शेखर हॉस्पिटल के ब्लड बैंक में सब तरफ ‘गड़बड़झाला’

एसएफडीए की टीम ने छापेमारी में पायीं खामियां ही खामियां

निरस्त होगा लाइसेंस, रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गयी

लखनऊ। इंदिरा नगर के नामी गिरामी शेखर हास्पिटल में संचालित हो रहे ब्लड बैंक मेंं भी बहुत ‘गड़बडझाला’ मिली है। एक-दो नहीं 35 खामियों को ढूंढऩे में ही दस घंटे निकल गये। झोलाछाप की तर्ज पर चल रहे इस ब्लड बैंक का लाइसेंस निरस्त होना तय माना जा रहा है। बुधवार को अपरान्ह शुरू हुई छापेमारी देर रात तक चलती रही।
इसका खुलासा खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एसएफडीए ) की टीम द्वारा बुधवार शाम को डाले गये छापे के दौरान हुआ। बडे़ अस्पताल का रूतबा रखने वाले हास्पिटल के इस ब्लड बैंक में ब्लड बैग के रिकॉर्ड समेत करीब 35 खामियां मिली। खामियों की वजह से निरीक्षण करने गई टीम को 10 घंटे लगे, मानकों की जांच करने में। निरीक्षण करने गये ड्रग इंस्पेक्टर ने खामियों का रिकॉर्ड बनाकर, ब्लड बैंक का लाइसेंस निरस्तीकरण समेत खिलाफ में कठोर कार्रवाई करने की संस्तुति कर दी है।

कब लिया खून, कब की एक्सपायरी, कुछ भी अंकित नहीं

निरीक्षण करने गई टीम को सबसे पहले ब्लड बैंक पहुंचने पर ही गड़बड़ी मिलनी शुरू हो गई। ड्रग इंस्पेक्टर रमा शंकर ने बताया कि ब्लड बैंक पर पंजीकृत ब्लड बैंक का नाम नहीं लिखा था। पहली गलती मिलने पर जांच का दायरा बढ़ा दिया गया। इसके बाद करीब तीन बजे अंदर पहुंचने पर ब्लड बैंक का निरीक्षण शुरू किया गया, ब्लड बैग का रिकॉर्ड मांगा तो वह नहींं मिला। कितने बैग कहां से खरीदे गये?  कितने उपयोग हो चुके हैं? कितने बैग मौजूद है? किसी को कुछ भी पता नहीं था। बैग सम्बन्धी रिकॉर्ड, बैलेंस शीट मांगी तो नहीं मिला। इसके साथ ही मरीजों को दिये जाने वाले ब्लड बैग में लेबलिंग नहीं थी, कब खून डोनेट हुआ और कब की एक्सपायरी है आदि मरीज संबन्धी डिटेल यूनिट पर अंकित नहीं था। पूछने पर बताया गया कि स्टाफ छुट्टी पर है, इसलिए रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा है। हलांकि उन्हें अगले दो या तीन दिनों में रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये हैं। श्री शंकर ने बताया कि रक्तदाताओं को दिये जाने वाले डोनर कार्ड में भी गड़बड़ी मिली, डेट ऑफ इशू समेत उसमें डिटेल नहीं थी। साथ ही डोनर और ब्लड  लेने वालों के नाम वाला मास्टर रजिस्टर भी नहीं मिला। किस हास्पिटल से खून की डिमांड आई है?  और मरीज कहां और किस डॉक्टर के अंडर में भर्ती है आदि रेफर कार्ड नहीं मिला। उक्त कमियोंं समेत लगभग तीन दर्जन खामियों को दर्शाते हुए रिपोर्ट आलाधिकारियों को भेज दी है, रिपोर्ट में मरीजों के साथ होने वाले खिलवाड़ को देखते हुये अधोमानक संचालित हो रहे शेखर ब्लड बैंक का लाइसेंस निरस्त करने समेत कठोर से कठोर कार्रवाई की संस्तुति कर भेज दी है।

सीतापुर स्थित शेखर इंस्टीट्यूट में भी यही से जाता है खून

ड्रग इंस्पेक्टर रमा शंकर ने बताया कि शेखर हॉस्पिटल के इस ब्लड बैंक से सीतापुर स्थित शेखर इंस्टीट्यूट में भी खून की सप्लाई होती है, मगर इसके भी समस्त रिकॉर्ड नही मिले है। उन्होंने बताया कि इस ब्लड बैंक में एक साल में करीब आठ हजार ब्लड यूनिट की सप्लाई है। इसी में करीब एक हजार यूनिट सीतापुर जाता है। मगर, रिकॉर्डो में कुछ सही नहीं है।