-उपमुख्यमंत्री के आश्वासन और शासन की सहमति के एक वर्ष बाद भी शासनादेश न होने पर उठे सवाल

सेहत टाइम्स
लखनऊ। उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा एक वर्ष पूर्व आश्वासन और शासन स्तर पर उन 5 प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बावजूद आज तक शासनादेश जारी न किये जाने के विरोध में राजकीय नर्सेज संघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज 7 नवम्बर को पूरे प्रदेश में काला दिवस मनाया गया।
…डीजी साहब होश में आओ… प्रमुख सचिव होश में आओ…
राजधानी लखनऊ के बलरामपुर हॉस्पिटल में भी आंदोलनकारी नर्सेज ने काला दिवस मनाने के लिए नारेबाजी के साथ काले लिबास पहनकर विरोध स्वरूप शासन के समझौते पत्र की प्रतिलिपियां भी जलायीं। …डीजी साहब होश में आओ… प्रमुख सचिव होश में आओ… तानाशाही नहीं चलेगी जैसे नारों के साथ नर्सेंज ने अपने विरोध का इजहार किया।
संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि बीती 9 अक्टूबर से शुरू हुआ नर्सिंग संवर्ग का शांतिपूर्ण आंदोलन आज 30वें दिन में प्रवेश कर गया है। प्रदेश के सभी जनपदों के जिला चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों में नर्सेज ने काली पट्टी बांधकर अपनी 13 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया।
सबसे बड़ा सवाल
उल्लेखनीय है कि 21 अक्टूबर से प्रतिदिन 2 घंटे कार्य बहिष्कार और 22 अक्टूबर को स्वास्थ्य भवन, लखनऊ का ऐतिहासिक घेराव किया जा चुका है। अशोक कुमार ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल है कि जब उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आश्वासन और शासन की सहमति एक साल पूर्व दी जा चुकी है तो आखिर अब तक शासनादेश क्यों नहीं हो रहा है, यह विचारणीय है।
प्रमुख मांगें : गृह जनपद में तैनाती, पदोन्नति, पालनाघर की व्यवस्था, सवैतनिक अध्ययन अवकाश, मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित अस्पतालों में संवर्ग हितों की रक्षा और केंद्र के समान भत्ते।
संघ का स्पष्ट संदेश है अब आश्वासन नहीं, शासनादेश चाहिए।

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