Tuesday , November 30 2021

कोविड महामारी के अपशिष्‍ट के निस्‍तारण की जिम्‍मेदारियां समझायीं

-संजय गांधी पीजीआई में वर्चुअली आयोजित की गयी कार्यशाला

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। अस्पताल से निकलने वाले बायो मेडिकल अपशिष्ट पदार्थों का सुरक्षित और सतत प्रबंधन हर अस्पताल का उत्तरदायित्व है। यह सभी मनुष्यों की सुरक्षा और स्वच्छ पर्यावरण के लिए अनिवार्य है। कोविड-19 संक्रमण के समय के लिए भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पॉजिटिव मरीजों के उपचार, निदान और क्वॉरेंटाइन के समय में उत्पन्न होने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण के लिए बनाये गये विशिष्ट दिशा निर्देश बनाये हैं।  

यह जानकारी संजय गांधी पीजीआई में 5 दिसंबर को “कोविड-19 बायोमेडिकल वेस्‍ट प्रबंधन: सिद्धांत और व्यवहार” विषय पर एक कार्यशाला में अस्पताल प्रशासन के विभागाध्यक्ष डॉ आर हर्षवर्धन ने दी। कार्यशाला में पूरे उत्‍तर प्रदेश के जिलों के मेडिकल हेल्थ ऑफिसर,शैक्षणिक संस्थाएं, विद्यार्थी, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और एनजीओ के लोग वर्चुअली जुड़े।

कार्यशाला में डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि भारत में सन 2016 से ही बायो मेडिकल वेस्‍ट मैनेजमेंट के नियम बनाए गए और समय-समय पर इसे संशोधित किया गया। उन्‍होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 को लेकर बनाये गये दिशानिर्देशों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी स्थानीय निकायों और सामान्य बायोमेडिकल अपशिष्ट पदार्थों का निस्तारण करने वाले सभी सुविधा केंद्रों की जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है।  

कार्यशाला में कोविड-19 महामारी के कठिन समय में स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा पालन किए जाने के लिए और उनकी बेहतर समझ के लिए बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन की विस्तृत व्याख्या की गई।

इस कार्यशाला के उदघाटन सत्र को अस्पताल प्रशासन के विभागाध्यक्ष डॉ आर हर्षवर्धन ने संबोधित किया जबकि संस्थान के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ गौरव अग्रवाल ने स्वागत अभिभाषण दिया। इस कार्यशाला में लगभग 100 लोगों ने गूगल मीट के द्वारा भाग लिया। संस्थान के लगभग 30 स्वास्थ्य कर्मियों ने इस कार्यशाला में सहभागिता की। कार्यशाला के वैज्ञानिक सत्र में नीति आयोग और संस्थान के महत्वपूर्ण वक्ताओं ने भाग लिया। डॉ हर्षवर्धन के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में निदेशक प्रो आरके धीमन और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो अमित अग्रवाल ने पूर्ण सहयोग दिया।