-घायल महिला अधिवक्ता को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचीं हाईकोर्ट की महिला वकीलों और डॉक्टरों-स्वास्थ्य कर्मियों के बीच हुई थी मारपीट, कई लोग हुए थे घायल

सेहत टाइम्स
लखनऊ। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की उत्तर प्रदेश शाखा ने प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में ड्यूटी कर रहे रेजिडेंट डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए क्रूर हमले, धमकी और तोड़फोड़ की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसकी कठोर शब्दों में निंदा की है तथा हिंसा, धमकी, चिकित्सा सेवाओं में बाधा एवं अस्पताल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम तथा Medicare Service Persons and Medicare Service Institutions (Prevention of Violence and Damage to Property) Act के अंतर्गत कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
राज्य से लेकर केंद्र तक के जिम्मेदार लोगों को भेजा मांग पत्र
इस सम्बन्ध में आईएमए ने राज्यपाल उत्तर प्रदेश, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री उत्तर प्रदेश, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री भारत सरकार, यूपी के डीजी स्वास्थ्य, डीजी मेडिकल एजूकेशन, अध्यक्ष नेशनल मेडिकल कमीशन, यूपी के सभी मेडिकल कॉलेज की रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन और दिल्ली एम्स की रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन को अपने वक्तव्य की प्रतिलिपि भेजी है।
ज्ञात हो गत दिवस 20 मई को प्रात: साढ़े पांच बजे दुर्घटना में घायल साथी महिला वकील को लेकर अस्पताल के ट्रॉमा सेेंटर Trauma Centre पहुंचीं हाईकोर्ट की महिला वकीलों और डॉक्टरों-स्वास्थ्य कर्मियों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। इस मारपीट में कई लोग घायल हो गये थे। इस घटना के विरोध में आज 21 मई को आईएमए यूपी IMA UP की ओर से राज्य सचिव डॉ आशीष कुमार अग्रवाल ने यहां जारी वक्तव्य में कहा है कि स्वास्थ्यकर्मी अत्यंत कठिन शारीरिक एवं मानसिक परिस्थितियों में मरीजों की जान बचाने के लिए कार्य करते हैं। डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों पर हिंसा न केवल उनके जीवन, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य को खतरे में डालती है, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को भी गंभीर रूप से बाधित करती है तथा मरीजों की देखभाल को प्रभावित करती है।
स्वास्थ्य व्यवस्था एवं जनकल्याण पर सीधा हमला
आईएमए ने कहा है कि ट्रॉमा सेंटर में लाए गए एक मरीज के परिजनों द्वारा डॉक्टरों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग, शारीरिक हमला, आपातकालीन चिकित्सा कार्य में बाधा तथा अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। स्वास्थ्य संस्थानों के भीतर इस प्रकार की हिंसा पूर्णतः अस्वीकार्य है और यह स्वास्थ्य व्यवस्था एवं जनकल्याण पर सीधा हमला है।
आईएमए IMA उत्तर प्रदेश इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से प्रभावित रेजिडेंट डॉक्टरों, इंटर्स, नर्सिंग स्टाफ एवं सभी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ एकजुटता प्रकट करता है। विशेष रूप से महिला रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट एवं दुर्व्यवहार पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए हम महिला स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हैं।
वक्तव्य में कहा गया है कि देशभर में स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध बढ़ती हिंसक घटनाओं तथा आर.जी.कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद उत्पन्न राष्ट्रीय चिंता को ध्यान में रखते हुए, साथ ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा संबंधी टिप्पणियों के संदर्भ में, आईएमए राज्य सरकार एवं अस्पताल प्रशासन से सभी चिकित्सा संस्थानों में सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था तत्काल लागू करने की मांग करता है।
आईएमए की मांगें
- इमरजेंसी विभाग, ट्रॉमा सेंटर, कॉरिडोर, ड्यूटी रूम, हॉस्टल, प्रवेश एवं निकास द्वार तथा अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में 24×7 कार्यशील CCTV निगरानी व्यवस्था, साथ ही फुटेज का उचित संरक्षण एवं मॉनिटरिंग।
- प्रमुख सरकारी अस्पतालों में स्थायी पुलिस चौकी एवं त्वरित सुरक्षा प्रतिक्रिया तंत्र, ताकि हिंसा या धमकी की स्थिति में तुरंत हस्तक्षेप हो सके।
- इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर क्षेत्रों में नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था, जिसमें अटेंडेंट पास प्रणाली एवं अनावश्यक भीड़ पर प्रतिबंध शामिल हो।
- विशेष रूप से रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की पर्याप्त तैनाती, जिनमें महिला सुरक्षा कर्मी भी शामिल हों।
- इमरजेंसी एवं नाइट ड्यूटी में कार्यरत डॉक्टरों, इंटर्न्स, नर्सों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के लिए कार्यशील पैनिक अलार्म एवं आपातकालीन सहायता प्रणाली।
- महिला स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित एवं पर्याप्त प्रकाशयुक्त ड्यूटी रूम, कार्यस्थल, हॉस्टल परिसर, कॉरिडोर एवं कैंपस मार्ग।
- अस्पतालों में हिंसा के विरुद्ध शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) नीति तथा भीड़ हिंसा, तोड़फोड़ एवं स्वास्थ्यकर्मियों पर हमलों से निपटने हेतु स्पष्ट SOPSI
- कार्यस्थल सुरक्षा एवं शिकायत निवारण तंत्र की सक्रिय व्यवस्था, जिसमें Internal Complaints Committee (ICC), मानसिक सहायता एवं कानूनी सहायता शामिल हो।
- घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच
- उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों, इमरजेंसी विभागों एवं ट्रॉमा सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु त्वरित प्रशासनिक एवं कानूनी हस्तक्षेप।
- पीड़ित डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को मानसिक, प्रशासनिक एवं कानूनी सहायता।
स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला अंततः पूरे समाज पर हमला
जारी वक्तव्य में कहा गया है कि डॉक्टरों पर हिंसा किसी भी स्थिति में सामान्य नहीं मानी जा सकती। अस्पताल उपचार, संवेदना एवं आपातकालीन सेवा के केंद्र हैं, और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला अंततः पूरे समाज पर हमला है। IMA उत्तर प्रदेश सभी डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की गरिमा, सुरक्षा एवं अधिकारों की रक्षा की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है। हम प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि स्वास्थ्यकर्मी बिना भय एवं दबाव के सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण में कार्य कर सकें, इसके लिए तत्काल एवं ठोस कदम उठाए जाएं।

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