-पांच सालों में ट्रॉमा व इमरजेंसी सेवाओं के लिए 5000 नये बेड बढ़ाने की योजना
-प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को समय पर और बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं सरकार का लक्ष्य : ब्रजेश पाठक


सेहत टाइम्स
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ट्रॉमा, इमरजेंसी और बर्न केयर सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में आज किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी (AVB) कन्वेंशन सेंटर में “Brainstorming Session एवं CME on Trauma & Emergency Care” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के अंतर्गत गठित Technical Task Force on Trauma Care द्वारा आयोजित किया गया।
इस विचार-मंथन सत्र में यह महत्वपूर्ण लक्ष्य सामने रखा गया कि आने वाले 5 वर्षों में उत्तर प्रदेश में ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाओं के लिए लगभग 5000 अतिरिक्त बेड विकसित किए जाएंगे, जिससे दुर्घटनाओं और आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री एवं मंत्री, चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य, उत्तर प्रदेश सरकार ब्रजेश पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को समय पर और बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने नए स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से आह्वान किया कि वे मरीजों को केवल ‘केस’ के रूप में न देखें, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण और संवेदनशीलता के साथ मरीजों की सेवा करें।
इस अवसर पर राज्य मंत्री, चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा संसदीय कार्य, मयंकेश्वर शरण सिंह ने Technical Task Force on Trauma Care के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) वी. के. पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग, भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए चल रही पहलों और भविष्य की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने सत्र की संदर्भ स्थापना करते हुए राज्य में ट्रॉमा नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने की दिशा में विभाग की योजनाओं और नीतिगत पहल की जानकारी दी।
केजीएमयू की कुलपति पद्मश्री प्रो. (डॉ.) सोनिया नित्यानंद ने स्वागत भाषण में कहा कि केजीएमयू का एल‑1 ट्रॉमा सेंटर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण रेफरल केंद्र है और इसे भविष्य में और अधिक सशक्त बनाकर प्रदेश के ट्रॉमा नेटवर्क में केंद्रीय भूमिका दी जाएगी।
कार्यक्रम में जिन प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा हुई उनमें उत्तर प्रदेश में ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाओं का राज्यव्यापी नेटवर्क विकसित करना, ट्रॉमा, इमरजेंसी और बर्न केयर सेवाओं का एकीकृत मॉडल विकसित करना, राजमार्गों पर स्थित अस्पतालों और CHC को फर्स्ट रिस्पॉन्स सेंटर के रूप में विकसित करना, टेली‑मेडिसिन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विशेषज्ञ परामर्श की उपलब्धता सुनिश्चित करना, इमरजेंसी स्थितियों में प्रारंभिक 48 घंटे के मुफ्त उपचार की व्यवस्था करना शामिल है।
इस चर्चा में प्रो. एल. डी. मिश्रा – अध्यक्ष, Technical Task Force, डॉ. आर. के. सिंह – SGPGIMS, प्रो. मनीष सिंह – GSVM मेडिकल कॉलेज, कानपुर, मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता – निदेशक, AIIMS गोरखपुर, प्रो. अजय सिंह – कुलपति, यूपीयूएमएस सैफई, प्रो. एम. सी. मिश्रा – पूर्व निदेशक, एम्स दिल्ली, डॉ एके सिंह – Director PGCH, डॉ एसके गुप्ता – IMS BHU व डॉ संजय काला ने भाग लिया।
ट्रॉमा टेक्निकल टास्क फोर्स यूपी सरकार के पदाधिकारियों में चेयरमैन प्रो एलडी मिश्रा, को चेयरपर्सन प्रो आरके सिंह, सदस्य सचिव डॉ प्रेम राज सिंह के अतिरिक्त सदस्यों में डॉ अक्षय आनन्द, डॉ मनीष् के सिंह, डॉ अविनाश अग्रवाल, डॉ प्रतीक सिंह डॉ संदीपा और डॉ सीमा श्रीवास्तव शामिल हैं।
कार्यक्रम के अंत में फोर्स के सचिव डॉ. प्रेम राज सिंह ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस विचार‑मंथन से प्राप्त सुझाव उत्तर प्रदेश में ट्रॉमा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देंगे।

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