यौवन पर नियंत्रण की कहानी, जितेन्द्र की जबानी

लगभग तीस वर्षों से जितेन्द्र ही एकमात्र ऐसे कलाकार रहे हैं जिसने अपन फिल्मी सफर राजश्री जैसी युवा व खूबसूरत अभिनेत्री के साथ शुरू किया था | तब से। अब तक उन्होंने मुमताज़, नीतू सिंह,आशा पारेख, हेमा मालिनी,लीला चंद्रावरकर से लेकर श्रीदेवी, जयाप्रदा आदि नायिकाओं के साथ काम किया |

जितेन्द्र नें ३०+ नाम की जिस ताकत की कैप्सूल का प्रचार किया था | वही कैप्सूल उनकी जवानी और तरोताजगी का रहस्य है, क्योंकि अधिकांशतः लोगों का यही भ्रम बना हुआ है कि जीतू की तारोताजगी का रहस्य यही कैप्सूल है | खुद जितेन्द्र के सामने जब यह बात रखी गई तो वह कहने लगे ” मेरा इस तरह की किसी कैप्सूल से कोई नाता नहीं है | यह तो मैंने सिर्फ विज्ञापन के लिए किया है | मेरे अपने स्वास्थ्य और ताज़गी के लिए मेरी अपनी मेहनत और लगन है |”

जितेन्द्र के साथ काम करने वाली अधिकतर नायिकाएं अपनी उम्र अपने चेहरे के मेकअप के बावजूद भी नहीं छिपा पातीं | लेकिन वहीं जितेन्द्र, जिसनें नायक के रूप में कई फिल्में कीं, आज भी नई नायिकाओं के साथ यंगस्टार दिखाई देते रहे हैं | सबसे पहले किसी भी कलाकार के लिए ही क्यों आम आदमी के लिए भी यह आवश्यक होता है कि वह टेंशन फ्री हो, क्योंकि टेंशन किसी को भी असमय बूढ़ा बना देता है | इसके बाद खाने पीने पर ध्यान देना आवश्यक है | मैंने आज से १५-१६ साल पहले सिगरेट बंद कर दी थी | इसका असर मेरे स्वास्थ्य पर काफी अच्छा रहा, क्योंकि जब से मैंने सिगरेट बंद की मेरा मोटापा बढ़ना बंद हो गया | वैसे भी मैं खाने के नाम पर केवल फल और उनका जूस लेता हूं | कभी कभी शाम को एक पतली सी चपाती बस, इससे अधिक और कुछ नहीं | मैंने हमेशा ही खाने पीने की ऐसी चीजों से परहेज़ रखा है जिनसे मोटापा बढ़ने का चांस रहता है |

इस बात को तो सभी मानते हैं कि अधिक खाना वैसे भी स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव ही डालता है, ऐसा करने से लंबी आयु तो होती ही है, शरीर शिथिल नहीं होने पाता, साथ ही थोड़ा बहुत शरीर को व्यायाम भी देना चाहिए चाहे वह एक्सरसाइज के रूप में हो या पैदल चलने के रूप में या किसी दूसरी मेहनत के रूप में | इन बातों के अलावा भी कोई ऐसी बात है जो व्यक्ति को आकर्षक और विशेष व्यक्ति बनाने में सहायक होती है ?

ऐसी बहुत सी बातें हैं जो आपको विशेष व्यक्ति बनाए रखती हैं जैसे आपकी बातचीत का ढंग, आपने कपड़े पहनने का ढंग आदि | अपने व्यक्तित्व के अनुरूप यदि कपड़ों का चुनाव नहीं होता तो अच्छी खासी पर्सनैलिटी बेकार लगती है | किसी भी इंसान को आकर्षक बनाने या उसका व्यक्तित्व निखारने में कपड़ों का ५०% सहयोग होता है | उसे देख कर आज के नौजवानों को भी शर्म महसूस होती है | यही कारण है कि जितेन्द्र ने सबसे अधिक नायिकाओं के साथ काम किया |