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नर्सों का तबादला प्रकरण में चौंकाने वाली जानकारी, नर्सेज संघ का सीएम से उच्चस्तरीय जांच का अनुरोध

-मानव सम्पदा पोर्टल और मूल आवेदन फॉर्म में अंकित गृह जिले का नाम पृथक-पृथक

-महानिदेशक ने कहा, मूल आवेदन फॉर्म में अंकित स्थायी पतेे के आधार पर हुए तबादले

अशोक कुमार

सेहत टाइम्स

लखनऊ। नर्सिंग ऑफीसर्स के उनके गृह जनपद में किये गये तबादलों में अनियमितता के मामले में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आयी है। जिन नर्सिंग ऑफीसर्स के तबादलों पर आपत्ति जताते हुए शिकायत की गयी थी, उनके गृह जनपद मानव सम्पदा पोर्टल और मूल आवेदन फॉर्म में पृथक-पृथक अंकित हैं। महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य ने कहा है कि तबादले मूल आवेदन फॉर्म में अंकित स्थायी पते के आधार पर किये गये हैं, नया तैनाती स्थल गृह जनपद नहीं है। महानिदेशक की शासन को भेजी गयी इस जानकारी को लेकर शिकायतकर्ता राजकीय नर्सेज संघ उत्तर प्रदेश के महामंत्री अशोक कुमार ने इसमें गहरी साठगांठ और नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा प्रतीत होने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांचकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

गहरी साठ-गांठ प्रतीत हो रही

मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में अशोक कुमार ने कहा है कि जब सारी सूचनाएं मानव सम्पदा पोर्टल के आधार पर अंकित की गयीं तो सिर्फ गृह जनपद के लिए मूल आवेदन फॉर्म को आधार क्यों माना गया। उन्होंने पत्र में लिखा है कि मानव सम्पदा पोर्टल के पी-2 एवं लोक सेवा आयोग के आवेदन फार्म में पृथक-पृथक गृह जनपद अंकित है। एक ही कार्मिक के दो अलग-अलग गृह जनपद कैसे अंकित हो सकते है, इससे ऐसा प्रतीत होता है कि महानिदेशालय एवं जनपद स्तर पर गहरी साठ-गांठ कर यह अनियमिताएं की जा रही हैं।

पत्र में कहा गया है कि इसी प्रकार के कृत्यों के कारण गाजीपुर में 50 से भी ज्यादा फर्जी स्टाफ नर्स का खुलासा हुआ था। महानिदेशालय द्वारा बडे पैमाने पर 337 नर्सिंग अधिकारियों के स्थानान्तरण किये गये जिसमें गृह जनपद का परीक्षण किस मानक के अनुसार किया गया है, जानकारी अप्राप्त है, क्योंकि मानव सम्पदा के पी-2 एवं लोक सेवा आयोग के आवेदन फार्म में पृथक-पृथक गृह जनपद अंकित है। उक्त से ऐसा प्रतीत होता है कि इसकी आड में कही फर्जी नियुक्तियां का खेल तो नही खेला गया है। जैसा की पूर्व में फर्जी नियुक्तियां इसी प्रकार से पकड में आयी थीं।

समस्त स्थानान्तरित 337 कार्मिकों के मामले की हो जांच

लोक सेवा आयोग के आवेदन फार्म में एवं मानव सम्पदा पी-2 में पृथक-पृथक गृह जनपद किस उददेश्य से किसकी लापरवाही से किया गया है। उन्होंने कहा है कि संघ की मांग है कि समस्त स्थानान्तरित 337 कार्मिकों के लोक सेवा आयोग के आवेदन फार्म में अंकित गृह जनपद, सेवा पुस्तिका में अंकित गृह जनपद एवं मानव सम्पदा पी-2 में अंकित गृह जनपद की गहन उच्च स्तरीय जाँच कराये जाने के पश्चात ही दूध का दूध पानी का पानी हो सकेगा।

पत्र में यह भी कहा गया है कि महानिदेशालय द्वारा कार्मिक का समस्त डाटा जैसे ई०एच०आर०एम०एस० कोड, नियुक्ति तिथि, पिता/पति का नाम, तैनाती अवधि एवं अन्य सभी प्रकार की सूचनाओ का अंकन स्थानान्तरण सम्बन्धी ब्राड शीट में मानव सम्पदा पोर्टल के पी-2 में अंकित सूचनाओ को मानते हुये किया गया है, तो फिर मात्र गृह जनपद हेतु लोक सेवा आयोग के आवेदन फार्म का हवाला देना किस प्रकार से उचित है।

पत्र में कहा गया है कि इन्हीं कृत्यों के चलते एक्सरे टेक्नीशियन / लैब टैक्नीशियन / डार्क रूम सहायक की भर्ती में फर्जीवाडा शासन के समक्ष उजागर हुआ जिसकी जाँच में एक ही नाम से पृथक-पृथक मानक सम्पदा के साथ 04-05 स्थानों पर कार्य करने का प्रकरण उजागर हुआ था।

प्रयागराज के मामले में मौन क्यों

पत्र में कहा गया है कि महानिदेशालय द्वारा एक नर्सिंग स्टाफ अनुपमा कुशवाहा का एकल स्थानान्तरण आदेश जनपद कौशाम्बी से जनपद प्रयागराज किस उद्देश्य से किया गया है, जिनका पी-2 के अनुसार गृह जनपद प्रयागराज है और स्थानान्तरित ईकाई पर स्टाफ नर्स का कोई पद सृजित नहीं है। इस विषय पर महानिदेशालय पूरी तरह मौन धारण किये हुये है। इसकी जांच भी शासन स्तर से होनी चाहिये। पत्र में एक नर्स जिसकी तैनाती लखनऊ में ही थी उसका तबादला लखनऊ में ही दूसरे स्थान पर किये जाने पर भी सवाल खड़ा किया गया है।