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डॉ पीके गुप्ता और डॉ एसके शर्मा को आईएमए सीजीपी फेलोशिप सम्मान

-गाजियाबाद में सम्पन्न कॉन्फ्रेंस में सम्मानित हुए यूपी के 65 चिकित्सकों में दो लखनऊ के

सेहत टाइम्स

लखनऊ। लखनऊ के दो चिकित्सकों को आईएमए सीजीपी (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर्स) फेलोशिप अवॉर्ड से नवाजा गया है। आईएमए लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष डॉ पीके गुप्ता और कमांड हॉस्पिटल लखनऊ के डॉ एसके शर्मा को गाजियाबाद में 5 जुलाई को सम्पन्न नॉर्थ जोन IMA CGP की कॉन्फ्रेंस में उन्हें यह सम्मान दिया गया। सम्मान पाने के बाद दोनों चिकित्सकों को फैमिली फिजीशियन की मान्यता प्राप्त हो गयी है। आईएमए गाजियाबाद द्वारा आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में आईएमए यूपी के अध्यक्ष डॉ राजीव गोयल और सचिव डॉ आशीष कुमार अग्रवाल ने चिकित्सकद्वय को पुरस्कार से सम्मानित किया।

ज्ञात हो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर्स (CGP) द्वारा चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, सतत शिक्षा और नवाचार के लिए योग्य चिकित्सकों को प्रतिष्ठित सीजीपी फेलोशिप (Fellowship of CGP) से सम्मानित किया जाता है। इस फेलोशिप का उद्देश्य सामान्य चिकित्सा को बढ़ावा देना और चिकित्सकों की शैक्षणिक गतिविधियों को मान्यता देना है। आईएमए सीजीपी फेलोशिप सम्मान प्रतिवर्ष दिया जाता है। पुरस्कार के लिए पात्रता की बात करें तो यह पुरस्कार उस चिकित्सक को दिया जाता है, जो आईएमए का सदस्य हो तथा क्लीनिकल प्रैक्टिस करते हुए 20 वर्ष हो चुके हों। इस वर्ष यह अवॉर्ड प्रदेश भर के 65 चिकित्सकों को दिया गया है।

कॉन्फ्रेंस में लगभग 400 डॉक्टर्स ने भाग लिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पुरस्कार ग्रहण करते हुए डॉ पीके गुप्ता और डॉ एसके शर्मा ने आभार जताया। कॉन्फ्रेंस की ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ वी एस जिंदल, ऑर्गेनाइजिंग सचिव डॉ वानी पुरी तथा अन्य पदाधिकारियों ने भी दोनों को बधाई देते हुए शुभकामनाएं दीं।

फैमिली फिजीशियन आज की जरूरत

डॉ पीके गुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि स्पेशियलाइजेशन के दौर में फैमिली फिजीशियन आज की जरूरत है, जो कि उस परिवार के सदस्यों के बीमार होने पर प्रारंभिक जांच के साथ उचित सलाह दे सकें, साथ ही गंभीर बीमारी होने पर इलाज के लिए उचित विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दे सकते हैं।

फैमिली फिजीशियन न होने से कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति के बीमार होने पर परिजन उसे किस विशेषज्ञ के पास ले जायें, इसका निर्णय नहीं ले पाते हैं, जिससे मरीज की दिक्कतें बढ़ने और उचित इलाज में देर होने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा कि मैं एक पैथोलॉजिस्ट चिकित्सक विशेषज्ञ होने के साथ ही अपने संपर्क के लोगों के परिवार के लिए एक फैमिली फिजीशियन की भूमिका भी निभाता हूं, और यही सलाह मैं आज के नए विशेषज्ञ चिकित्सकों को भी देता हूं।