आखिर सेक्स वर्कर क्यों बन जाते हैं किन्नर

ट्रांसजेंडर से संबंधित मानव अधिकारों और सामाजिक मुद्दों पर संवेदीकरण कार्यक्रम

 

लखनऊ. किन्नरों/ ट्रांसजेंडरों की स्थिति को सुधारने के लिए हुए एक कार्यक्रम में बताया गया कि शैक्षिक स्तर में ट्रांसजेंडर/किन्नर की स्थिति बहुत ही दयनीय है लैंगिक व्यवहार में भिन्नता के कारण प्रारंभिक शिक्षा के समय इनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार हिंसा तिरस्कार के कारण यह स्कूल छोड़ कर भाग जाते हैं या पारिवारिक दबाव या सहयोग से शिक्षित हो जाते हैं  तो उन्हें कार्यस्थलो पर अस्वीकार कर दिया जाता है जिस कारण यह समुदाय बधाई मांगने/नाचने गाने/सेक्स वर्क जैस कृत्यों से अपना जीवन जीने को मजबूर हैं.

 

आज यहाँ ट्रांसजेंडर से संबंधित मानव अधिकारों और सामाजिक मुद्दों पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सम्बन्धित स्वास्थ्य प्रदाताओं के साथ आज आयोजित संवेदीकरण कार्यक्रम में कई तरह की सलाह दी गयीं.  कार्यक्रम में कहा गया कि किन्नर समाज को मुख्य धारा में लाने के लिए समाज को आगे आ कर साथ देना होगा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  डा.पी.के.गुप्ता की अध्यक्षता में चिकित्सा जगत के प्रतिनिधियो ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया. एकता सेवा संसथान, जो किन्नर समाज को मुख्य धारा में लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है,  की तरफ से एक सकारात्मक शुरुआत की गयी. कार्यक्रम में किन्नर समाज की वास्तविक स्थिति पर प्रकाश डाला गया  इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला जज सालसा सुशील रस्तोगी , डॉ.सुनीता चंद्रा चेयरपर्सन कम्युनिटी हेल्थ उपस्थित रहीं.

 

एकता संस्थान ने कहा कि किन्नर समाज जो आज की विकास की धारा में कहीं नजर नहीं आ रहा जिसकी वास्तविक स्थिति बहुत ही दयनीय है किन्नर के विकास का मुद्दा बहुत ही संवेदनशील है एवं इनकी आवश्यकता / स्थिति भौगोलिक सामाजिक स्तर पर भिन्न-भिन्न है किन्नर समाज के विकास के लिए सार्थक कार्य योजना बनाने किन्नर समुदाय को आत्म निर्भर बनाने के लिए प्रयास करने की जरूरत है.

 

बताया गया है कि ट्रांसजेंडर/किन्नर के लिए परिवार/समाज में अस्वीकार्यता लैंगिक भेदभाव बहुत अधिक है जिस कारण यह समुदाय अवसाद की स्थिति में है. 15 अप्रैल 2014 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए नालसा जजमेंट के आधार पर इस समुदाय के लिए अभी तक कोई कार्य नहीं किया गया है जिसके सम्बन्ध में संस्था जनपद में प्रशासनिक अधिकारियो के साथ निरंतर संपर्क करती रहती है एवं समय समय पर कार्यशाला/बैठक का आयोजन करती रहती है किन्तु इतने प्रयासों के बाद भी प्रशासन अपनी आंखे बंद किये हुए है.

 

संसथान की तरफ से कहा गया कि किन्नर किसी से कम नहीं बल्कि कुदरत ने कुछ ख़ास बनाया है  किन्नर में स्त्री एवं पुरुष  का समावेश होता है जिस कारण वह स्त्री एवं पुरुष दोनों की तरह चीजो को बेहतर तरीके से सोच समझ सकते है. किन्नरों में सीखने/ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है,  किन्नर बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते है,  किन्तु समाज अपनी धारणा को बदलना नहीं चाहता,  किन्नर बहुत ही भावुक होते है, किन्नर परिवार से तिरस्कृत होते हुए भी अपने परिवार के लिए समर्पित होते है जबकि साथ रहने वाले अपने बुरे समय में साथ छोड़ देते हैं,  समाज के निर्धन कमजोर लोगो की सहायता करने में सदैव आगे रहते है किन्तु दिखावा नहीं करते, किन्तु इस तस्वीर को बदलने के लिए किन्नर समाज संगठित हो कर प्रयास कर रहा है.