स्तनों का स्वपरीक्षण महिलाओं को बचायेगा कैंसर से

लखनऊ। महिलाओं में होने वाले कैंसर में एक प्रमुख कैंसर स्तन कैंसर है। यदि कैंसर आरम्भिक अवस्था में पता चल जाये तो इसके इलाज के परिणाम बहुत अच्छे होते हैं। आरम्भ में ही पता होने का एक ही उचित रास्ता है वह है महिलाओं का स्वयं स्तन परीक्षण करना। यह कहना है किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्व विद्यालय के सर्जन डॉ विनोद जैन का।

प्रो विनोद जैन

लक्षण का इंतजार न करें, माह में एक बार खुद जांच करें

डॉ जैन ने एक विशेष बातचीत में ‘सेहत टाइम्स’ को बताया कि आरम्भिक अवस्था में कैंसर का पता लगाने के लिए हमें किसी लक्षण का इंतजार नहीं करना चाहिये, इसके प्रति जागरूक रहने से ही इसके बारे में पता लगाया जा सकता है। ऐसे में ब्रेस्ट स्क्रीनिंग इसका सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में यह जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है कि कोई दिक्कत न होने पर भी माह में एक बार अपने स्तनों का स्वयं ही परीक्षण कर लिया करें। उन्होंने बताया कि मासिक धर्म आरम्भ होने के 7 से 10 दिन बाद स्तन का स्वपरीक्षण करना चाहिये।  यदि महिला को मासिक चक्र नहीं हो रहा है तो उन्हें माह में एक तारीख चुन कर हर माह उसी तारीख में यह जांच करनी चाहिये। इस बारे में डॉ जैन बताते हैं कि इस परीक्षण में स्तन की गांठ, निप्पल से स्राव या स्तन की त्वचा में कोई असामान्यतया तो नहीं हैं, अगर है तो तुरंत किसी चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिये।

इस तरह करें स्तनों का परीक्षण

परीक्षण किस तरह करना है इस बारे में डॉ जैन बताते हैं कि महिलाएं शीशे के सामने खड़े होकर अथवा लेटकर भी स्वपरीक्षण कर सकती हैं इसमें बायें हाथ से दाहिने स्तन का और दायें हाथ से बायें स्तन का परीक्षण करना चाहिये। महिलाओं को हाथ उंगलियों को इकट्ठा कर के स्तन को ऊपर से नीचे, निप्पल से बाहर की ओर तथा गोलाकार तरीके से दबा-दबा कर देखना चाहिये कि कहीं गांठ तो नहीं है?

हर गांठ कैंसर नहीं होती है

डॉ जैन कहते हैं कि अक्सर महिलाएं गांठ पाये जाने पर एकदम से चिंतित हो जाती हैं कि उन्हें कैंसर हो गया इसलिए यह बताना बहुत जरूरी है कि हर गांठ कैंसर नहीं होती हैं इसलिए यदि कोई गांठ जैसी महसूस हो चिकित्सक से जरूर सम्पर्क करें जिससे उस गांठ के बारे में पता लगाया जा सके।