-राजकीय नर्सेज संघ उत्तर प्रदेश ने लगाये गंभीर आरोप, मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और शासन के उच्च अधिकारियों को लिखा पत्र
-10 से ज्यादा नर्सिंग अधिकारियों को दी गृह जनपद में तैनाती, बाकी को छोड़ दिया

सेहत टाइम्स
लखनऊ। स्वास्थ्य महानिदेशालय में घोषित की गयी स्थानांतरण नीति की धज्जियां उड़ाते हुए नर्सिंग संवर्ग के स्थानांतरण को लेकर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। राजकीय नर्सेज संघ उत्तर प्रदेश ने नर्सिंग संवर्ग के तबादलों में मनमानी कर सरकार की छवि को धूमिल करने का गंभीर आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) को पत्र भेजकर की है। संगठन ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग करते हुए एक समान नीति अपनाते हुए सभी नर्सिंग कर्मचारियों को गृह जनपद का लाभ दिये जाने की मांग की है।
इस बारे में महामंत्री अशोक कुमार ने जानकारी देते हुए बताया है कि शासन एवं प्रशासन की ओर से लगातार यह बताया जाता रहा है कि नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों का स्थानांतरण उनके गृह जनपद में नहीं किया जा सकता तथा इस संबंध में कोई शासनादेश भी जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद नर्सिंग अनुभाग द्वारा 10 से अधिक नर्सिंग अधिकारियों का स्थानांतरण उनके गृह जनपदों में कर दिया गया, जबकि अन्य कर्मचारी ऐसे किसी शासनादेश की प्रतीक्षा करते रहे।
बिना पद सृजित हुए दे दी गयी तैनाती
उन्होंने कहा है कि पिछले एक-दो वर्षों में पदोन्नति प्राप्त वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों (सीनियर नर्सिंग ऑफिसर्स) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में तैनात किया गया है, जबकि वहां वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों के पद सृजित नहीं हैं। संगठन का कहना है कि ऐसे अधिकारियों का समायोजन जिला अस्पतालों में किया जाना चाहिए था।
रिक्त पड़े पदों पर नहीं की गयी पदोन्नति
संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि निदेशालय स्तर के चार महत्वपूर्ण पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, जिन पर अब तक पदोन्नति नहीं की गई है। इससे नर्सिंग संवर्ग में असंतोष बढ़ रहा है और कर्मचारियों के बीच नाराजगी का माहौल है।
नियमों के अनुपालन में भेदभाव उचित नहीं
पत्र में मांग की गई है कि जिन नर्सिंग अधिकारियों का स्थानांतरण उनके गृह जनपद में किया गया है, उनके आदेशों में संशोधन किया जाए अथवा गृह जनपद स्थानांतरण संबंधी शासनादेश सभी कर्मचारियों के लिए समान रूप से लागू किया जाए। संगठन का कहना है कि नियमों के अनुपालन में भेदभाव उचित नहीं है।
साथ ही, नियमों के विपरीत किए गए स्थानांतरणों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की भी मांग उठाई गई है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि शासन इस मामले का संज्ञान लेकर नर्सिंग संवर्ग में व्याप्त असंतोष को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

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