Friday , August 6 2021

तम्‍बाकू पर प्रतिबंध के लिए कदम उठाने पर बन रही सहमति

-उपमुख्‍यमंत्री ने कहा, प्रस्‍ताव भेजिये, प्रधानमंत्री के पास भेजूंगा
-लंग कैंसर पर दो दिवसीय कॉन्‍फ्रेंस नेलकॉन-2019 प्रारम्‍भ

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। श्‍वास सम्‍बन्‍धी बीमारियों के साथ ही फेफड़े के कैंसर के लिए जिम्‍मेदार तम्‍बाकू पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने के लिए प्रस्‍ताव भेजे जाने की तैयारियां शुरू हो गयी हैं,  समझा जा रहा है कि जल्‍दी ही इण्डियन सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ लंग कैंसर (आईएसएसएलसी) की ओर से इस तरह का प्रस्‍ताव रखा जायेगा। इस प्रस्‍ताव को प्रधानमंत्री को भेजने के लिए उत्‍तर प्रदेश सरकार की सहमति भी मिलने का आश्‍वासन उत्‍तर प्रदेश के उप मुख्‍यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा की ओर से मिला है।

आपको बता दें कि आज किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटफिक कनवेंशन सेंटर में फेफड़े के कैंसर की 10वीं दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘नेलकॉन-2019’ का शुभारम्भ हुआ है और इस मौके पर आईएसएसएलसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिगम्बर बेहरा ने कहा कि बीड़ी, सिगरेट का सेवन फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण है। उन्होंने प्रधानमंत्री के बारे में कही जाने वाली कहावत “मोदी है, तो मुमकिन है“ का जिक्र करते हुए कहा कि‍ यह जानते हुये कि तम्बाकू जानलेवा है, प्रधानमंत्री को इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए।

इस सम्‍मेलन के उद्घाटन सत्र में आयोजन सचिव एवं रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकान्त ने बताया कि इस संगोष्ठी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह संगोष्‍ठी तम्बाकू, धूम्रपान व प्लास्टिक रहित आयोजित की जा रही है। इसमें प्रतिभागियों को प्लास्टिक रहित बैज प्रदान किये गये हैं तथा संगोष्ठी का विषय स्टॉप स्मोकिंग, रिड्यूज एयर पोलुशन, प्रिवेन्ट लंग कैंसर (धूम्रपान बन्द करें, वायु प्रदूषण कम करें, फेफड़े के कैंसर से बचाव करें) है। इस संगोष्ठी का उद्घाटन मोमबत्ती न जला कर इलेक्ट्रिक लाइट जला कर किया गया।

उद्घाटन सत्र में डॉ सूर्यकान्त द्वारा लिखित पुस्तक “एन अपडेट ऑन लंग कैंसर“ का विमोचन भी किया गया। डॉ सूर्यकान्त ने बताया कि फेफड़े के कैंसर दुनिया में पुरुषों में सबसे ज्यादा होते हैं तथा भारत में भी पुरुषों में यह दूसरे नम्बर का कैंसर है। डॉ सूर्यकान्त ने कहा कि 80 प्रतिशत से ज्यादा कैंसर के रोगी अंतिम अवस्था में ही सही उपचार प्राप्त कर पाते हैं,  इसका प्रमुख कारण यह है कि फेफड़े के कैंसर के लक्षण टीबी रोग से मिलते जुलते हैं।

वीडियो देखिये-जब चुटीले अंदाज में डॉ दिनेश शर्मा ने कहा तो लग पड़े ठहाके

इण्डियन सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ लंग कैंसर के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिगम्बर बेहरा ने उद्घाटन सत्र में बताया कि बीड़ी, सिगरेट का सेवन फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण है। उन्होंने प्रधानमंत्री के बारे में कही जाने वाली कहावत “मोदी है, तो मुमकिन है“ का जिक्र किया तथा कहा कि‍ यह जानते हुये कि तम्बाकू जानलेवा है प्रधानमंत्री को इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि उप्र के उप मुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा ने सरकार द्वारा फेफडे़ के कैंसर के गरीब रोगियों के उपचार के लिए पूर्ण सहयोग देने की बात कही, उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना तथा उज्ज्वला योजना फेफड़े के कैंसर के रोगियों का उपचार एवं बचाव में सहायक सिद्ध हो रही हैं। डॉ शर्मा ने संगोष्ठी के पदाधिकारियों को यह आश्वासन दिया कि तम्बाकू के प्रतिबन्ध का कोई प्रस्ताव आप ले आयें तो वे भारत के प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर आपकी मांग को अग्रसारित करेंगे।

इस अवसर पर चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुये बताया कि लगभग 40 वर्ष पहले फेफड़े के कैंसर का उपचार लगभग न के बराबर होता था, किन्तु चिकित्सा जगत की प्रगति के साथ अब फेफड़े के कैंसर का उपचार संभव है तथा यदि रोगी प्रारम्भिक अवस्था में ही उपचार शुरू कर दे तो वह लगभग 5 वर्ष या उस से भी अधिक जीवित रह सकता है। डॉ भट्ट  ने फेफड़े के कैंसर के इतिहास की विस्तृत जानकारी दी।

इस संगोष्ठी में 250 से अधिक चिकित्सक, वैज्ञानिक एवं शोधार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। इसमें राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ साथ शार्क देशों (नेपाल व बांग्लादेश) के प्रतिनिथि भी प्रतिभाग कर रहें है। संगोष्ठी के वैज्ञानिक सत्रों में डॉ राजेन्द्र प्रसाद (लखनऊ), डॉ सुस्मिता राय चौधरी (कोलकाता), डा0 आर के दीवान (दिल्ली), डा0 अजीजुर रहमान, (ढाका, बांग्लादेश), डा0 रिचा गुप्ता (वेल्लौर, तमिलनाडु) एवं पीजीआई, चंडीगढ़ से डॉ राकेश कपूर, डॉ अमनजीत बल, डॉ नवनीत सिंह ने फेफडे़ के कैंसर पर अपना व्याख्यान दिया।

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