-विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस (1 अगस्त) के मौके पर केजीएमयू के पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में जागरूकता कार्यक्रम

सेहत टाइम्स
लखनऊ। कम-डोज़ वाले CT स्कैन से शुरुआती स्टेज में ही फेफड़ों के कैंसर का पता लगाया जा सकता है, जिससे ज़्यादा जोखिम वाले लोगों में इससे होने वाली मौतों को लगभग 20% तक कम किया जा सकता है। फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का मुख्य कारण है, जिससे हर साल लगभग 18 लाख लोगों की मौत होती है। यह दुनिया भर में दूसरा सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है। वर्ष 2020 में इसके लगभग 22 लाख नए मामले सामने आए थे। भारत में फेफड़ों का कैंसर सबसे आम कैंसरों में से एक है, और हर साल इसके लगभग 67,000 नए मामलों का पता चलता है।
ये बातें विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस (1 अगस्त) के मौके पर 31 जुलाई को केजीएमयू के पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में जागरूकता के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में विभागाध्यक्ष प्रो वेद प्रकाश के साथ ही मौजूद अन्य विशेषज्ञों ने कही।
मुख्य कारण धूम्रपान
फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण धूम्रपान है, जो सभी मामलों में से लगभग 85% के लिए ज़िम्मेदार है। अन्य जोखिम कारकों में दूसरों के धूम्रपान के धुएं (सेकंडहैंड स्मोक) के संपर्क में आना, रेडॉन गैस, एस्बेस्टस और पर्यावरण के अन्य ज़हरीले पदार्थ शामिल हैं। बताया गया कि फेफड़ों के कैंसर के लगभग 10-15% मामले उन लोगों में होते हैं जो धूम्रपान नहीं करते हैं। इसके कारणों में जेनेटिक कारण, रेडॉन गैस के संपर्क में आना, वायु प्रदूषण और दूसरों के धूम्रपान का धुआं (सेकंडहैंड स्मोक) शामिल हैं।
भारत में पुरुषों को ज्यादा हो रहा लंग कैंसर
विश्व में पहले पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर महिलाओं की तुलना में ज़्यादा होता था, लेकिन अब यह अंतर कम हो रहा है। महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर की दर बढ़ रही है, जिसका एक कारण पिछले कुछ दशकों में महिलाओं में धूम्रपान की बढ़ती दर है। हालांकि भारत में महिलाओं की तुलना में पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर (lung cancer) काफी ज़्यादा होता है, फेफड़ों के कैंसर के लगभग 70% मामले पुरुषों में ही पाए जाते हैं। भारतीय पुरुषों में कैंसर से होने वाली मौतों का मुख्य कारण फेफड़ों का कैंसर है; कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से लगभग 9.3% मौतें इसी वजह से होती हैं।
लक्षण
लगातार खांसी
खांसी के साथ खून आना
सीने में दर्द
सांस लेने में तकलीफ
आवाज़ बैठना या भारी होना
बिना किसी कारण वज़न कम होना
भूख न लगना
थकान
बार-बार इन्फेक्शन होना
चेहरे या गर्दन में सूजन
हड्डियों में दर्द
सिरदर्द
बचाव
धूम्रपान छोड़ें
सेकेंडहैंड स्मोक (दूसरों के धुएं) से बचें
काम से जुड़े खतरों से बचें
वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से बचें: हवा की गुणवत्ता में सुधार करने वाली नीतियों और तरीकों का समर्थन करें, जैसे वाहनों से निकलने वाले धुएं और औद्योगिक प्रदूषकों को कम करना।
हेल्दी डाइट: फलों और सब्जियों से भरपूर डाइट फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। इन खाद्य पदार्थों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पोषक तत्व फेफड़ों की ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बना सकते हैं।
रेगुलर एक्सरसाइज़
हाई-रिस्क वाले लोगों की स्क्रीनिंग: लो-डोज़ CT स्कैन से हाई-रिस्क वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाया जा सकता है।
इलाज
फेफड़ों के कैंसर का इलाज कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे कैंसर का प्रकार और स्टेज, साथ ही मरीज़ की ओवरऑल हेल्थ।
सर्जरी: अक्सर शुरुआती स्टेज वाले नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) के लिए इस्तेमाल की जाती है।
रेडिएशन थेरेपी: कैंसर सेल्स को टारगेट करके उन्हें खत्म करने के लिए इस्तेमाल की जाती है; अक्सर तब इस्तेमाल होती है जब सर्जरी का विकल्प न हो, या सर्जरी के साथ मिलाकर की जाती है।
कीमोथेरेपी: कैंसर सेल्स को खत्म करने के लिए दवाओं का इस्तेमाल करती है; अक्सर स्मॉल सेल लंग कैंसर (SCLC) के लिए या कैंसर के फैलने पर इस्तेमाल की जाती है। इसे अन्य इलाजों के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
टारगेटेड थेरेपी: कैंसर के बढ़ने में शामिल खास मॉलिक्यूल्स पर फोकस करती है। यह आमतौर पर खास जेनेटिक म्यूटेशन वाले NSCLC के लिए इस्तेमाल की जाती है।
इम्यूनोथेरेपी: कैंसर से लड़ने के लिए शरीर के इम्यून सिस्टम का इस्तेमाल करती है।
पैलिएटिव केयर: लक्षणों से राहत दिलाने और जीवन की गुणवत्ता (क्वालिटी ऑफ़ लाइफ़) को बेहतर बनाने पर फोकस करती है; अक्सर अन्य इलाजों के साथ-साथ इस्तेमाल की जाती है।
क्यों मनाया जाता है ‘विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस’
(World Lung Cancer Day) की शुरुआत फेफड़ों के कैंसर के प्रसार और इसके असर की ओर दुनिया का ध्यान खींचने के लिए की गई थी। इस दिन को पहली बार 2012 में ‘फोरम ऑफ़ इंटरनेशनल रेस्पिरेटरी सोसाइटीज़’ (FIRS) और ‘इंटरनेशनल एसोसिएशन फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ लंग कैंसर’ (IASLC) के सहयोग से मनाया गया था। तब से, यह हर साल 1 अगस्त को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण वैश्विक कार्यक्रम बन गया है।
इस कार्यक्रम में VPCI के पूर्व निदेशक प्रो. राजेंद्र प्रसाद (Padmashree), प्रोफेसर यू0एस0पाल, विभागाध्यक्ष ओ.एम.एफ.एस विभाग के0जी0एम0यू, प्रो. शैलेंद्र यादव, प्रोफेसर, थोरेसिक सर्जरी विभाग, के0जी0एम0यू, डॉ शिव राजन प्रोफेसर, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के0जी0एम0यू, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. मो0 आरिफ, डॉ. अनुराग त्रिपाठी, डॉ. ऋचा त्यागी, डॉ. यश जगधारी, डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. शुभ्रा श्रीवास्तव, डॉ. संदीप, डॉ. अपर्णा आदि शामिल हुए।

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