Thursday , December 2 2021

भैंगेपन में ही नहीं, आंखों के कैंसर के लक्षणों में भी तिरछी दिखती है आंख

समय से उपचार होने पर ठीक होना संभव, ऐसे बच्‍चों को बुलाया गया समारोह में

केजीएमयू के नेत्र विभाग में रेटिनोब्लास्टोमा जागरूकता सप्ताह पर कार्यक्रम आयोजित

लखनऊ। यदि बच्‍चे की आंख में तिरछापन (भैंगापन) दिखायी दे तभी अभिभावकों को चाहिये कि नेत्र विशेषज्ञ से सम्‍पर्क करे क्‍योंकि आंख में होने वाले ट्यूमर के पहले की स्‍टेज में भी आंख में तिरछापन आता है। विशेषज्ञ को दिखाने का यह लाभ होगा कि अगर सिर्फ भैंगापन है तो उसका इलाज हो जायेगा और यदि आंख में ट्यूमर (रेटिनोब्लास्टोमा की शुरुआत हो चुकी है तो उसका इलाज भी समय से हो जायेगा। यह जानकारी आज किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के नेत्र विभाग द्वारा ओल्ड ओपीडी में कैनकिड्स संस्था के सहयोग से रेटिनोब्लास्टोमा जागरूकता सप्ताह (मई माह के तीसरे सप्ताह) के अवसर पर दी गयी।

 

इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एमएलबी भट्ट ने कार्यक्रम के आयोजन की सराहना करते हुए वहां उपस्थित आमजनों एवं मरीजों को आंख के कैंसर (रेटिनोब्लास्टोमा) के लक्षण एवं उसके उपचार के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि यदि इस बीमारी का सही समय में उपचार किया जाए तो इसका इलाज संभव है तथा केजीएमयू में इसके उपचार की निशुल्क सुविधा भी उपलब्ध है।

 

कार्यक्रम में नेत्र विभाग के डॉ संजीव गुप्ता एवं बाल रोग विभाग के डॉ निशांत कुमार ने रेटिनोब्लास्टोमा के उपचार और रोकथाम के बारे में अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण में पूर्ण इलाज संभव होता है। उन्होंने बताया कि रेटिनोब्लास्टोमा 15 से 20 हजार बच्चों में से किसी एक बच्चें में पाया जाने वाला आंख का कैंसर होता है। यह बच्चों की आंख का सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है। अमूमन यह कैंसर नवजात शिशु से लेकर पांच साल तक के बच्चों में पाया जाता है। 95 प्रतिशत के कैंसर से ग्रस्त बच्चे बिल्कुल ठीक हो सकते हैं अगर सही समय पर कैंसर का पता चल जाए और उचित रेटिनोब्लास्टोमा सेंटर में इलाज हो।

डॉ संजीव गुप्ता ने रेटिनोब्लास्टोमा के लक्षण बताते हुए कहा कि बच्चों में तिरछी आंख (भैंगापन) के साथ पुतली का सफेद होना, आंख में लाली, सूजन का दर्द का रहना। आंख के स्थान पर गांठ बन जाना तथा आंख की पुतली का चमकना इसके प्रमुख लक्षण हैं और यदि ऐसे कोई लक्षण किसी बच्चे में दिखे तो तत्काल उसकी किसी विशेषज्ञ से जांच करवाएं।

 

कार्यक्रम का समापन रेटिनोब्लास्टोमा का इलाज कर सामान्य जीवन जीने वाले बच्चों और उनके परिजनों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित करके किया गया तथा आमजन को इस बीमारी के प्रति जागरूक किए जाने का अनुरोध किया गया।

 

कार्यक्रम में बाल रोग विभाग की प्रो0 अर्चना कुमार, प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग के डॉ पूरन चन्द्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो0 एसएन शंखवार, नेत्र विभाग के डॉ अरुण कुमार शर्मा, डॉ गौरव कुमार, डॉ विशाल कटियार तथा कैनकिड्स संस्था की डॉ पुष्पा भाटिया समेत विभाग के अन्य चिकित्सक एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।