-ऐतिहासिक उपलब्धि पर आयोजित भव्य समारोह में प्रो मल्ल्किार्जुन ने दिया विशेष व्याख्यान
-प्रो ईश्वर राम धायल के नेतृत्व में हासिल उपलब्धि पर निदेशक प्रो सीएम सिंह ने दीं शुभकामनाएं

सेहत टाइम्स
लखनऊ। डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआई), लखनऊ के मूत्रविज्ञान एवं किडनी प्रत्यारोपण विभाग ने शुरुआती एक वर्ष में ही रोबोटिक सर्जरी का तिहरा शतक लगा लिया है। सार्वजनिक क्षेत्र का यह पहला विभाग है जिसने स्वतंत्र रूप से यह उपलब्धि हासिल की है। विभागाध्यक्ष प्रो ईश्वर राम धायल के नेतृत्व में हुईं 300 रोबोटिक सर्जरी पूर्ण: उन्नत मूत्रविज्ञान देखभाल में ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह उपलब्धि न्यूनतम आक्रामक (मिनिमली इनवेसिव) मूत्रविज्ञान सर्जरी के क्षेत्र में एक नया मानदंड स्थापित करती है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को समारोहपूर्वक मनाने के लिए शनिवार 11 अप्रैल को गोमती नगर स्थित एक होटल में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। संस्थान के निदेशक प्रो सीएम सिंह के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न इस कार्यक्रम में विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम के तहत एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी (AINU), हैदराबाद के ख्याति प्राप्त मूत्ररोग विशेषज्ञ प्रो मल्लिकार्जुन ने मुख्य व्याख्यान दिया।
इस वर्ष दो और रोबोट खरीदने की तैयारी
मुख्य अतिथि प्रो सीएम सिंह ने इस उपलब्धि के लिए प्रो ईश्वर राम धायल और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि निश्चित रूप से यह गौरव का विषय है, उन्होंने कहा कि संस्थान में अब तक कुल 372 रोबोटिक सर्जरी की गयी हैं, उनमें 300 सर्जरी अकेले मूत्रविज्ञान एवं किडनी प्रत्यारोपण विभाग द्वारा की गयी हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष दो और रोबोट खरीदने की योजना है, इसके लिए धनराशि मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में संस्थान में एक गामा नाइफ भी स्थापित किया जायेगा, जो कि मेरा बहुत पुराना सपना है। निदेशक ने कहा कि रीनल ट्रांसप्लांट के केसेज और भी किये जा सकते हैं लेकिन इसके लिए डोनर की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती होती है, इस दिशा में हमें कार्य करने की आवश्यकता है।

रोबोटिक सर्जरी में बरती जाने वाली सावधानियां बतायीं प्रो मल्लिकार्जुन ने
अपने व्याख्यान में प्रो मल्लिकार्जुन ने रोबोटिक मूत्रविज्ञान के विकसित होते परिदृश्य और इसके रोगी परिणामों पर सकारात्मक प्रभावों पर अपने विचार साझा करते हुए प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रोस्टेट की रोबोटिक सर्जरी के दौरान रखी जाने वाल सावधानियों को शारीरिक संरचना के साथ विस्तार से प्रस्तुत किया।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा चूंकि रोबोटिक सर्जरी अभी नयी है, इसलिए अभी यह ज्यादा खर्चीली है, जैसे-जैसे सर्जरी की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे इसकी कीमत भी कम होगी। उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी कराने से पूर्व यह ध्यान देना चाहिये कि जिस सर्जन से आप सर्जरी करा रहे हैं, उसका उस क्षेत्र में कितना अनुभव है। उन्होंने प्रो ईश्वर राम धायल को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए शुभकामनाएं दीं।
तीन सौ केसेज में 61 प्रतिशत केस यूरो ऑन्कोलॉजी के

आरएमएलआई के मूत्रविज्ञान एवं किडनी प्रत्यारोपण विभाग के अध्यक्ष प्रो ईश्वर राम धायल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि एक साल पूर्व 27 मार्च, 2025 को हुई विधिवत पूजा-पाठ के बाद अगले दिन 28 मार्च पहली रोबोटिक सर्जरी की गयी थी। निजी अस्पतालों के मुकाबले लगभग एक चौथाई कीमत में रोबोटिक सर्जरी का लाभ आमजन तक पहुंचाने की दिशा में हम लोगों ने जो कोशिश की, एक साल बाद इसके परिणाम से उत्साहित हूं। उन्होंने निदेशक प्रो सीएम सिंह के प्रति अपना आभार प्रकट करते हुए कहा कि रोबोट सहित सभी संसाधनों की उपलब्धता के लिए उन्होंने भरपूर सहयोग दिया, उन्होंने कहा कि अगर दो और रोबोट हमें मिल जायें तो और तेजी के साथ इस सर्जरी का लाभ मरीजों तक पहुंचा सकेंगे। प्रो धायल ने कहा कि हम लोग बच्चों की भी रोबोटिक सर्जरी कर रहे हैं।
प्रो धायल ने की गयीं सभी 300 रोबोटिक सर्जरी की कैटेगरी का विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इन तीन सौ सर्जरी में 182 केस यानी 61 प्रतिशत यूरो ऑन्कोलॉजी के तथा 68 केस यानी 23 प्रतिशत रीकन्स्ट्रक्टिव सर्जरी के केस शामिल हैं, जबकि महिला यूरोलॉजी के 17 एवं अन्य प्रकार के 33 केसेज शामिल हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए विशेषकर प्रो आलोक कुमार और प्रो संजीत सिंह के साथ अपनी पूरी टीम और सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में धन्यवाद प्रस्ताव की जिम्मेदारी विभाग के वरिष्ठ संकाय प्रो आलोक कुमार ने निभायी। इस मौके पर संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो विक्रम सिंह के साथ ही लखनऊ के प्रतिष्ठित मूत्ररोग विशेषज्ञों एवं स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया।

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