-विश्व सेप्सिस दिवस (13 सितम्बर) के अवसर पर केजीएमयू में आयोजित किया जा रहा दो दिवसीय सम्मेलन

सेहत टाइम्स
लखनऊ। प्रत्येक 3 सेकंड में एक व्यक्ति को मौत की नींद सुलाने वाली सेप्सिस जैसी गम्भीर बीमारी से पूरे विश्व में हर 5 मृत्यु में 1 मृत्यु होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार हर साल 1 करोड़ 10 लाख लोगों की मृत्यु सेप्सिस के कारण होती हैं। भारत में सेप्सिस के मामले अत्यधिक है, एक अध्ययन के अनुसार अनुमानित 1 करोड़ 10 लाख मामले भारत में हो हैं और सेप्सिस से लगभग 30 लाख मृत्यु होती है। शीघ्र उपचार के लिए इसके संकेतों और लक्षणों की शीघ्र पहचान महत्वपूर्ण है।
यह जानकारी शुक्रवार को केजीएमयू शताब्दी हॉस्पिटल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गयी। विश्व सेप्सिस दिवस (13 सितम्बर) के अवसर पर केजीएमयू में आयोजित किये जा रहे दो दिवसीय सम्मेलन की जानकारी देने के लिए बुलायी गयी इस प्रेस कांफ्रेंस में (डॉ.) वेद प्रकाश (हेड, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन), प्रो.(डा.) सूर्यकान्त (हेड, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, प्रो. (डा.) अपुल गोयल (यूरोलॉजी विभाग, KGMU) और डा सौमित्र मिश्रा (सी.सी.एम. विभाग, KGMU) शामिल रहे।
वक्ताओं ने बताया कि सेप्सिस एक जटिल और जीवन-घातक स्थिति है जो तब उत्पन्न होती है जब संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया से व्यापक सूजन और ऊतक क्षति होती है। विभिन्न कारकों और प्रकार के संक्रमणों से सेप्सिस हो सकता है इनमें सबसे आम कारण जीवाणु संक्रमण है जो विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न हो सकता है जैसे मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई), निमोनिया, त्वचा और साॅफ्ट टिष्यू में संक्रमण, पेट संक्रमण और रक्तप्रवाह संक्रमण (बैक्टीरिमिया) इत्यादि। इसके अलावा वायरल संक्रमण, फंगल संक्रमण, परजीवी संक्रमण, अस्पताल से प्राप्त संक्रमण, समुदाय-प्राप्त संक्रमण भी सेप्सिस का कारण होते हैं।
वक्ताओं ने बताया कि सेप्सिस से 5 साल के कम उम्र के लगभग 2 करोड बच्चों की मृत्यु होती है जिसमें मुख्यतः नवजात शिशु प्रभावित होते है। महिलाएं, वृद्ध और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग सेप्सिस के उच्च जोखिम पर होते हैं। गरीबी और सीमित स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच सेप्सिस को और अधिक जानलेवा बनाता है।
एंटीबायोटिक उपचार में हर घंटे की देरी से मृत्यु का खतरा 0.4 प्रतिशत से 7 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। हाल की एक स्टडी में बताया गया कि भारत में ICU के आधे से अधिक मरीज सेप्सिस से ग्रसित हैं, और मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया से होने वाला सेप्सिस 45 प्रतिशत तक बढ़ गया है। WHO ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को गंभीर चिंता का विषय बताया है, हर साल कम से कम 7,00,000 मौतें इस वजह से होती हैं, जिनमें से कई सेप्सिस से जुड़ी होती हैं।
नए अध्ययन के अनुसार भारत में ICU में भर्ती मरीजों का 56 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सेप्सिस से ग्रसित है। इनमें से 45 प्रतिशत मामलों में संक्रमण मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया से हुआ था।

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