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ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी में छाती को बचाना उतना ही सुरक्षित है जितना पूरी छाती को निकालना

-केजीएमयू के सर्जरी विभाग के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दूसरे दिन ब्रेस्ट एवं एंडोक्राइन सर्जरी तथा सर्जिकल ऑन्कोलॉजी पर व्याख्यान आयोजित

सेहत टाइम्स

लखनऊ। सर्जिकल एजुकेशन प्रोग्राम के द्वितीय दिवस पर सर्जिकल सुपरस्पेशलिटी जैसे ब्रेस्ट एवं एंडोक्राइन सर्जरी तथा सर्जिकल ऑन्कोलॉजी से संबंधित विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। अपने प्रेजेन्टेशन में विशेषज्ञों ने उन्नत ऑर्गन प्रिजर्वेशन सर्जरी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार कैंसर प्रभावित अंगों को बचाते हुए कैंसरग्रस्त भाग को हटाकर सर्जरी की जा सकती हैं, तथा हटाये हुए हिस्से का पुनर्निर्माण किस प्रकार किया जा सकता है। इससे मरीज क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर हो जाती है।

आयोजन सचिव डॉ गितिका नंदा सिंह ने बताया ​कि दूसरे दिन सबसे कॉमन कैंसर ब्रेस्ट कैंसर एवं ओरल कैंसर पर व्याख्यान प्रस्तुत किये गये। केजीएमयू के सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अभिनव अरुण सोनकर, एसजीपीजीआई के प्रो. गौरव अग्रवाल, केजीएमयू के प्रो. आनंद मिश्रा, प्रो. सुरेन्द्र कुमार, प्रो. आशीष एवं प्रो. पूजा रमाकांत ने स्तन रोगों, विशेष रूप से स्तन कैंसर तथा थायरॉयड सर्जरी से संबंधित विभिन्न विषयों पर उत्कृष्ट व्याख्यान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष  प्रो. अभिनव अरुण सोनकर ने अपने संबोधन में कहा कि थायरॉयड सर्जरी सुरक्षित है तथा घेंघा (गोइटर) के उपचार के लिए इसे एक सुरक्षित विकल्प के रूप में अपनाया जाना चाहिए।

प्रो. गौरव अग्रवाल ने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी में छाती को बचाना उतना ही सु​रक्षित है जितना पूरा छाती को निकालना। कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉ आशीष ने बताया कि कीमोथैरेपी के माध्यम से ट्यूमर को सिकोड़ कर निकाल दें तो छाती को बचाया जा सकता है। प्रो. पूजा रमाकांत ने यह संदेश दिया कि स्तन कैंसर के उपचार में प्रत्येक स्थिति में पूरे स्तन को हटाना आवश्यक नहीं होता। डॉ. गितिका नंदा सिंह ने सामान्य स्तन रोगों एवं उनके उपचार के विषय में विस्तृत चर्चा की।

डॉ. पुनीत एवं प्रो. पारिजात सूर्यवंशी ने ओरल कैंसर, जो वर्तमान समय में एक गंभीर समस्या है, पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. पारिजात ने इस तथ्य पर जोर दिया कि ओरल कैंसर का शीघ्र निदान उचित उपचार एवं बेहतर परिणाम के लिए अत्यंत आवश्यक है।

स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक प्रशिक्षण, केस प्रस्तुतिकरण एवं चर्चा के रूप में आयोजित किया गया, जिसका संचालन प्रो. अंजलि मिश्रा, प्रो. सुरेन्द्र कुमार, डॉ. विजय कुमार एवं डॉ. कुलरंजन द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन डॉ. कुशाग्र गौरव के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों की शल्य कौशल वृद्धि के उद्देश्य से कीमो पोर्ट इंसर्शन पर एक क्लिनिकल वर्कशॉप के साथ हुआ।

डॉ गितिका ने बताया कि हमारा उद्देश्य जूनियर डॉक्टरों को शीघ्र डायग्नोसिस का तरीका, उसे कहां रेफर करना है, अगर उपचार कर रहे हैं तो किस प्रकार उपचार करें, के बारे में जानकारी देना है।