामला है। यही नहीं असामायिक मौतों में लगभग 75 फीसदी मौतें सडक़ दुर्घटनाओं में होती हैं, और इसमें से आधी यानी 50 प्रतिशत लोगों की आयु 15 से 35 वर्ष के बीच की होती है।
आईएमए के प्रतिनिधिमंडल में डॉ एएम खान, डॉ रुखसाना खान, डॉ पीके गुप्ता और डॉ संदीप तिवारी शामिल रहे। पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए यातायात नियमों की जानकारी और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को फर्स्ट एड देने की जागरूकता सम्बन्धी दोनों सुझाव आईएमए की ओर से दिये गये। डॉ संदीप तिवारी ने गोल्डेन आवर में फर्स्ट एड देने के प्रशिक्षण पर अपनी सहमति जतायी तथा आईएमए की ओर से लखनऊ शाखा के अध्यक्ष डॉ पीके गुप्ता ने कहा कि आईएमए की ओर से इस तरह के प्रशिक्षण का आयोजन करने के लिए बैठक में सहमति बनवायी जायेगी।

सडक़ पर बायीं ओर ड्राइविंग व दायीं ओर पैदल चलने का सुझाव

डॉ पीके गुप्ता ने एक और सुझाव देते हुए कहा कि आजकल बाइकर्स गैंग के चलते बहुत दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, इस पर रोक लगाने के लिए सरकार को चाहिये कि वह टास्क फोर्स गठित करे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एक ऐसा स्लोगन तैयार किया जाये जिसमें लिखा हो कि सडक़ पर ड्राइव बायीं तरफ करें जबकि पैदल चलने वाले लोग दायीं तरफ चलें। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए कि अक्सर इयर फोन लगाये लोगों को पीछे से आते वाहन की आवाज सुनायी नहीं देती है जबकि सामने से आने वाले वाहन पर नजर पड़ जाती है। ऐसा नियम बनाने से कई लाख लोगों की जान बचायी जा सकती है।
लगभग दो घंटे चली बैठक में मुख्यमंत्री के साथ ही मुख्य सचिव राहुल भटनागर, गृह विभाग के अधिकारी, प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला सहित अनेक अधिकारी, कर्मचारी शामिल थे। इस सम्बन्ध में प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला से बात करने की कोशिश की गयी लेकिन उनसे संपर्क न हो सका ।