Wednesday , July 6 2022

एसजीपीजीआई कर्मचारी महासंघ ने भी आशा और आश्‍वासन पर 31 जुलाई तक धरना टाला

-प्रमुख मांगें पूरी न हुईं तो 1 अगस्‍त से फि‍र से जारी कर देंगे आंदोलन

-एक दिन पूर्व नर्सिंग स्‍टाफ एसोसिएशन भी टाल चुकी है अपना आंदोलन

धर्मेश कुमार

सेहत टाइम्‍स  

लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में कर्मचारी महासंघ द्वारा अपनी मांगों को लेकर बीती 13 जून से किया जा रहा धरना संस्‍थान के निदेशक के साथ महासंघ की बैठक में उनके द्वारा कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने की दिशा में मुख्‍यमंत्री के निर्देशों का हवाला देने के बाद 31 जुलाई तक टालने का निर्णय‍ लिया गया है। 31 जुलाई तक प्रत्‍येक सोमवार महासंघ द्वारा निदेशक को गुलाब का फूल देकर मांगों के बारे में याद दिलाया जाता रहेगा।

यह जानकारी देते हुए महासंघ के महामंत्री धर्मेश कुमार ने बताया कि संस्थान कर्मचारियों की वर्षों से लंबित मांगों – कैडर रिस्ट्रक्चरिंग, तीनों भत्ते पेशेंट केयर भत्ता, वर्दी भत्ता और द्विभाषीय भत्ता को लेकर संजय गांधी पीजीआई कर्मचारी महासंघ द्वारा 13 जून जारी धरने के संबंध में 22 जून  को कर्मचारी महासंघ की निदेशक के साथ बैठक हुई।  बैठक में निदेशक द्वारा यह अवगत कराया गया कि महासंघ की इन मांगों  को लागू किए जाने के संबंध में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 18 जून को हुई बैठक में चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं वित्त विभाग दोनों को निर्देशित किया गया है कि महासंघ की दोनों मांगों को यथाशीघ्र निस्तारित किया जाए।

धर्मेश कुमार ने बताया कि निदेशक के साथ कर्मचारी महासंघ की हुई वार्ता में निदेशक द्वारा दिए गए आश्वाशन और मुख्यमंत्री द्वारा पारित निर्देशों के क्रम में कर्मचारी महासंघ द्वारा आज यह निर्णय लिया गया है कि संस्थान प्रशासन/उत्तर प्रदेश शासन को थोड़ा समय देते हुए कर्मचारी महासंघ द्वारा 13 जून से चलाए जा रहे धरने को 31 जुलाई 2022 तक स्थगित किया जाता है। मांगें पूरी न होने की दशा में 1 अगस्त से बिना सूचना दिए धरना/कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा।

उन्‍होंने बताया कि 31 जुलाई तक हर सप्ताह के प्रथम दिन सोमवार को कर्मचारी महासंघ द्वारा अपनी मांगों को पूरा किए जाने की याद दिलाने के लिए निदेशक को एक गुलाब का फूल भेंट कर याद दिलाया जायेगा। ज्ञात हो एक दिन पूर्व नर्सिंग स्‍टाफ एसोसिएशन भी कैडर पुनर्गठन की मांग पर आश्‍वासन मिलने के बाद एक माह के लिए अपना धरना टाल चुकी है।

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