-उत्तर प्रदेश के प्रथम एडवांस इंटरवेंशन पल्मोनोलॉजी सम्मेलन एआईपीकॉन 2026 का आगाज

सेहत टाइम्स
लखनऊ। इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, थोरेसिक ऑन्कोलॉजी और एडवांस्ड रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर जैसी फेफड़ों की गंभीर बीमारियों के इलाज की आधुनिक तकनीकों पर जानकारियों को साझा करते हुए उत्तर प्रदेश का प्रथम एडवांस इंटरवेंशन पल्मोनोलॉजी सम्मेलन एआईपीकॉन 2026 का आगाज आज 14 फरवरी को यहां केजीएमयू में हुआ। ज्ञात हो इन आधुनिक तकनीकों से फेफड़ों के कैंसर और गंभीर सांस की बीमारियों के लिए बिना चीर-फाड़ एक समग्र, कम जोखिम वाली और आधुनिक चिकित्सा किया जाना संभव हो पाता है। इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी में फेफड़ों और छाती की बीमारियों के निदान और उपचार के लिए एंडोस्कोपिक और न्यूनतम इनवेसिव (गैर-सर्जिकल) प्रक्रियाओं से डायग्नोसिस व उपचार किया जाता है, थोरेसिक ऑन्कोलॉजी में फेफड़ों, श्वासनली और छाती के अन्य अंगों में होने वाले कैंसर के निदान, स्टेजिंग और उपचार किया जाता है तथा एडवांस्ड रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर में श्वसन विफलता (Respiratory failure) या गंभीर फेफड़ों के रोगों वाले मरीजों के लिए गहन चिकित्सा (ICU) प्रदान की जाती है।

यह जानकारी देते हुए पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग केजीएमयू के विभागाध्यक्ष डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि यह सम्मेलन किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग, इंडियन चेस्ट सोसाइटी और पल्मोक्रिट फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 14-15 फरवरी को शताब्दी अस्पताल केजीएमयू, लखनऊ में आयोजित किया गया है। उन्होंने बताया कि एआईपीकॉन 2026 को लाइव प्रदर्शनों, विशेषज्ञ व्याख्यानों और व्यावहारिक कौशल विकास कार्यशालाओं के माध्यम से वायुमार्ग और फेफड़े संबंधी (Procedure) को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक प्रमुख शैक्षणिक मंच के रूप में प्रदर्शित किया गया है। यह सम्मेलन इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, थोरेसिक ऑन्कोलॉजी और एडवांस्ड रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित विशेषज्ञों को एक साथ ला रहा है, जिससे श्वसन चिकित्सा में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में केजीएमयू की स्थिति और मजबूत होगी।
उन्होंने बताया कि आज प्रथम दिवस के वैज्ञानिक सत्र में डॉ. हेमंत कुमार (आरएमएलआईएमएस, लखनऊ) ने लीनियर ईबीयूएस में लिम्फ नोड स्टेशन की पहचान पर एक विशेषज्ञ सत्र प्रस्तुत किया। डॉ. वीरोत्तम तोमर (मेरठ) ने लीनियर ईबीयूएस करने के लिए चरण-दर-चरण व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। डॉ. गिरीश सिंधवानी (AIIMS, ऋषिकेश) ने लीनियर ईबीयूएस प्रक्रियाओं में नैदानिक सटीकता में सुधार पर बात की। डॉ. अजमल खान (एसजीपीजीआई, लखनऊ) ने वक्षीय हस्तक्षेपों में उत्तल प्रोब ईबीयूएस की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
इसके अतिरिक्त प्रतिनिधियों के लिए लीनियर ईबीयूएस का एक लाइव केस प्रदर्शन और संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई। डॉ. अमित धामिजा (नई दिल्ली) ने रेडियल प्रोब, गाइड शीथ और सहायक उपकरणों के इष्टतम उपयोग पर चर्चा की। डॉ. वी. प्रतिभा प्रसाद (हैदराबाद) ने परिधीय फुफ्फुसीय घावों के लिए उन्नत उपकरणों पर प्रस्तुति दी। डॉ. राकेश गोदारा (जयपुर) ने परिधीय फुफ्फुसीय गांठों में हाइब्रिड प्रक्रियाओं और लागत-प्रभावशीलता पर विचार-विमर्श किया। वर्चुअल ब्रोंकोस्कोपिक नेविगेशन (VBN) के साथ रेडियल ईबीयूएस के लाइव प्रदर्शन में उन्नत नैदानिक रणनीतियों को प्रदर्शित किया गया। डॉ. चंचल राणा (केजीएमयू, लखनऊ) ने आरओएसई (रैपिड ऑन-साइट इवैल्यूएशन) पर एक केंद्रित सत्र आयोजित किया, जिसमें संकेत और तकनीक शामिल थी। इसके अतिरिक्त डॉ. वेद प्रकाश (केजीएमयू, लखनऊ) ने आईसीयू सेटिंग में ब्रोंकोस्कोपी पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। डॉ. बाशा जलाल खान (बंगलुरु) ने फेफड़े के प्रत्यारोपण के बाद की देखभाल में इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी की भूमिका पर चर्चा की।
पहले दिन जिन प्रैक्टिकल वर्कशॉप का आयोजन किया गया उनमें डॉ. मृत्युंजय सिंह ने बेसिक ब्रोंकोस्कोपी स्किल स्टेशन का संचालन किया। डॉ. गिरीश सिंधवानी और डॉ. हेमंत कुमार ने लीनियर और रेडियल ईबीयूएस इंस्ट्रूमेंटेशन वर्कशॉप का नेतृत्व किया। डॉ. वीरोत्तम तोमर और डॉ. प्रशांत एपी ने EBUS TBNA लिम्फ नोड मैपिंग और सैंपलिंग में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। डॉ. राकेश गोदारा और डॉ. हर्ष सक्सेना ने क्रायो-टीबीएनए तकनीकों में प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया। डॉ. चंचल राणा ने आरओएसई प्रैक्टिकल ट्रेनिंग स्टेशन का पर्यवेक्षण किया। डॉ. वी. प्रतिभा प्रसाद ने वर्चुअल ब्रोंकोस्कोपिक नेविगेशन (वीबीएन) तकनीकों का प्रदर्शन किया। आज के समारोह में पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक पद्मश्री प्रो राजेन्द्र प्रसाद भी उपस्थित रहे।

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