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केंद्र से अतिरिक्त बजट मिलने के बाद भी दूर नहीं की संविदा कर्मियों की वेतन विसंगति

-संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश ने लिया आंदोलन का निर्णय

-10 दिनों में 10 हजार पत्र डाक के माध्यम से भेजे जायेंगे मुख्यमंत्री को

-25 फरवरी को प्रदेश स्तरीय बैठक में तय की जाएगी आगे की रणनीति

योगेश उपाध्‍याय

सेहत टाइम्स
लखनऊ।
केंद्र सरकार से प्रतिवर्ष मिल रहे तीन प्रतिशत अतिरिक्त बजट से अन्य राज्यों की भांति संविदा कर्मियों के वेतन की विसंगति दूर न किए जाने को लेकर संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश ने आंदोलन का निर्णय लिया है, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री को डाक के माध्यम से पूरे प्रदेश से 10000 पत्र भेजने से होगी तथा आगे की लड़ाई के लिए आगामी 25 फरवरी को प्रदेश स्तरीय बैठक में रणनीति तय की जाएगी।

यह जानकारी देते हुए संघ के महामंत्री योगेश उपाध्याय ने बताया है कि वर्ष 2016 से प्रत्येक वर्ष भारत सरकार द्वारा तीन प्रतिशत अतिरिक्त बजट राज्यों को वेतन विसंगति दूर करने के लिए दिया जा रहा है, इसके उपयोग से हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार सरकार ने वेतन नीति का निर्धारण कर संविदा कर्मियों की वेतन विसंगति दूर की है, लेकिन उत्तर प्रदेश में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और प्रदेश सरकार के ध्यान न देने के कारण 8 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी इस बजट का उपयोग कर संविदा कर्मियों को कोई लाभ नहीं दिया गया है। इससे व्यथित होकर बीती 4 फरवरी को ऑनलाइन हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि अपने अधिकारों को लेकर आगामी 12 फरवरी से 22 फरवरी तक पूरे प्रदेश से लगभग 10000 पत्र डाक के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस पत्र को X (ट्विटर) पर हैशटैग भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा है कि बैठक में कर्मचारियों का आह्वान किया गया है कि आगामी 25 फरवरी को प्रदेश की बैठक में निर्णय लेकर आगे की लड़ाई अपने अधिकारों के लिए तब तक जारी रखें, जब तक हमें अधिकार नहीं मिल जाता। इस बैठक में राष्ट्रीय उप महामंत्री संजय यादव, जनपद, मंडल पदाधिकारियों के साथ प्रदेश स्तर से प्रदेश अध्यक्ष डॉ अनिल गुप्ता, प्रदेश संयोजक समेत सभी पदाधिकारी शामिल रहे।

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