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साधारण हाथ स्वच्छता उपायों से रोके जा सकते हैं अधिकांश संक्रमण

-आरएमएलआई में विश्व हाथ स्वच्छता दिवस पर विस्तृत शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

सेहत टाइम्स

लखनऊ। माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा, संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण समिति (IPCC), डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (डॉ. RMLIMS), लखनऊ के सहयोग से, 5 मई को विश्व हाथ स्वच्छता दिवस के अवसर पर एक विस्तृत शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अकादमिक ब्लॉक की 10वीं मंज़िल स्थित हॉल B में आयोजित हुआ, जिसमें संकाय सदस्यों, रेज़िडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ एवं स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भागीदारी रही।

कार्यक्रम का संचालन आयोजन अध्यक्ष प्रो. ज्योत्सना अग्रवाल एवं आयोजन सचिव प्रो. मनोदीप सेन के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें स्वास्थ्य सेवा से संबंधित संक्रमणों को कम करने तथा रोगी सुरक्षा को बेहतर बनाने में हाथ स्वच्छता के महत्व पर विशेष ध्यान दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद प्रो. ज्योत्सना अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने में सूक्ष्मजीव विज्ञान एवं संक्रमण नियंत्रण टीमों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र का एक प्रमुख आकर्षण “सर्वश्रेष्ठ हाथ स्वच्छता अनुपालन विभाग” को रनिंग ट्रॉफी प्रदान करना रहा, जो उत्कृष्ट अनुपालन एवं संक्रमण नियंत्रण के प्रति समर्पण के लिए दिया गया।

कार्यक्रम के शैक्षणिक भाग में कई महत्वपूर्ण व्याख्यान शामिल रहे। व्याख्यान में विश्व हाथ स्वच्छता दिवस के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. मोहम्मद साक़िब ने इस दिवस के वैश्विक महत्व एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन की पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने “My 5 Moments for Hand Hygiene” की अवधारणा और उसके क्लिनिकल उपयोग को विस्तार से समझाया।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवा से संबंधित संक्रमणों (HAIs) के वैश्विक बोझ पर चर्चा करते हुए बताया कि इनमें से अधिकांश संक्रमण साधारण हाथ स्वच्छता उपायों से रोके जा सकते हैं। अनुपालन में आने वाली बाधाओं जैसे कार्यभार, संसाधनों की कमी और व्यवहारिक कारणों पर भी चर्चा की गई तथा इनके समाधान के लिए संस्थागत नीतियों, सतत प्रशिक्षण और निगरानी की आवश्यकता बताई। उन्होंने बहु-विषयक सहभागिता, रोगी जागरूकता और नेतृत्व समर्थन के महत्व को भी रेखांकित किया।

प्रो. मनोदीप सेन ने हाथ स्वच्छता के मूल सिद्धांतों पर विस्तृत एवं व्यावहारिक व्याख्यान दिया। उन्होंने हैंड रब और हैंड वॉश की सही तकनीकों का चरणबद्ध प्रदर्शन किया तथा उनके उपयोग के संकेतों को समझाया। उन्होंने WHO द्वारा अनुशंसित तकनीकों, समय अवधि एवं अक्सर छूट जाने वाले क्षेत्रों जैसे उंगलियों के सिरे, अंगूठे और उंगलियों के बीच के स्थानों पर विशेष ध्यान दिया।

उन्होंने संक्रमण की शृंखला को तोड़ने में हाथ स्वच्छता की भूमिका, अनुपालन निगरानी, ऑडिट प्रणाली और फीडबैक तंत्र पर भी चर्चा की। साथ ही, व्यवहार परिवर्तन के निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो शीतल वर्मा ने सर्जिकल साइट संक्रमण (SSI) की रोकथाम पर साक्ष्य-आधारित दिशानिर्देशों सहित विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने रोगी, प्रक्रिया और पर्यावरण से संबंधित जोखिम कारकों पर चर्चा की। उनका व्याख्यान प्री-ऑपरेटिव, इंट्रा-ऑपरेटिव और पोस्ट-ऑपरेटिव उपायों जैसे त्वचा की तैयारी, एंटीबायोटिक प्रोफिलैक्सिस, नसबंदी प्रोटोकॉल और ऑपरेशन थिएटर में एसेप्सिस बनाए रखने पर केंद्रित रहा। उन्होंने “केयर बंडल” की अवधारणा को समझाते हुए बताया कि मानकीकृत हस्तक्षेपों का संयोजन संक्रमण दर को कम करने में अत्यंत प्रभावी होता है।

वर्कशॉप सत्र में कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण इंटरैक्टिव एवं कौशल-आधारित कार्यशालाएं रहीं, जो हॉल B और गेस्ट रूम में आयोजित की गईं। पहली कार्यशाला में हाथ स्वच्छता अनुपालन एवं SSI केयर बंडल का कार्यान्वयन करने में प्रतिभागियों को ऑडिट तकनीक, अनुपालन निगरानी और रियल-टाइम फीडबैक प्रणाली के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यशाला के समन्वयक प्रो. मनोदीप सेन, डॉ. शिवा वर्मा, डॉ. क्यूई मिमी, सिस्टर स्मिता सिंह थे।

दूसरी कार्यशाला में SSI रोकथाम के लिए प्री-ऑपरेटिव तैयारी में क्लिपर सुरक्षा पर चर्चा करते हुए बताया गया कि रेज़र के बजाय क्लिपर के सुरक्षित उपयोग पर जोर दिया गया, जिससे संक्रमण का जोखिम कम होता है। इस कार्यशाला के समन्वयक डॉ. मोहम्मद साक़िब, डॉ. आरती चौधरी, सिस्टर मेनका यादव, सिस्टर अर्चना बाला सिंह थे।

इसके अलावा एक अन्य कार्यशाला में सर्जिकल उपकरणों की सफाई के लिए मल्टी-एंजाइमेटिक क्लीनर का उपयोग के बारे में बताते हुए उपकरणों की प्री-क्लीनिंग, डीकंटैमिनेशन सिद्धांत एवं उचित संपर्क समय पर प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यशाला के समन्वयक डॉ. आकांक्षा गुप्ता, डॉ. लुबना परवीन, सिस्टर मनीषा पासवान थे। इन कार्यशालाओं ने स्वास्थ्य कर्मियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया और सिद्धांत तथा व्यवहार के बीच की दूरी को कम किया।

कार्यक्रम ने “Action Saves Lives” के वैश्विक संदेश को सुदृढ़ किया, यह दर्शाते हुए कि सरल एवं नियमित हाथ स्वच्छता अभ्यास संक्रमण के प्रसार को कम कर सकते हैं और रोगी परिणामों में सुधार ला सकते हैं। कार्यक्रम का समापन प्रो. मनोदीप सेन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी आयोजकों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की।