-अपग्रेडेशन की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा अस्पताल, डॉ अनिल खन्ना व डॉ गीता खन्ना ने जताया आभार

सेहत टाइम्स
लखनऊ। अजन्ता हॉस्पिटल ने अपग्रेडेशन की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए रोबोटिक सर्जरी कार्यक्रम प्रारम्भ कर दिया है। इस कार्यक्रम की शुरुआत Prostate Cancer प्रोस्टेट कैंसर (कार्सिनोमा प्रोस्टेट) से ग्रस्त 75 वर्षीय मरीज की सफल रोबोटिक रैडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी विद बाइलेटरल पेल्विक लिम्फ नोड डिसेक्शन (PLND) से हुई। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त प्रोस्टेट ग्रंथि को हटाने के साथ-साथ पेल्विस के दोनों तरफ स्थित लिम्फ नोड्स Lymph Nodes की जांच करके उन्हें निकाल दिया जाता है। यह सर्जरी डॉ अनिल खन्ना के मार्गदर्शन में अस्पताल के यूरो सर्जन डॉ नीरज अग्रवाल ने की।
सह रुग्णता का शिकार था मरीज
इस बारे में जानकारी देते हुए अस्पताल के निदेशक डॉ अनिल खन्ना व डॉ गीता खन्ना ने कहा कि यह उपलब्धि अजंता हॉस्पिटल की उन्नत चिकित्सा सेवाओं, उत्कृष्ट शल्य कौशल तथा अत्याधुनिक रोगी देखभाल के प्रति हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सर्जरी के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 75 वर्षीय एक सज्जन, जो मधुमेह (डायबिटीज) और उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से ग्रस्त थे, वे ओपीडी में मूत्र अवरोध (Urinary Retention) की शिकायत के साथ आए। पिछले 3 महीनों से उन्हें कैथेटर लगा हुआ था। दूसरे किसी अस्पताल में उन्हें केवल कैथेटर से छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से TURP (ट्रांसयूरेथ्रल रिसेक्शन ऑफ प्रोस्टेट) कराने की सलाह दी गई थी।
जांच में पता चला T2 स्टेज का है प्रोस्टेट कैंसर
डॉ खन्ना ने बताया कि मरीज के क्लिनिकल लक्षणों और DRE (डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन) के निष्कर्षों के आधार पर संदेह हुआ। इसलिए आगे की जांच के लिए PSA, MRI तथा TRUS-गाइडेड प्रोस्टेट बायोप्सी कराई गई, जिसमें T2 स्टेज के प्रोस्टेट कैंसर का पता चला, जिसका Gleason स्कोर 3+4 था और रोग काफी उन्नत अवस्था में था। उन्होंने बताया कि इसके बाद रोगी की Robotic Assisted Radical Prostatectomy (RARP) के साथ Bilateral Pelvic Lymph Node Dissection (PLND) की गई। प्रोस्टेट का आकार बड़ा होने तथा घनी चिपकनों (Dense Adhesions) के कारण ऑपरेशन का समय थोड़ा अधिक लगा, लेकिन हमारा उद्देश्य सूक्ष्म स्तर तक रोग को पूरी तरह निकालना और ऑपरेशन के बाद रोगी को बेहतर परिणाम देना था, ताकि उन्हें भविष्य में मूत्र असंयम (Urinary Incontinence) जैसी समस्या न हो तथा उनका रिकवरी कोर्स सुचारु रहे।
सर्जन के हाथ में ही रहता है पूरा नियंत्रण
डॉ अनिल व डॉ गीता ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी मिनिमल इनवेसिव सर्जरी का एक उन्नत स्वरूप है, जिसमें सर्जन एक विशेष कंसोल से अत्यधिक सटीक रोबोटिक सिस्टम की सहायता से ऑपरेशन करते हैं। सर्जरी पूरी तरह सर्जन द्वारा नियंत्रित होती है और रोबोट केवल सटीकता, स्थिरता और बेहतर नियंत्रण में सहायता करता है क्योंकि पारंपरिक लैप्रोस्कोपी तुलना में रोबोटिक सर्जरी में 3-डी हाई डेफिनिशन दृश्य, अधिक सूक्ष्म मूवमेंट और जटिल मामलों में बेहतर नियंत्रण संभव होता है।
विशेष प्रकार के मामलों में ही की जायेगी रोबोटिक सर्जरी
उन्होंने बताया कि हमारे इस कार्यक्रम का उद्देश्य तकनीक का नियमित उपयोग नहीं, बल्कि मरीज की सुरक्षा और तकनीक का उचित एवं जिम्मेदार इस्तेमाल है। रोबोटिक सर्जरी हर मरीज के लिए आवश्यक नहीं होती और इसका प्रयोग केवल उन्हीं मामलों में किया जाएगा, जहाँ इससे सटीकता और सुरक्षा के लिहाज से स्पष्ट चिकित्सकीय लाभ मिलता हो। अस्पताल में फिलहाल यह रोबोटिक सर्जरी कार्यक्रम गायनेकोलॉजी, यूरोलॉजी, जनरल सर्जरी तथा चयनित कैंसर सर्जरी के मामलों में तथा विशेष रूप से जटिल और बार-बार होने वाली सर्जरी में उपलब्ध होगा।
डॉ खन्ना ने इस उपलब्धि में योगदान देने वाले संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, नर्सिंग एवं तकनीकी टीम की हम हार्दिक सराहना व्यक्त करते हुए कहा कि विशेषज्ञता, समर्पण और उत्कृष्ट टीमवर्क ने इस सफलता को संभव बनाया।

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