जन औषधि केंद्र के लिए दुकान भी उपलब्ध कराई जाएगी

 

देश भर में सबसे ज्यादा जन औषधि केंद्र उत्तर प्रदेश में खुलेंगे

 

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की जनता को शीघ्र सरकारी अस्पतालों के माध्यम से सस्ती दरों पर जेनेरिक दवाएं मिलना प्रारम्भ हो जायेगी। जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता बाजार में उपलब्ध ब्रान्डेड दवाओं के समान होती है तथा इनकी कीमत भी ब्रान्डेड दवाओं से कई गुना कम होती है। सार्वजनिक स्थानों पर सरकार द्वारा स्थापित किये जाने वाले जन औषधि केन्द्रों के संचालन हेतु वेंडर चयन करने के लिए आज यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में प्री-बिड बैठक का आयोजन किया गया। प्रदेश में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के संचालन का उत्तरदायित्व ‘‘स्टेट एजेन्सी फॉर काम्प्रीहेन्सिव हेल्थ एण्ड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज)’’ को सौंपा गया है।

 

 

 

साचीज़ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आलोक कुमार मित्रा ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश, पूरे देश में सर्वाधिक जन औषधि केन्द्र खोलने वाला पहला राज्य होगा। प्रदेश में जन औषधि केन्द्रों के संचालन के लिए पूरे प्रदेश को क्लस्टर में बांटा गया है, जिससे किसी एक कम्पनी का एकाधिकार सम्भव नहीं होगा और योजना प्रभावी ढ़ंग से लागू की जा सकेगी। जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से प्रदेश के बेरोजगार फार्मासिस्टों को रोजगार के अवसर प्रदान किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि पूरे देश में उत्तर प्रदेश मात्र एक ऐसा राज्य होगा जहां सरकार द्वारा 120 वर्ग फिट का निर्मित स्थान जन औषधि केन्द्र संचालित करने के लिए वेण्डर को उपलब्ध कराया जायेगा। साचीज़ डा0 राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय के परिसर में स्वयं के द्वारा एक जन औषधि केन्द्र की भी स्थापना करेगी, किसे एक माडल केन्द्र के रूप में विकसित किया जायेगा। पूरे प्रदेश में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्रों के निरीक्षण का उत्तरदायित्व भी साचीज़ का होगा।

 

 

 

श्री मित्रा ने बताया कि योजना के संचालन के लिए  वेबसाइट का भी निर्माण किया गया है। इस वेबसाइट के माध्यम से जनता को रीयल टाईम आधार पर जन औषधि केन्द्रों की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता तथा मूल्य की जानकारी प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने बताया कि वेबसाइट पर बाजार में उपलब्ध अन्य दवाओं की तुलना जेनेरिक दवाओं से किये जाने की भी सुविधा प्रदान की गयी है। प्रदेश सरकार ने उम्मीद जताई है कि इस परियोजना के अन्तर्गत खोले जाने वाले 1000 जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से एक वर्ष में 200 करोड़ रुपये से भी अधिक मूल्य की दवाओं की खरीददारी सम्भव हो सकेगी।