-दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में क्रॉनिक रोगों के साथ ही एक्यूट बीमारियों में होम्योपैथिक उपचार पर प्रस्तुत किये गए कई पेपर

सेहत टाइम्स
लखनऊ। क्रॉनिक रोगों के साथ ही एक्यूट बीमारियों में होम्योपैथिक उपचार के बारे में चर्चा और सितम्बर में अगली कांफ्रेंस में जैसलमेर राजस्थान में मिलने के वादे के साथ ही दो दिवसीय तृतीय इंटरनेशनल होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस 2024 11 फरवरी को सम्पन्न हो गई। दूसरे दिन कॉन्फ्रेंस के वैज्ञानिक सत्र में कई रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए।
सही डायग्नोसिस और सही ऑब्जरवेशन बहुत महत्वपूर्ण

लाल बहादुर शास्त्री भवन गन्ना संस्थान में रिसर्च सोसाइटी ऑफ़ होम्योपैथी द्वारा आयोजित दो दिवसीय इस कांफ्रेंस के दूसरे दिन हैदराबाद से डॉ एस प्रवीन कुमार ने अपने पेपर प्रस्तुत करते हुए बताया कि होम्योपैथिक में एक्यूट डिजीज का भी बहुत अच्छा इलाज है, लेकिन रोग की सही डायग्नोसिस और रोगी का ऑब्जरवेशन महत्वपूर्ण है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक महिला का अस्थमा का दौरा समझ कर इलाज किया जा रहा था, दरअसल वह हार्ट अटैक था। उन्होंने बताया कि इसकी पहचान मुझे पेशेंट के पास से आ रही यूरिन की बदबू से हुई जब मैंने कंफर्म किया तो पता चला कि दौरे के समय उसकी यूरिन निकल गई थी। डॉ प्रवीण कुमार ने बताया कि अस्थमा के दौरे में यूरिन नहीं निकलती है जबकि दिल के दौरे के समय यूरिन निकल जाती है। ऐसे में इस आधार पर उस लेडी को दवा दी गई।
डॉक्टर प्रवीन ने बताया कि सही डायग्नोसिस के बाद सही ऑब्जरवेशन किया जाना भी बहुत आवश्यक है अगर सही ऑब्जरवेशन कर दिया जाए तो सही दवा का चुनाव किया जा सकता है, उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण देते हुए बताया कि वह बच्चा टॉन्सिल के दर्द से बेहाल था, दर्द के चलते वह अपने माता-पिता को गाली भी दे रहा था, मैंने इसे देखकर समझा कि उसकी परेशानी किस स्तर की है और जब उसको इसकी दवा दी तो बच्चा शाम तक ठीक हो गया।

गाजीपुर से आए डॉक्टर विजयेंद्र प्रताप ने अपने पेपर प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार पक्षाघात और फेशियल पैरालिसिस के मरीजों को का होम्योपैथिक दवा से उपचार किया गया डॉ विजयेंद्र ने बताया कि ज्यादातर मामलों में फेशियल पैरालिसिस होने का कारण कान से चेहरे की और आने वाली नर्व में सूजन होना है, मरीज अगर बताये कि फेशियल पैरालिसिस होने से पहले कान में दर्द हुआ था तो इस आधार पर दवा का चुनाव किया जाता है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार पक्षाघात में यह देखा जाता है की दिमाग के किस हिस्से में सूजन के कारण ऐसा हुआ है।
इनके अलावा डॉ नवनीत बिडानी ने बच्चों की मनोवैज्ञानिक समस्याओं के होम्योपैथिक से इलाज के बारे में अपना पेपर प्रस्तुत किया। डॉ दीपक शर्मा ने पीसीओडी पर, जबकि डॉ धर्मेंद्र चक ने होम्योपैथी की जनरल फिलासफी के बारे में बताया। कन्याकुमारी से आयीं डॉ दिव्या रत्ना साहू ने लेप्रोसी में होने वाले जख्मों के साक्ष्य आधारित इलाज पर अपना पेपर प्रस्तुत किया। आगरा से आये डॉ प्रदीप गुप्ता ने डायबिटीज के केस दिखाए, जिन्हें ठीक किया गया।

कांफ्रेंस में भाग लेने न्यूज़ीलैंड से आये 82 वर्षीय डॉ जगमोहन शर्मा का विशेष सम्मान किया गया। इनके अतिरिक्त डॉ अमर सिंह शेखावत, डॉ बीएन सिंह, डॉ गिरीश गुप्ता, नेशनल मेडिकल कमीशन भारत सरकार के सदस्य डॉ आनन्द चतुर्वेदी, डॉ निशांत श्रीवास्तव, डॉ पंकज श्रीवास्तव, डॉ गौरी शंकर, डॉ ज्योति पंकज, डॉ गौरांग गुप्ता, डॉ आदर्श, डॉ अरुण सहित अन्य चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। पोस्टर प्रेजेंटेशन में डॉ अभिनव कुमार सक्सेना को पहला, डॉ आयुषी सिंह को दूसरा एवं डॉ कार्तिकेय को तीसरा पुरस्कार मिला।

कार्यक्रम के समापन पर रिसर्च सोसाइटी ऑफ़ होम्योपैथी के चेयरमैन डॉ सी पी सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए अतिथियों और आयोजन मंडल के लोगों का आभार जताया। उन्होंने चूरू राजस्थान से आये होम्योपैथी यूनिवर्सिटी के संस्थापक डॉ अमर सिंह शेखावत, डॉ बीएन सिंह ने कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए आभार जताया। डॉ सिंह ने कहा कि कांफ्रेंस की साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉ गिरीश गुप्ता का नाम अपनी विद्वता के कारण देश के कोने-कोने में मशहूर है, इन्होंने इस कांफ्रेंस में बहुत सहयोग किया है, ये नहीं होते तो शायद यह कांफ्रेंस आयोजित न जो पाती। उन्होंने डॉ निशांत श्रीवास्तव, डॉ पंकज श्रीवास्तव, डॉ गौरांग, डॉ आदर्श, डॉ रेनू यादव, डॉ दिव्या, डॉ गौरी शंकर, डॉ आरके सैनी, डॉ प्रदीप राय, डॉ रूपेश, डॉ अवधेश, डॉ प्रधान, डॉ एसके शुक्ल, डॉ ज्योति पंकज, डॉ सुगंधा, डॉ प्रांजल सहित सभी का आभार जताया। उन्होंने बताया कि रिसर्च सोसाइटी ऑफ़ होम्योपैथी की अगली कांफ्रेंस सितम्बर माह में राजस्थान के जैसलमेर में प्रस्तावित की गयी है। कांफ्रेंस के समापन समारोह में जीसी होम्योपैथिक कॉलेज के चेयरमैन डॉ ओमकार यादव भी उपस्थित रहे। मंच संचालन की मुख्य जिम्मेदारी डॉ पंकज श्रीवास्तव ने निभाई।
