17 वर्षों से लकवाग्रस्त और बेडसोर के शिकार व्यक्ति को ‘हेल्थ सिटी’ ने दिया नया जीवन

अपने आत्‍मबल और मुख्‍यमंत्री के सहयोग की बदौलत फि‍र से पैरों पर खड़ा हुआ मरीज

 

लखनऊ। 17 वर्ष पूर्व एक दुर्घटना ने उस 22 वर्षीय नौजवान की जिंदगी की रफ्तार पर ऐसे ब्रेक लगाये कि एक अदद बिस्‍तर तक उसका जीवन सिमट गया। दोनों पैरों से विकलांग होने के बाद जिंदगी की लम्‍बी जद्दोजहद से जूझता हुआ 39 वर्षीय यह व्‍यक्ति आज विश्‍व प्‍लास्टिक सर्जरी दिवस पर जब वह खड़ा हुआ तो उसकी आंखों की चमक बता रही थी कि उसके आत्‍मबल, आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान का सदुपयोग कर उसका उपचार करने वाले हेल्‍थसिटी अस्‍पताल के निदेशक व वरिष्‍ठ प्‍लास्टिक सर्जन डॉ वैभव खन्‍ना व उनकी टीम द्वारा किये गये उपचार और मुख्‍यमंत्री का उपचार के लिए दिये गये खर्च का संयुक्‍त प्रयास कितना सफल रहा और जिसने वर्ष के पहले दिन पैदा हुए इस व्‍यक्ति की जिंदगी में आने वाले कई नव वर्षों के रंग भर दिये।

 

आपको बता दें कि वर्ष 2001 के दिसम्‍बर माह में एक दुर्घटना का शिकार होकर आजमगढ़ का रहने वाला मुंशी राजभर दोनों पैरों से लकवाग्रस्‍त होकर ऐसा बिस्‍तर पर पड़ा कि उसका जीवन अंधकारमय हो गया। शुरुआत में उसका मुम्‍बई स्थित एक अस्‍पताल में इलाज हुआ लेकिन वह ठीक न हो सका। इसके बाद वह पूरी तरह से विकलांग होकर ट्राइसाइकिल के सहारे हो गया। बिस्‍तर पर पड़े-पड़े वह बेडसोर का शिकार हो गया, लकवे के चलते कुछ भी काम करने को मजबूर मुंशी को जब लगातार बढ़ते जाने वाले बेडसोर के घाव ने पीड़ा दी तो वह तड़प उठा। लेकिन शरीर से लाचार होने के बावजूद मुंशी ने अपना धैर्य और आत्‍मबल नहीं खोया। इसी का नतीजा रहा कि शासन की चौखट तक आजमगढ़ से ट्राइसाइकिल से कई बार आया कि शायद कोई उसकी फरियाद सुन ले लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगती थी। लेकिन पिछले दिनों उसकी वर्षों की मेहनत रंग लायी और उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से उसकी मुलाकात हो गयी बस फि‍र क्‍या था वर्षों से दर्द झेल रहे मुंशी ने अपनी व्‍यथा मुख्‍यमंत्री को कह सुनायी। पूरी बात सुनने के बाद मुख्‍यमंत्री ने मुंशी के इलाज की अच्‍छी से अच्‍छी व्‍यवस्‍था कराने के आदेश दिये।

 

इसके बाद गोमती नगर स्थित हेल्‍थ सिटी अस्‍पताल में सीनियर प्‍लास्टिक सर्जन डॉ वैभव खन्‍ना और उनकी टीम (डॉ हिमांशु कृष्‍णा, डॉ रोमेश कोहली, डॉ एसपीएस तुलसी) ने मुंशी के उपचार में कोई कसर नहीं छोड़ी और उसके बेडसोर का ऑपरेशन करके उसे कृत्रिम अंग (कैलिपर) की मदर से इस लायक बना दिया कि वह खड़ा होकर अपना जीवनयापन कर सके। डॉ खन्‍ना ने बताया कि वाकई इस व्‍यक्ति की तारीफ करनी होगी कि इसने इतने सालों तक अपना धैर्य नहीं खोया और साथ ही आभार मुख्‍यमंत्री का भी है, जिन्‍की सहृदयता की बदौलत आज इसने अपनी नयी मंजिल की ओर कदम बढ़ा दिया है। उन्‍होंने कहा कि हेल्‍थ सिटी परिवार मुंशी के सफल जीवन की कामना करता है। वाकई मुंशी की हिम्‍मत और संघर्ष से वही लाइन याद आती है कि ‘कौन कहता है कि आसमां में छेद हो नहीं सकता, एक पत्‍थर तो तबीयत से उछालो यारों’