-केजीएमयू में पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने आयोजित किया सेप्सिस अपडेट 2026

सेहत टाइम्स
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा है कि एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश में शीघ्र ही राज्य स्तरीय नीति लागू की जायेगी। यह बात उन्होंने 12 सितम्बर को यहां केजीएमयू स्थित शताब्दी हॉस्पिटल में पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेप्सिस अपडेट 2026 का उद्घाटन करने के बाद अपने सम्बोधन में कही। उन्होंने इस नीति को तैयार करने के लिए आवश्यक जानकारियों के लिए ड्राफ्ट तैयार कर शासन को उपलब्ध कराने को कहा।
यह जानकारी देते हुए आयोजन सचिव प्रो वेद प्रकाश ने बताया कि सेप्सिस जैसी गम्भीर बीमारी से प्रत्येक 3 सेकंड में एक व्यक्ति की मृत्यु होती है। अपर मुख्य सचिव ने बिना चिकित्सक की सलाह के एंटीबायोटिक के सेवन पर चिंता जाहिर करते हुए इसके मनमाने इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए नीति लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए राज्य स्तरीय नीति बनाये जाने की आवश्यकता है।
देखें वीडियो : एंटीबायोटिक का दुरुपयोग रोकेगी यूपी सरकार
डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि वर्तमान में स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में लोग बिना किसी चिकित्सक की सलाह के दवा की दुकान से एंटीबायोटिक खरीद सकता है। यही नहीं ऐसा भी होता है कि चिकित्सक की सलाह से जो दवा का कोर्स करना होता है, उसे मरीज पूर्ण पालन नहीं करता है। इसका नतीजा यह होता है कि दवा के प्रति कीटाणु रेजिस्टेंस डेवलप कर लेते हैं, नतीजा वह दवा निष्प्रभावी हो जाती है।
उन्होंने कहा कि “सेप्सिस के मामले में उपचार शुरू करने में हर मिनट मायने रखता है। “सेप्सिस के संकेतों को जल्दी पहचानें और सही कदम उठाएं”, “सेप्सिस के लिए सही एंटीबायोटिक, सही डोज़ और सही समय तक देने से जान बच सकती है” उन्होंने कहा कि “एंटीबायोटिक्स, के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचें। माइक्रोबियल दुनिया पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से बदल रही है।” उन्होंने कहा कि दवा-प्रतिरोधी (ड्रग-रेसिस्टेंट) इन्फेक्शन विश्वस्तरीय समस्या है। नए और दवा-प्रतिरोधी (ड्रग-रेसिस्टेंट) इन्फेक्शन में हो रही बढ़ोत्तरी जीवन के लिए घातक है, हेल्थकेयर सिस्टम में एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए राज्य-स्तर पर कदम उठाना ज़रूरी है।

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