स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के साथ गिले-शिकवे दूर, राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद का आंदोलन समाप्‍त

कर्मचारियों और फार्मासिस्‍टों को भ्रष्‍टाचार का कारण बताने वाले बयान के बाद उपजा था विवाद

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के सभी जनपदों के जिलाधिकारी कार्यालयों पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद द्वारा किया जाने वाला विरोध प्रदर्शन स्वास्थ्य मंत्री द्वारा फार्मेसिस्टों व अन्य कर्मियों को भ्रष्टाचार का कारण बताने सम्बन्धी बयान वापस लिए जाने के कारण समाप्त कर दिया गया। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा वक्तव्य जारी किया गया कि उन्होने कर्मचारियों के लिए ऐसा नही कहा था उन्हें कर्मचारियों पर पूरा विश्वास है। स्वास्थ्य मंत्री के वक्तव्य की प्रति के साथ उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उप्र की एक बैठक बुलाई जिसमें कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वीपी मिश्र, परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत, संगठन प्रमुख केके सचान, महामंत्री अतुल मिश्र उपस्थित थे।

 

प्रमुख सचिव ने भी लिखित अपील जारी करते हुए कहा कि मंत्री जी का मानना है कि स्वास्थ्य विभाग एक परिवार की तरह है जिसमें सभी को साथ में मिल जुलकर प्रदेश की सेवा करनी है। उन्होने कहा कि मेरी मंशा नही थी कि किसी कि भावना को ठेस पहुंचे। प्रमुख सचिव ने उक्त वक्तव्य को देखते हुए कर्मचारियों से अनुरोध किया कि प्रस्तावित आन्दोलन स्थगित कर दें।

 

परिषद ने मंत्री की बयान वापसी और प्रमुख सचिव के अपील को देखते हुए आज सुबह उच्चाधिकार समिति की बैठक सुरेश रावत की अध्यक्षता में आहूत की। बैठक के दौरान जनपदीय पदाधिकारियों से दूरभाष पर विचार विमर्श भी किया गया। बैठक मे निर्णय लिया गया कि मंत्री के बयान वापसी के बाद आन्दोलन को स्थगित कर दिया गया। बैठक में गिरीश मिश्र वरिष्ठ उपाध्यक्ष, सुनील यादव अध्यक्ष फार्मासिस्ट फेडरेशन अशोक कुमार,  सर्वेश पाटिल,  राम मनोहर कुशवाहा, अनिल कुमार, डीडी त्रिपाठी, डा0 पीके सिंह, घनश्याम तिवारी आदि उपस्थित थे। बैठक में सभी पदाधिकारियों, कर्मचारियों को उनकी एकता के लिए सराहा गया तथा मीडिया एवं प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।