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रखनी है वायु प्रदूषण से दूरी, मास्‍क, भाप, प्राणायाम जरूरी : डॉ. सूर्यकान्त

-सांस की तकलीफ से जूझ रहे लोग बरतें विशेष सावधानी

-संक्रामक रोगों की चपेट में आने से बचायेगा मास्‍क

डॉ सूर्यकान्त

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। तापमान में गिरावट के साथ ही दीपावली में पटाखों के इस्तेमाल के कारण प्रदेश के अधिकतर जिले इस वक्त खतरनाक वायु प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। ऐसे में सांस की तकलीफ के मरीजों की तादाद एकाएक बढ़ गयी है। अस्पतालों की ओपीडी में भी इस समस्या का सामना कर रहे लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। इसलिए इस वक्त सेहत का खास खयाल रखने के साथ ही बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल पहले से भी ज्यादा जरूरी हो गया है। इसके अलावा नियमित भाप लेना, प्राणायाम व योग सांस की तकलीफ को दूर करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। यह कहना है किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त का।

डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि वायु प्रदूषण का असर फेफड़ों को ही नहीं बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित करता है। गिरते तापमान व धुंध (स्मॉग) के चलते धूल के कण ऊपर नहीं जा पाते और नीचे ही वायरस व बैक्टीरिया के संवाहक का कार्य करते हैं, ऐसे में अगर बिना मास्क लगाए बाहर निकलते हैं तो वायरस व बैक्टीरिया साँसों के जरिये शरीर में प्रवेश करने का मौका पा जाते हैं। वायु प्रदूषण में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 माइक्रान यानि बहुत ही महीन धूल कण ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकते हैं क्योंकि वह सांस मार्ग से फेफड़ों तक पहुँच सकते हैं जबकि 10 माइक्रान तक वाले धूल कण गले तक ही रह जाते हैं जो गले में खराश और बलगम पैदा करते हैं। वायु प्रदूषण के कारण सांस मार्ग में सूजन की समस्या पैदा होती है और सूजन युक्त सांस मार्ग कई बीमारियों को आमन्त्रण देता है। इसलिए घर से बाहर निकलने पर मास्क से मुंह व नाक को अच्छी तरह से ढंककर वायरस व बैक्टीरिया से जुड़ी बीमारियों जैसे- कोरोना, टीबी व निमोनिया ही नहीं बल्कि एलर्जी, अस्थमा व वायु प्रदूषण जनित तमाम बीमारियों से भी सुरक्षित रह सकते हैं। इस समय बढ़ता प्रदूषण व सर्दी इन बीमारियों को और भी गंभीर बना सकता है, ऐसे में अभी किसी भी तरह की ढिलाई बरतना खुद के साथ दूसरों को भी मुश्किल में डालने वाला साबित हो सकता है।

इन बातों का रखें खयाल :

– सांस के रोगी जहां तक हो सके घर के अन्दर ही रहें, पानी व पेय पदार्थो का भरपूर सेवन करें तथा भाप लें ।

– बाहर निकलने पर मास्क से नाक व मुंह को अच्छी तरह ढंककर रखें, जहां वायु में प्रदूषकों का घनत्व ज्यादा हो वहां तो मास्क का प्रयोग बहुत ही जरूरी है।

– दमा के रोगी अपनी दवाएं नियमित रूप से लेते रहें और जरूरत पड़ने पर तुरन्त चिकित्सक से सलाह लें।

कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर :

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश के कोविड टीकाकरण के ब्रांड एम्बेसडर डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर आज एक ज्वलन्त मुद्दा बना हुआ है। यह हम सभी पर निर्भर करता है कि कोरोना की तीसरी लहर आयेगी या नहीं आयेगी, दरवाजा खटखटायेगी और दूसरे दरवाजे से वापस चली जायेगी । हम तीन तरीकों से कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर से खुद के साथ समुदाय को सुरक्षित बना सकते हैं ।

– बायोलाजिकल वैक्सीन : देश ने बहुत कम समय में 100 करोड़ टीकाकरण की गौरवशाली उपलब्धि हासिल कर ली है, लेकिन हर्ड इम्यूनिटी प्राप्त करने के लिए लगभग 188 करोड़ डोज लगना बहुत जरूरी है । अतः अपनी बारी आने पर वैक्सीन जरूर लगवायें ।

– सोशल वैक्सीन : टीकाकरण के बाद भी कोविड प्रोटोकाल (मास्क, उचित दूरी, हाथों की स्वच्छता) का पालन करें

– इम्यूनिटी वैक्सीन : ताजा और स्वास्थ्यवर्धक भोजन करें

क्या कहते हैं आंकड़े :

डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर/2020 की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के छह शहर शामिल हैं। उनका कहना है कि देश में वायु प्रदूषण से हर साल होने वाली मौतों का आंकड़ा भी 12 लाख से बढ़कर 16 लाख पर पहुंच गया है। ऐसे में हमें वातावरण को प्रदूषित होने से बचाने के बारे में भी गंभीरता से सोचने की जरूरत है।

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