Friday , September 30 2022

टीबी उन्‍मूलन के लिए बढ़े केजीएमयू के हाथ को मिला पुरानी छात्रा का साथ

इलाज बीच में छोड़ने वाले रोगी बढ़ा रहे अपनी व दूसरों की मुसीबत

टीबी के मरीज ढूंढ़ने, नियमित उपचार, स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा देगी ‘ऑपरेशन आशा’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्टेट टास्क फोर्स (क्षय नियंत्रण) के चेयरमेन डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि टीबी देश की एक गम्भीर समस्या है। हमारे देश में टीबी से प्रति तीन मिनट में दो व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है तथा देश में प्रतिदिन 6000 लोग टीबी से ग्रसित हो जाते हैं। भारत में दुनिया के 27 प्रतिशत टीबी के रोगी है। विश्व स्वास्थ संगठन ने टीबी रोग के समूल नाश के लिए 2030 तक की समय सीमा तय की है, जबकि भारत सरकार ने इसे 2025 तक खत्म करने का संकल्प किया है। इसके तहत तमाम तरह के अभियान चलाये जा रहे हैं, मगर टीबी के मरीज बीच में ही इलाज छोड़ रहे हैं, जिससे कई समस्यायें उत्पन्न हो रही हैं।

 

इस सम्बन्ध में आज 15 अप्रैल को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट, रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकान्त एवं अन्य संकाय सदस्यों की उपस्थिति में एक बैठक डॉ शैली बत्रा के साथ सम्पन्न हुयी। जो कि केजीएमयू की पुरानी छात्रा रह चुकी हैं तथा ऑपरेशन आशा नामक स्वयंसेवी संस्था चला रही हैं। उन्होंने टीबी के उन्मूलन में केजीएमयू के साथ विभिन्न तरीकों से सहयोग करने का आश्वासन दिया।

 

डॉ शैली बत्रा ने बताया कि टीबी के बारे में चिकित्सा शिक्षा, सक्रिय खोज तथा नियमित उपचार के सम्बन्ध में संस्था सहयोग करेगी। कुलपति ने बताया कि डॉ शैली की संस्था के सहयोग से शीघ्र ही केजीएमयू के पास की गरीब बस्तियों में टीबी के रोगियों की खोज, उनका नियमित उपचार तथा टीबी के बारे में स्वास्‍थ्‍य  शिक्षा की जानकारी के लिए एक अभियान चलाया जायेगा। इस बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ सन्तोष गुप्ता भी उपस्थित रहे।