Tuesday , May 5 2026

अस्थमा से पीडि़त बड़े हों या बच्चे, इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स है प्रभावी

-विश्व अस्थमा दिवस पर केजीएमयू के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में पत्रकार वार्ता

सेहत टाइम्स

लखनऊ। अस्थमा से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति, जिसमें अधिकांश प्री-स्कूल बच्चे भी शामिल हैं, को इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (ICS) प्राप्त होने चाहिए। ये इनहेलर अस्थमा के दौरे के जोखिम को कम करते हैं और रोकी जा सकने वाली अस्थमा से होने वाली मौतों को कम करते हैं।

यह जानकारी सोमवार 4 मई को पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा विश्व अस्थमा दिवस पर आयोजित पत्रकार वार्ता में विभागाध्यक्ष प्रो वेद प्रकाश ने देते हुए बताया कि ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (GINA) ने विश्व अस्थमा दिवस 2026 के लिए “अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों के लिए anti-inflammatory inhalers इनहेलर की उपलब्धता – एक अति आवश्यकता” को थीम के रूप में चुना है। पत्रकार वार्ता में रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रो आरएएस कुशवाहा भी शामिल थे।

उन्होंने बताया कि भारत में अनुमानतः 2–5 % जनसंख्या अस्थमा से ग्रस्त है। महिलाओं में अस्थमा की व्यापकता पुरुषों से अधिक है। खराब वायु गुणवत्ता भारत में अस्थमा की समस्या का एक प्रमुख कारक है। जागरूकता की कमी और अल्प‑निदान एक बड़ी चुनौती है एक अध्ययन के अनुसार केवल 50 प्रतिशत भारतीय अस्थमा रोगियों का सही निदान व उपचार हो पाता है।

प्रो वेद प्रकाश ने बताया कि एलर्जी एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है और इसकी व्यापकता लगातार बढ़ रही है।
विश्व एलर्जी संगठन के अनुसार, विश्व की 30-40% जनसंख्या किसी न किसी एलर्जी से प्रभावित है।
उन्होंने बताया कि इसके लक्षणों में घरघराहट (छाती से सीटी की ध्वनि), साँस फूलना या साँस लेने में कठिनाई, विशेषकर रात में या सुबह होने वाली खांसी, छाती में जकड़न, दर्द या घुटन‑सा महसूस होना।

प्रो वेद प्रकाश ने बताया कि एलर्जेन, संक्रमण, वायु‑प्रदूषण, ठंडी हवा, शारीरिक व्यायाम, मानसिक तनाव आदि अस्थमा के ट्रिगर (बढाने वाले तत्व) का कार्य करते हैं। अस्थमा लाइलाज बीमारी नही है, उचित उपचार व जीवन‑शैली में बदलाव से इसे पूरी तरह नियंत्रित कर सामान्य जीवन जिया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि अस्थमा के बेहतर प्रबंधन के लिए एयरवे सूजन कम करने के लिए नियमित रूप से इनहेलेड कॉर्टिको‑स्टेरॉयड्स का उपयोग किया जाता है। इसके अलाव तुरंत लक्षण से राहत पाने के लिए ब्रोंकोडाएलेटर्स का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा व्यक्तिगत ट्रिगर पहचान कर न्यूनतम संपर्क करके अस्थमा को बढाने से रोका जा सकता है। इसके अलावा बेहतर प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना आवश्यक होती है, क्योंकि प्रत्येक रोगी भिन्न होता है। इसके साथ ही नियमित फॉलोअप करते हुए चिकित्सकीय निगरानी व योजना में समय‑समय पर संशोधन से अस्थमा का समुचित इलाज किया जाता है।

अस्थमा की रोकथाम

* वायु प्रदूषण, ठंडी हवा, सुगंध आदि जैसे अस्थमा को ट्रिगर करने वाले कारकों के संपर्क से बचें।
* एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों के संपर्क से बचें।
* सिगरेट, मोमबत्ती, अगरबत्ती और पटाखों के धुएं से बचें।
* बीमार लोगों (सर्दी या फ्लू) से दूर रहें।
* आसपास के वातावरण को धूल रहित रखें।
* निमोनिया, डिप्थीरिया, टेटनस, दाद और काली खांसी से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण करवाएं।
* अस्थमा की दवाएं नियमित रूप से लें।