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विशेष क्लीनिक की शुरुआत, 24 पोषण पोटलियों का वितरण कर मनाया 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस

-कुपोषित लोगों को टीबी होने का 10 गुना ज्यादा खतरा : डा0 सूर्यकान्त

-नर्सिंग ऑफीसर सत्येन्द्र कुमार ने नि:क्षय मित्र बनकर उपलब्ध करायीं पोषण पोटली

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में विश्व टीबी दिवस पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विश्व टीबी दिवस के अवसर पर 24 मार्च 2026 को अपराह्न 3 बजे से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें टीबी मरीजों को गोद लेना, पोषण पोटली वितरण, जन-जागरूकता कार्यक्रम तथा पोस्ट टीबी डिज़ीज़ क्लीनिक का उद्घाटन शामिल है। विभाग के नर्सिंग ऑफिसर सत्येन्द्र कुमार निःक्षय मित्र बने तथा 24 टीबी रोगियों को गोद लेकर सभी को पोषण पोटली उपलब्ध कराई।

यह जानकारी रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के हेड प्रो सूर्यकान्त ने दी। उन्होंने बताया कि 50 प्रतिशत टीबी के रोगियों के उपचार के बाद भी फेफड़े में धब्बे/घाव/फाइब्रोसिस/कैल्सीफिकेशन/कोलैप्स तथा सांस की नलियों में रुकावट जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत वर्तमान में पोस्ट टीबी डिज़ीज़ के रोगियों के लिए विशेष उपचार व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ऐसे ही रोगियों के नि:शुल्क इलाज के लिए पोस्ट टीबी डिज़ीज़ क्लीनिक प्रारम्भ की गयी है। ऐसे मरीजों को अब केजीएमयू के पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र में निःशुल्क उपचार मिलेगा, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि विश्व टीबी दिवस प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है इसलिए आज 24 टीबी से पीड़ित रोगियों को गोद लिया गया एवं उनको पोषण पोटली दी गयी। डा0 सूर्यकान्त ने सभी 24 टीबी रोगियों को अच्छे पोषण की सलाह देते हुए बताया कि कुपोषण से ग्रसित पुरुष, बच्चों और महिलाओं को टीबी होने का खतरा सामान्य लोगों की आपेक्षा 10 गुना अधिक होता है। अतः हम सभी को अपने पोषण और इम्यूनिटी का ख्याल रखना चाहिए। डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि इसीलिए आज की पोषण पोटली में चना, दाल, मूंगफली, राजमा, सोयाबीन, गुड़, मखाना आदि पोषक तत्वों वालें खाद्य पदार्थ शामिल किये गये।

उन्होंने बताया कि पोषण पोटली वितरण कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए प्रमुख अतिथियों में अर्चना गहरवार, आईएएस (रजिस्ट्रार, केजीएमयू), डा0 बी0 के0 ओझा (सीएमएस, केजीएमयू) एवं डा0 सुरेश कुमार (एमएस, केजीएमयू) उपस्थित रहे।

डा० सूर्यकान्त ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी चिकित्सकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, टीबी रोगियों एवं उनके परिजनों को संबोधित करते हुए कहा कि टीबी रोगियों के साथ किसी प्रकार का सामाजिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आज भी टीबी रोगियों, विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों, को सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में शादीशुदा महिलाओं को तलाक दे दिया जाता है या उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है, वहीं टीबी से पीड़ित बच्चों के साथ अन्य बच्चे न तो बैठते हैं और न ही खेलते हैं। यह स्थिति मरीजों के हित में नहीं है, क्योंकि इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि उन्हें इस समय परिवार और समाज के सहयोग व हौसले की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम नॉर्थ जोन टास्ट फोर्स के चेयरमैन डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि प्रतिवर्ष 24 मार्च को पूरी दुनिया में विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है, क्योंकि 24 मार्च 1882 को रॉबर्ट कोच नामक जर्मन चिकित्सक ने टीबी के जीवाणु की खोज की थी। इसके लिए उन्हें 1905 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस वर्ष की थीम – “हाँ! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं: देशों के नेतृत्व में और लोगों की शक्ति से” है। इस उद्देश्य के साथ हमें टीबी उन्मूलन को एक जनआंदोलन बनाना होगा।

इन सभी कार्यक्रमों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग रेजिस्टेंट टीबी केयर के संस्थापक प्रभारी एवं विभागाध्यक्ष डा0 सूर्यकान्त तथा विभाग के अन्य चिकित्सक, डा0 आर.ए.एस. कुशवाहा, डा0 सन्तोष कुमार, डा0 राजीव गर्ग, डा0 दर्शन कुमार बजाज, डा0 आनन्द श्रीवास्तव, डा0 ज्योति बाजपेयी, डा0 अंकित कुमार के साथ साथ पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र की टीम डा0 शिवम, डा0 प्रकृति, पवन तथा समस्त जूनियर डाक्टर्स, नार्सिग स्टाफ, डाट्स स्वास्थ्यकर्ता तथा समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे।

आज के कार्यक्रम में 24 मरीजों को गोद लेकर उन्हें पोषण पोटली प्रदान करने वाले सत्येंद्र कुमार विगत वर्ष से कई टीबी रोगियों को गोद लेकर उन्हें निःशुल्क पोषण पोटली प्रदान करते हुए उन्हें जागरूक कर सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान में महती भूमिका निभा रहे हैं। कुलसचिव अर्चना गहरवार ने उनकी सराहना करते हुए इसे पुण्य कार्य बताते हुए कहा कि आप जैसे नि:क्षय मित्रों के सहयोग से देश शीघ्र ही टीबी मुक्त होगा।