Tuesday , April 16 2024

जन्‍मजात हृदय रोगों से ग्रस्‍त बच्‍चों की इस प्रतिष्ठित संस्‍थान में होगी फ्री सर्जरी

-ब्रजेश पाठक की एक और पहल, एनएचएम ने संस्‍थान के साथ किये एमओयू पर हस्‍ताक्षर

ब्रजेश पाठक

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। बच्चों के हृदय रोग की शल्य चिकित्सा के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्‍थान श्री सत्य साई संजीवनी इंटरनेशनल सेंटर फॉर चाइल्ड हर्ट केयर एण्ड रिसर्च, पलवल (हरियाणा) में अब जन्‍मजात हृदय रोग से ग्रस्‍त उत्‍तर प्रदेश के बच्‍चों की शल्‍य चिकित्‍सा नि:शुल्‍क की जायेगी। उपमुख्‍यमंत्री ब्रजेश पाठक की पहल पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उ0प्र0 द्वारा संस्‍थान के साथ इस आशय का एक एमओयू साइन किया गया है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि देश के सबसे बड़े राज्य में जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित बच्चों की शल्य चिकित्सा का सुनिश्चित करना बड़ा दायित्व है। इस नई पहल के साथ स्वास्थ्य विभाग के कुशल प्रबंधन से यह कार्यक्रम बच्चों को एक स्वस्थ जीवन देने में सहायक होगा।

एमओयू हस्तांतरण कार्यक्रम के अवसर पर मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अपर्णा उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश में जन्मजात बीमारियों से बाल मृत्यु दर को कम करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम में हस्ताक्षरित एमओयू के उपरांत प्रदेश के हृदय रोग से ग्रसित बच्चों को निःशुल्क उत्कृष्ट चिकित्सकीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक रूप से किए गए एकीकृत उपायों के फलस्वरूप बाल स्वास्थ्य में निरंतर तेजी से सुधार हो रहा है।

महाप्रबंधक बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) डॉ मनोज कुमार शुक्ल ने कहा कि एमओयू के हस्ताक्षर होने से प्रदेश में हृदय रोग से ग्रसित बच्चों को शीघ्र चिकित्सकीय उपचार प्राप्त होंगे और इलाज से लंबित बच्चों को निःशुल्क चिकित्सकीय सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी। उनके द्वारा मीडिया के माध्यम से आम जन से अपील भी की गई कि विद्यालयों में भ्रमण के दौरान लोग आरबीएसके टीम से अपने बच्चों की जांच सुनिश्चित कराएं ताकि बच्चों की बीमारियों का चिन्हीकरण किया जा सके और उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय उपचार प्रदान किए जा सके।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) कार्यक्रम में जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच शामिल है। स्वास्थ्य जांच में चार श्रेणियों में जन्मजात रोग, कमियां, बीमारियां, विकास में देरी में श्रेणीबद्ध रोगों की जांच, रोगों की शीघ्र पहचान, बीमार बच्चों का प्रबंधन, निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के साथ तृतीयक स्तर पर सर्जरी भी शामिल है। इन चार श्रेणियों में श्रेणीबद्ध रोगों को 4 डी के नाम से भी जाना जाता है। जन्म से लेकर छह वर्ष की आयु वर्ग के लिए प्रबंधन विशेषकर डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) पर किया जाता है जबकि 6 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के लिए स्थितियों का प्रबंधन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से किया जाता है। डीईआईसी दोनों आयु वर्ग के लिए रेफरल लिंक के रूप में भी कार्य करता है।

हेल्थ टीम द्वारा जांच स्थलों पर स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत आवश्यक दवाइयां एवं स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जाते हैं। रोग ग्रसित बच्चों को आवश्यकतानुसार चिकित्सालयों में रेफर किया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.