Monday , December 6 2021

ड्यूटी के दौरान सुरक्षा को लेकर चिकित्‍सकों ने सरकार से रखी यह मांग

चौबीसों घंटे सेवा वाले स्‍थानों पर सुरक्षा के लिए तैनात हों रिटायर्ड सैन्‍यकर्मी

जीवनभर नौकरी करायें लेकिन ऐच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्‍प रखें

पीएमएस संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कई मसलों पर हुई चर्चा

लखनऊ। प्रौविन्शियल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन उत्‍तर प्रदेश के चिकित्‍सकों ने केन्द्र के समान मूल वेतन का 20 प्रतिशत प्रैक्टिस वेतन बन्दी भत्ता (एनपीए) प्रदान करने के लिए जहां एकस्‍वर से सरकार को धन्‍यवाद दिया वहीं एक स्‍वर से यह साफ भी कर दिया कि सरकार चिकित्‍सकों की अधिवर्षता आयु (रिटायर होने की आयु) जितनी बढ़ाना चाहे बढ़ा दे, भले ही जीवनपर्यन्‍त कर दे लेकिन 60 वर्ष की आयु में ऐच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्‍प जरूर रखे। ज्ञात हो कि प्रदेश में चिकित्‍सकों की कमी पूरी करने के लिए शासन में रिटायरमेंट की आयु 62 से बढ़ाकर 70 वर्ष किये जाने का प्रस्‍ताव लम्बित है और शासन इसके लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यही नहीं चिकित्‍सकों ने सुरक्षा के द्ष्टिकोण से 24 घंटे सेवा वाली जगहों पर 24 घंटे रिटायर्ड सैन्‍य कर्मियों की तैनाती की भी मांग की।

 

आज रविवार को प्रौविन्शियल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन उ0प्र0 की राज्य कार्यकारिणी की बैठक लखनऊ के राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान में एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार यादव की अध्यक्षता में, आयोजित की गयी। बैठक में संवर्ग के चिकित्सकों को केन्द्र के समान मूल वेतन का 20 प्रतिशत प्रैक्टिस वेतन बन्दी भत्ता (एनपीए) प्रदान करने के लिए बैठक में सदस्यों ने एक स्वर से शासन प्रशासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

संघ के महामंत्री डॉ अमित सिंह ने बताया कि, संवर्ग के चिकित्सकों की अधिवर्षता की आयु बढ़ाकर 70 वर्ष करने सरकार की विचार प्रक्रिया और इस पर सरकार द्वारा एसोसिएशन का अभिमत मागें जाने के विषय पर बैठक में, सदस्यों ने गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि, सरकार ने अधिवर्षता आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का आदेश 30 मई, 2017 को लागू किया था। लेकिन सरकार ने 60 वर्ष पर रिटायर होने के विकल्प को स्वेच्छाचारी तरीके से जुलाई 2017 में समाप्त कर दिया। सदस्यों ने 60 वर्ष पर रिटायर होने का विकल्प बहाल करने की सर्वसम्मत मांग की,  जो चिकित्साधिकारियों 62 वर्ष की सेवा करने का विकल्प चुनकर अभी सेवा में है, उन्हें 62 वर्ष की आयु पर अधिवर्षता प्रदान की जाये, उसके बाद सरकार चाहे तो अधिवर्षता की आयु जीवन पर्यन्त बढ़ा दे।

 

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के प्रकरणों पर सरकार पूर्वाग्रह मुक्त होकर कार्यवाही करे। पुनर्योजन के सम्बन्ध में सदस्यों का कहना है कि सेवानिवृत्त चिकित्सकों के लिए पुनर्योजन के राज्य में जनवरी 2014 में 1000 निसंवर्गीय विशेषज्ञ पदों का सृजन किया गया था पुनर्योजन की इस व्यवस्था की सरकार, समीक्षा करें और चाहे तो इसे भी जीवनपर्यन्त बढा दे। लेकिन दुर्गम क्षेत्रो के लिए विशेष पैकेज प्रदान करें। सदस्यों ने सेवाओं की कार्यदशा सुधारने और काम के घण्टे निर्धारित करने पर जोर दिया।

 

बैठक में सामुदायिक स्वास्थ्य तथा पोषण सेवाओ को सुदृढ़ करने पर बल दिया ताकि विशेषज्ञ सेवाओं पर वेवजह दबाव को कम किया जा सके। बैठक में राज्य में चिकित्स्कों और कर्मचारियों के रिक्त पदो को मानक के अनुसार भरने की कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। जहां 24 घण्टे सातों दिन चिकित्सा सेवाएं और मेडिको लीगल सेवाएं दी जा रही है, वहां पर 24 घण्टे, सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों की तैनाती की जाये, ताकि भयमुक्त होकर सुरक्षित हालात में चिकित्सक अपनी सेवायें प्रदान कर सके।

 

प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संघ की बैठक में प्रदेश कार्यकारिणी के डा0 आशुतोष कुमार दुबे उपाध्यक्ष मुख्यालय, डा0 निरूपमा सिंह उपाध्यक्ष (महि0), डा0 विकासेन्दु अग्रवाल उपाध्यक्ष, डा0 विनय कुमार सिंह यादव उपाध्यक्ष, डा0 भावतोष शंखधर उपाध्यक्ष, डा0 अनिल त्रिपाठी अपर महासचिव, डा0 अनिल सिंह वित्त सचिव, डा0 बीपी0 सिंह सम्पादक के अलावा जनपद के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।