-जाते-जाते पांच मरीजों को नया जीवन दे गये सड़क दुर्घटना के शिकार संदीप कुमार
-पीएम की अपील और ऐतिहासिक मल्टी ऑर्गन डोनेशन प्रक्रिया का विशेष संयोग

सेहत टाइम्स
लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ के लिए 22 फरवरी 2026 का दिन एक प्रेरणादायी और ऐतिहासिक संयोग का साक्षी बना। सुबह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात के 131वें एपिसोड में अंगदान के महत्व पर विशेष बल दिया। उसी दिन शाम को एसजीपीजीआई में ब्रेन स्टेम डेथ के उपरांत सफल मल्टी-ऑर्गन डोनेशन संपन्न हुआ। निदेशक डॉ. आर.के. धीमन के नेतृत्व में लगभग 20 वर्षों के उपरांत एसजीपीजीआईएमएस में ब्रेन स्टेम डेथ के पश्चात यह पहला मल्टी-ऑर्गन डोनेशन है, जो संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस डोनेशन से पांच मरीजों (एक लिवर से एक, दो किडनी से दो तथा दो कार्निया से दो) की जिन्दगी बदलेगी।

यह जानकारी देते हुए संस्थान के निदेशक प्रो आरके धीमन और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश हर्षवर्धन, जो स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइज़ेशन – उत्तर प्रदेश (सोटो यूपी) के संयुक्त निदेशक हैं, ने बताया कि प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट है— “आत्मा भले ही शरीर से विलग हो जाए, परंतु दान किए गए अंग किसी अन्य के जीवन में नई आशा और नई ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।” यही अंगदान की सच्ची महत्ता है। माननीय प्रधानमंत्री के संदेश को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने तथा नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपील के अनुरूप इस पुनीत अभियान को जन-जन तक पहुँचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
डॉ हर्षवर्धन ने मल्टी ऑर्गन डोनेशन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लखनऊ निवासी 42 वर्षीय संदीप कुमार 7 फरवरी 2026 को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। विभिन्न अस्पतालों में उपचार के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। 21 फरवरी 2026 की रात्रि में उन्हें एसजीपीजीआईएमएस के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। 22 फरवरी 2026 को चार विशेषज्ञ चिकित्सकों के पैनल द्वारा उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया गया।
18 मिनट में एसजीपीजीआई से केजीएमयू पहुंची एम्बुलेंस
परिजनों की सहमति प्राप्त होने के पश्चात डॉ. राजेश हर्षवर्धन के मार्गदर्शन में एसजीपीजीआईएमएस एवं किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से लिवर रिट्रीवल एवं प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। केजीएमयू की प्रतीक्षा सूची में पंजीकृत रोगी को संयुक्त टीम द्वारा लिवर प्रत्यारोपित किया गया। सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुप्रिया शर्मा एवं डॉ. राहुल के नेतृत्व में लिवर हार्वेस्ट कर SOTTO-यू.पी. द्वारा स्थापित ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से शीघ्रता से केजीएमयू पहुँचाया गया। ऑर्गन ले जाने वाली एम्बुलेंस एपेक्स ट्रॉमा सेंटर से शाम 6:14 बजे निकली और तेलीबाग– कैंट–हज़रतगंज होते हुए 18 मिनट में शाम 6:32 बजे केजीएमयू पहुँची।
यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एम.एस. अंसारी, डॉ. संजय सुरेका एवं डॉ. संचीत रुस्तगी की टीम द्वारा किडनी रिट्रीवल किया गया, जबकि नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नारायण प्रसाद की टीम ने रिसीपिएंट का प्रबंधन एवं प्रत्यारोपण की तैयारी सुनिश्चित की। इसी प्रकार कॉर्निया की प्रक्रिया विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. अपजित कौर के समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक संपन्न हुई। एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. देवेंद्र गुप्ता, डॉ. सुरुचि अंबास्ता एवं उनकी टीम ने डोनर मेंटेनेंस सहित महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सोटो-यू.पी. की टीम में भोलेश्वर पाठक, डॉ. क्रिस अग्रवाल, डॉ. अक्षिता बंसल, डॉ. एकता, नीलिमा दीक्षित, डॉ. अभिषेक एवं डॉ. जय प्रकाश शर्मा ने शनिवार रात्रि से रविवार सायं तक सभी विभागों के साथ सतत समन्वय स्थापित कर इस मल्टी-ऑर्गन डोनेशन को सफल बनाया। एसजीपीजीआईएमएस के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर हरीश चोपड़ा ने भी संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान प्रभावी समन्वय एवं प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अंगदान करने पर माफ हो जाता है सम्पूर्ण उपचार व्यय
डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि SOTTO-यू.पी. की पहल के अनुरूप एसजीपीजीआईएमएस के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की नीति के तहत यदि ब्रेन स्टेम डेड मरीज के परिजन अंगदान हेतु सहमति प्रदान करते हैं, तो सहमति के समय से संपूर्ण उपचार व्यय माफ कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि अंगदान के उपरांत दिवंगत को सम्मानपूर्वक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। इस अवसर पर निदेशक डॉ. आर.के. धीमन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेंद्र गुप्ता, सोटो-यू.पी. के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेश हर्षवर्धन, नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नारायण प्रसाद तथा एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. अरुण श्रीवास्तव एवं उनकी टीम उपस्थित रहे।
पत्नी का साहसिक एवं करुणामय निर्णय
डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि दिवंगत संदीप कुमार अपने पीछे पत्नी लक्ष्मी एवं 8 वर्षीय पुत्र को छोड़ गए हैं। इस दुःख की घड़ी में उनकी पत्नी द्वारा लिया गया साहसिक एवं करुणामय निर्णय पाँच अलग-अलग व्यक्तियों को नया जीवन देने में सहायक बना है, कॉर्निया को SOTTO-यू.पी. के माध्यम से केजीएमयू के कम्युनिटी आई बैंक में दान किया गया, जिससे जरूरतमंदों को नई दृष्टि प्राप्त होगी। उन्होंने अपील की कि शोक को आशा में परिवर्तित अंगदान महादान के इस अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लें।

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