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दवाओं के ऑनलाइन व्यापार का हम विरोध तो करते हैं, लेकिन हड़ताल के पक्ष में नहीं

-दवा व्यापार मण्डल (गिरिराज) का ऐलान, 20 मई की प्रस्तावित बंदी नहीं है समस्या का समाधान

-अनैतिक डिस्काउंट प्रथा को समाप्त करने के लिए सख्त कानून बनाने की अपील

सुरेश कुमार

सेहत टाइम्स

लखनऊ। दवा व्यापार मण्डल (गिरिराज), लखनऊ ने घोषणा की है कि आगामी 20 मई को प्रस्तावित दवा प्रतिष्ठानों की बंदी में वह शामिल नहीं होगा क्योंकि हमारा मानना है कि दवा व्यापार की ऑनलाइन व्यवस्था के खिलाफ बंद का आह्वान किया गया है, उसमें विषमताएं तो अवश्य हैं, लेकिन उन विषमताओं को दूर करने की दिशा में किये जा रहे प्रयासों से हम संतुष्ट हैं। ऐसे में हमारा संगठन बंदी करके विरोध जताने के पक्ष में नहीं है। संगठन ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एवं केंद्र की मोदी सरकार से मांग की कि इस अनैतिक डिस्काउंट प्रथा को समाप्त करने के लिए सख्त कानून बनाए जाएँ।

यह जानकारी देते हुए दवा व्यापार मण्डल (गिरिराज), लखनऊ के अध्यक्ष सुरेश कुमार ने बताया कि इस मसले को लेकर गत 11 मई को संगठन की बैठक में कहा गया कि वर्तमान परिस्थितियों में स्ट्राइक जैसा कदम उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि बैठक में सभी की राय थी कि हमारा संगठन ऑनलाइन व्यवस्था में उपस्थित विषमताओं का पुरजोर विरोध करता है, क्योंकि ऑनलाइन में व्याप्त अनैतिक डिस्काउंट प्रथा ही आज की अधिकांश समस्याओं की जड़ है। इसी कारण e-pharmacy का आकर्षण बढ़ा है तथा वे public money का दुरुपयोग कर अनैतिक प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।

नकली दवाओं के विरुद्ध चलना चाहिये अभियान

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हमारा संगठन पूर्ण रूप से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एवं केंद्र की मोदी सरकार पर विश्वास करता है कि हमारी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाएगा। वर्तमान समय में हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य मरीजों एवं समाज को नकली एवं counterfeit दवाओं से निजात दिलाना है, जिसके विरुद्ध हमारा संगठन लगातार अभियान चला रहा है।

फार्मा कंपनियों की नीतियों पर उठाये सवाल

सुरेश कुमार ने बताया कि बैठक में यह भी कहा गया कि फार्मा कंपनियाँ आज की स्थिति की वास्तविक जिम्मेदार हैं, क्योंकि एक ही दवा विभिन्न प्रकार के डिस्काउंट पर बेची जाती है- डॉक्टर के लिए अलग, अस्पताल के लिए अलग, राज्य अस्पताल के लिए अलग, केंद्रीय अस्पताल के लिए अलग, प्रत्येक stockist के लिए अलग, retailer के लिए अलग, अधिक पूंजी निवेश के लिए अलग, centralized purchase के लिए अलग तथा research एवं educational institutes के लिए अलग। ऐसे में संगठन का मानना है कि स्पष्ट रूप से यह पूरा खेल फार्मा कंपनियों की नीतियों का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि इस बैठक में अध्यक्ष सुरेश कुमार के साथ ही सह अध्यक्ष अमित अग्रवाल, महामंत्री संजीव अग्रवाल, कोषाध्यक्ष अविनाश रस्तोगी, प्रवक्ता विकास रस्तोगी आदि शामिल रहे।