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नहीं रहा जज्‍बातों पर काबू, गला रुंध गया बीएचूयू की रिटायर्ड प्रोफेसर का

1968 के बैच के मेडिकल एल्‍यूमिनाई ने केजीएमयू में मनाया गोल्‍डेन जुबिली वर्ष  

 

लखनऊ। हर्ष और उल्‍लास भरी बातों के बीच पुरानी बातों को याद करके बनारस हिंदू विश्‍वविदयालय बीएचयू से रिटायर्ड प्रो इंद्रा शर्मा अपनी भावनाओं को रोक नहीं सकी और उनका गला रुंध आया। डॉक्‍टरी की पढ़ाई के समय अत्‍यंत गुरबत के दौर से गुजरीं प्रो इंद्रा ने बताया कि किस तरह से उन्‍होंने किताबों के अभाव में सिर्फ नोट्स के सहारे अपनी डॉक्‍टरी की पढ़ाई की। इसी प्रकार से मानसिक और शारीरिक रूप से न्‍यूरो डिसऑर्डर का शिकार होने वाली डॉ ज्‍योति पाहवा राव व्‍हील चेयर पर बैठी-बैठी अचानक हुंकार भर के रो पड़ीं। इन सब बातों का गवाह बना किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का ब्राउन हॉल, मौका था 1968 बैच के मेडिकल छात्र-छात्राओं के गोल्‍डेन जुबिली एल्‍यूमिनाई समारोह का।

 

उस समय के किंग जॉर्ज चिकित्‍सा कॉलेज (केजीएमसी) में पढ़ने वाले 1968 बैच के 85 छात्र-छात्राओं ने देश और दुनिया के विभिन्‍न क्षेत्रों से आकर स्‍वर्ण जयंती समारोह में पूरे जोशो-खरोश के साथ हिस्‍सा लिया। इस मौके पर इन पूर्व छात्रों ने कॉलेज के जमाने के अपने-अपने अनुभव साझा किये। इनमें ऐसे एल्‍यूमिनाई भी थे जो केजीएमसी में शिक्षक रह चुके थे। इन शिक्षकों के बारे में मौजूदा दौर में शिक्षक के रूप में कार्यरत डॉक्‍टरों ने कई बातें बताकर यादें ताजा कीं। समारोह में अपने उन 25 साथियों को भी इन एल्‍यूमिनाई ने याद किया, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। इनकी मौत हो चुकी है। समारोह का आयोजन करने वाले लारी कार्डियोलॉजी स्थि‍त हृदय रोग विभाग के पूर्व विभागाध्‍यक्ष प्रो आरके सरन ने बताया कि उस बैच में कुल 196 स्‍टूडेंट्स थे।

शेर-ओ-शायरी के बीच कुछ क्षण ऐसे भी आये जब लोग भावुक हो गये। ऐसा ही एक क्षण तब आया जब बीएचयू की रिटायर्ड प्रोफेसर इंद्रा शर्मा ने मंच पर आकर माइक थामकर अपने बारे में बताना शुरू किया कि किस कदर गरीबी की स्थिति में उन्‍होंने मेडिकल की पढ़ाई के लिए केजीएमसी में 1968 में प्रवेश लिया था, उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे जरूरी किताबें भी खरीद सकतीं। डॉ इंद्रा ने बताया कि फि‍र उन्‍होंने तय किया कि शिक्षकों द्वारा तैयार कराये जाने वाले नोट्स से ही पढ़कर परीक्षा देंगी, उन्‍होंने बताया कि नोट्स के जरिये की गयी पढ़ाई से वह न सिर्फ पास हुईं बल्कि अच्‍छे अंकों से पास हुईं।

 

इस अवसर पर केंजीएमयू के कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। इस मौके पर उपस्थित चिकित्‍सकों को प्रोफेसर मंसूर हसन, प्रोफेसर आरपी शाही, प्रोफेसर ए हलीम समेत कई शिक्षकों ने आशीर्वाद दिया तथा कुलपति द्वारा डॉ0 अशोक चन्द्रा, डॉ0 सीजी अग्रवाल, प्रोफेसर आरसी सक्सेना, डॉ0 रमेश चन्द्रा सहित कई शिक्षकों एवं डाक्टरों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

 

अपने सम्‍बो‍धन में कुलपति प्रो0 भट्ट ने कहा कि इन 50 स्वर्ण वर्षों के दौरान यहां के कई स्टूडेंट्स ने चिकित्सा विज्ञान और मानवता का समर्थन करने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त की। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि कैसे केजीएमयू चिकित्सा शिक्षा एवं विज्ञान की दृष्टि से निरंतर नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसके साथ कुलपति‍ ने वहां मौजूद सभी 1968 बैच के स्टूडेंट्स से अपने अनुभव एवं ज्ञान को नई पीढ़ी के छात्रों एवं डाक्टरों के साथ साझा करने का अनुरोध किया। इस मौके पर

 

कार्यक्रम में मुख्य रूप से डीन मेडिसिन प्रोफेसर विनीता दास, डॉ वीके श्रीवास्तव एवं डॉ केएस श्रीवास्तव के साथ ही डॉ एसके अग्रवाल, डॉ एके चावला, डॉ आरके सक्‍सेना, डॉ केएस श्रीवास्‍तव, डॉ मधु श्रीवास्‍तव, डॉ अशोक चन्‍द्रा भी शामिल रहे।